बेंगलुरु। शहर में वरिष्ठ नागरिक अब ऑनलाइन ठगों के प्रमुख निशाने पर हैं। ताजा मामला 94 वर्षीय एक वरिष्ठ शोधकर्ता का सामने आया है, जिसे डिजिटल गिरफ्तारी के बहाने कुल ₹4.9 करोड़ का चूना लगाया गया। ठगों ने खुद को CBI और बलारी पुलिस अधिकारी बताकर वृद्ध को डराया और अलग-थलग कर कई चरणों में पैसे ट्रांसफर करने पर मजबूर किया।
विक्टोरिया रोड के पास रहने वाले वरिष्ठ नागरिक ने घटना के बाद सेंट्रल डिवीजन साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। अधिकारियों के अनुसार ठगों ने झूठे मानव तस्करी मामले में फंसाने की धमकी देकर पैसे निकालने की कोशिश की।
यह घटना बेलगावी में हाल ही में हुई ₹15 करोड़ की साइबर ठगी के ठीक बाद आई है, जिसमें एक व्यवसायी को पैसे लॉन्ड्रिंग के नाम पर ठगा गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि वरिष्ठ नागरिक डिजिटल फ्रॉड और मानसिक दबाव के जाल में जल्दी फंस जाते हैं और साइबर अपराधियों के लिए आसान निशाना बनते हैं।
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फ्रॉड कैसे हुआ:
12 फरवरी को वरिष्ठ शोधकर्ता को उनके लैंडलाइन नंबर पर अज्ञात कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को BESCOM कर्मचारी बताया और कहा कि उनके खिलाफ बलारी पुलिस स्टेशन में मानव तस्करी का मामला दर्ज है। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक पुलिस इंस्पेक्टर कॉल करेगा और कॉल तुरंत कट गई।
इसके बाद ‘संदीप राव’ नामक व्यक्ति ने मोबाइल नंबर 70223200069 से कॉल किया। उसने खुद को CBI अधिकारी बताकर कहा कि मामला CBI को ट्रांसफर किया जा रहा है और आधार विवरण व्हाट्सएप पर भेजने को कहा। विवरण मिलने के बाद उसने व्हाट्सएप पर नकली FIR भेज दी, जिससे मामला वास्तविक प्रतीत हो।
फ्रॉड यहीं नहीं रुका। वरिष्ठ नागरिक को कई व्हाट्सएप नंबरों (+9384538542, +8790619580, +8438454683, 9652706938, 8945570794) से वीडियो कॉल आई। कॉल में एक व्यक्ति पुलिस जैसी यूनिफॉर्म में खुद को CBI अधिकारी बता रहा था और कहा, “आप डिजिटल गिरफ्तारी में हैं, किसी से बात नहीं कर सकते।”
कई किश्तों में ₹4.9 करोड़ की ठगी
ठग ने व्हाट्सएप पर हर तीन घंटे में जवाब देने का आदेश दिया ताकि वह नियमों का पालन कर रहा है यह दिखा सके। इसके बाद कहा गया कि मामला गंभीर है और नाम को मामले से हटाने के लिए पैसे भेजने होंगे। डर और अलगाव के कारण वरिष्ठ नागरिक ने कई ट्रांजेक्शन के माध्यम से कुल ₹4.9 करोड़ ट्रांसफर कर दिए।
ठगों की रणनीति:
- लैंडलाइन पर खुद को BESCOM कर्मचारी बताकर संपर्क किया।
- झूठे मामले का हवाला देकर डराया गया और कहा कि पुलिस इंस्पेक्टर कॉल करेगा।
- ‘संदीप राव’ ने खुद को CBI अधिकारी बताकर आधार विवरण और नकली FIR मंगाई।
- वीडियो कॉल में डिजिटल गिरफ्तारी की चेतावनी दी।
- हर तीन घंटे में व्हाट्सएप पर जवाब देने का आदेश दिया।
- डर और अलगाव का फायदा उठाकर ₹4.9 करोड़ कई किश्तों में ट्रांसफर कराए गए।
विशेषज्ञ की चेतावनी:
Renowned Cyber Crime Expert और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा,
“डिजिटल गिरफ्तारी जैसे फ्रॉड में वरिष्ठ नागरिक डर और अलगाव के जाल में फंस जाते हैं। वे अक्सर अपनी सुरक्षा और परिवार की चिंता में बड़े वित्तीय नुकसान उठाते हैं। किसी भी अज्ञात कॉल या संदेश पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करना घातक हो सकता है।”
प्रो. सिंह ने लोगों से सचेत रहने और साइबर सुरक्षा उपाय अपनाने का आग्रह किया। वरिष्ठ नागरिकों को किसी भी अज्ञात कॉल या व्हाट्सएप संदेश में निजी जानकारी साझा न करने और किसी भी असामान्य अनुरोध की तुरंत पुलिस को रिपोर्ट करने की सलाह दी।
