भुवनेश्वर में एक व्यक्ति ने दावा किया है कि बिना OTP, लिंक क्लिक या ऐप डाउनलोड किए फोन कॉल के बाद उसके खाते से रकम डेबिट हो गई।

फोन उठाते ही खाते से उड़े पैसे? भुवनेश्वर में सामने आया संदिग्ध साइबर फ्रॉड, न OTP आया, न लिंक पर क्लिक, फिर भी खाते से रकम डेबिट होने का दावा

Team The420
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भुवनेश्वर: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में कथित साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ऑनलाइन बैंकिंग सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि केवल एक फोन कॉल रिसीव करने के तुरंत बाद उसके बैंक खाते से रकम डेबिट हो गई। पीड़ित का कहना है कि न तो उसके मोबाइल पर कोई वन-टाइम पासवर्ड (OTP) आया, न उसने किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया और न ही कोई स्क्रीन-शेयरिंग एप्लिकेशन डाउनलोड किया था। घटना के बाद उसने साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए जांच की मांग की है।

शिकायतकर्ता की पहचान मंचेश्वर क्षेत्र निवासी तुषार पटनायक के रूप में हुई है। उनके अनुसार, घटना से पहले उनके मोबाइल फोन पर एक निजी कंपनी के नाम से लोन उपलब्ध कराने का संदेश (SMS) आया था। संदेश में दिए गए प्रस्ताव के कुछ ही देर बाद उन्हें एक फोन कॉल प्राप्त हुआ। उन्होंने कॉल रिसीव की और सामान्य बातचीत की, लेकिन इसके तुरंत बाद उनके बैंक खाते से धनराशि डेबिट होने का संदेश मिला।

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पीड़ित का दावा है कि पूरी घटना के दौरान उनसे किसी प्रकार का OTP साझा करने के लिए नहीं कहा गया। उन्होंने किसी वेबसाइट या लिंक पर क्लिक भी नहीं किया और न ही अपने मोबाइल फोन में कोई ऐसा एप्लिकेशन इंस्टॉल किया, जिससे किसी अन्य व्यक्ति को उनके डिवाइस का एक्सेस मिल सके। इसके बावजूद खाते से रकम निकलने की घटना ने उन्हें हैरान कर दिया।

घटना के बाद तुषार पटनायक ने मंगलवार को साइबर पुलिस स्टेशन पहुंचकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस से मामले की तकनीकी जांच कराने और धनराशि निकालने के तरीके का पता लगाने की मांग की है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर सकती हैं कि कथित लेनदेन किस माध्यम से हुआ, कॉल किस नंबर से किया गया, बैंक खाते तक पहुंच किस तरह बनाई गई और क्या इसमें किसी नए साइबर हमले या पहले से मौजूद किसी तकनीकी कमजोरी का इस्तेमाल किया गया। बैंकिंग लॉग, मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद ही घटना की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में केवल फोन कॉल रिसीव करने भर से बैंक खाते से पैसे डेबिट नहीं हो जाते। ऐसे मामलों में कई अन्य संभावनाओं की जांच आवश्यक होती है, जैसे मोबाइल डिवाइस से समझौता, पहले से इंस्टॉल कोई दुर्भावनापूर्ण एप्लिकेशन, बैंकिंग क्रेडेंशियल की चोरी, सिम से जुड़ी गड़बड़ी या किसी अन्य माध्यम से खाते तक अनधिकृत पहुंच। इसलिए बिना तकनीकी जांच के किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी लगातार नए तरीके विकसित कर रहे हैं और लोगों को झांसे में लेने के लिए फर्जी लोन ऑफर, निवेश योजनाएं तथा अन्य आकर्षक प्रस्तावों का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी अनजान नंबर से वित्तीय लेनदेन या बैंकिंग संबंधी कॉल आए तो सतर्क रहें, किसी भी गोपनीय जानकारी को साझा न करें और संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत बैंक तथा साइबर पुलिस को सूचित करें।

विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनधिकृत बैंक लेनदेन की स्थिति में तुरंत संबंधित बैंक की हेल्पलाइन पर संपर्क कर खाते या कार्ड को अस्थायी रूप से ब्लॉक कराएं। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं, ताकि धनराशि को समय रहते ट्रैक करने और संभावित रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और यह स्पष्ट होना बाकी है कि धनराशि किस तकनीक या माध्यम से निकाली गई। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह साइबर ठगी का कोई नया तरीका है या किसी अन्य प्रकार की डिजिटल सुरक्षा चूक का मामला।

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