बेंगलुरु में ₹5.3 करोड़ के सरकारी नौकरी घोटाले में बाप-बेटी गिरफ्तार, फर्जी ऑफर लेटर और ट्रेनिंग सेंटर से 40 से ज्यादा अभ्यर्थियों से ठगी

₹5.3 करोड़ के सरकारी नौकरी घोटाले में बाप-बेटी गिरफ्तार: फर्जी ऑफर लेटर और ट्रेनिंग सेंटर से 40 से ज्यादा अभ्यर्थियों से ठगी

Team The420
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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक संगठित नौकरी ठगी रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है। सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने एक व्यक्ति और उसकी बेटी को गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 40 से अधिक अभ्यर्थियों से करीब ₹5.3 करोड़ की ठगी की।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान एम ए मंसूर अहमद और उनकी बेटी शमशाद बेगम एम एम के रूप में हुई है, जो दोनों बेंगलुरु के निवासी बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों ने खासकर उत्तर कर्नाटक के युवाओं को निशाना बनाया और दावा किया कि उनके पास राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर मजबूत संपर्क हैं, जिनके जरिए केंद्रीय और राज्य सरकार के विभागों में नौकरी दिलाई जा सकती है।

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने रेलवे, आयकर विभाग, सिंचाई, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण विभागों में नौकरी का झांसा दिया। भरोसा कायम करने के लिए उन्होंने कथित रूप से फर्जी नियुक्ति पत्र (ऑफर लेटर) जारी किए और पूरी प्रक्रिया को असली भर्ती प्रक्रिया जैसा दिखाने की कोशिश की।

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इसके अलावा, इस ठगी को और विश्वसनीय बनाने के लिए बेंगलुरु, मुंबई और कोलकाता में फर्जी ट्रेनिंग सेंटर भी चलाए गए। इन सेंटरों के जरिए पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया गया कि उनकी नियुक्ति हो चुकी है और वे जॉइनिंग से पहले अनिवार्य प्रशिक्षण ले रहे हैं। पुलिस का कहना है कि इसी सुनियोजित ढांचे के कारण कई लोग लंबे समय तक इस धोखे में फंसे रहे।

शिकायत के अनुसार, कर्नाटक के विजयपुरा जिले के एक व्यक्ति की शिकायत के बाद यह मामला सामने आया। पीड़ितों को स्थायी सरकारी नौकरी और पोस्टिंग का भरोसा देकर उनसे चरणबद्ध तरीके से पैसे वसूले गए। कई अभ्यर्थियों ने अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार छोटी किश्तों से लेकर लाखों रुपये तक आरोपियों को दिए।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे रैकेट में दोनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं थीं। एक तरफ जहां नौकरी दिलाने और संपर्कों के दावे का काम संभाला जाता था, वहीं दूसरी ओर दस्तावेज तैयार करने और फर्जी ट्रेनिंग सेंटरों के संचालन में सहयोग किया जाता था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घोटाला तब उजागर हुआ जब कई पीड़ितों को शक हुआ कि उन्हें दिए गए नियुक्ति पत्र असली नहीं हैं और जिन सरकारी पदों का वादा किया गया था, वह कभी मिले ही नहीं। इसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई और जांच शुरू हुई, जिसके बाद गिरफ्तारी संभव हो सकी।

CCB ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है, क्योंकि आशंका है कि इसमें कई और सहयोगी शामिल हो सकते हैं।

जांच एजेंसियां अब बैंक लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी गई रकम कहां-कहां और किस तरह ट्रांसफर की गई। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, ठगी की कुल राशि और पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है।

यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि कैसे बेरोजगारी और सरकारी नौकरी की चाह का फायदा उठाकर संगठित गिरोह युवाओं को निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी नौकरी के दावे की पुष्टि केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल से ही करें और बिना जांच-पड़ताल के किसी को पैसे न दें।

फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और मामले की गहन जांच जारी है, जिसमें यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस रैकेट के तार अन्य राज्यों या बड़े संगठित नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

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