कर्नाटक के बेलगावी जिले में एक पूर्व सैनिक की मौत की जांच ने ऐसा चौंकाने वाला मोड़ लिया है, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि चिकित्सा और जांच तंत्र को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। शुरुआत में सड़क दुर्घटना और बाद में हृदयाघात से हुई सामान्य मौत समझे गए मामले में पुलिस ने अब एक कथित सुनियोजित हत्या की साजिश का खुलासा किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार लगभग ₹2 करोड़ की बीमा राशि हासिल करने के उद्देश्य से रची गई इस कथित साजिश में कई लोगों की भूमिका सामने आई है। मामले में एक डॉक्टर, फॉरेंसिक प्रयोगशाला से जुड़े अधिकारियों और अन्य आरोपियों सहित कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस जांच के अनुसार 46 वर्षीय पूर्व सैनिक संदीप मांजरगी 13 मार्च को दोपहिया वाहन से यात्रा कर रहे थे, जब वह एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। दुर्घटना के बाद उन्हें स्थानीय सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक तौर पर उनकी हालत स्थिर बताई गई थी और पुलिस ने उनका बयान भी दर्ज किया था। उस समय उन्होंने किसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया था।
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जांच में सामने आया कि कुछ समय बाद उनकी पत्नी उन्हें दूसरे अस्पताल में ले गईं, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। शुरुआती रिपोर्टों में मौत को सामान्य चिकित्सकीय कारणों से जोड़कर देखा गया, लेकिन बाद में सामने आए कुछ डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। पुलिस को संदेह हुआ कि दुर्घटना के बाद की घटनाएं सामान्य नहीं थीं और मौत के पीछे किसी बड़ी साजिश की संभावना हो सकती है।
मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले। अधिकारियों के अनुसार एक व्हाट्सएप स्टेटस और डिजिटल संचार से जुड़े कुछ संकेतों ने जांच को नई दिशा दी। इसके बाद संदिग्ध व्यक्तियों के बीच संबंधों, वित्तीय लेन-देन और कॉल रिकॉर्ड की विस्तृत पड़ताल शुरू की गई। जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि मृतक की पत्नी और उसके एक करीबी परिचित के बीच संबंध थे तथा दोनों पर बीमा राशि हासिल करने के लिए साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।
जांचकर्ताओं का दावा है कि दुर्घटना के बाद उपचार प्रक्रिया के दौरान भी कथित तौर पर कई अनियमितताएं हुईं। पुलिस को ऐसे संकेत मिले कि चिकित्सकीय दस्तावेजों और फॉरेंसिक रिपोर्टों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया था। इसी आधार पर एक डॉक्टर और फॉरेंसिक प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। बाद में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार जांच में यह भी पता चला कि कथित साजिश का आर्थिक पहलू काफी महत्वपूर्ण था। अधिकारियों का मानना है कि मृतक के नाम पर मौजूद बीमा पॉलिसियों से बड़ी रकम हासिल करने की योजना बनाई गई थी। इसी कारण दुर्घटना के बाद की परिस्थितियों और उपचार संबंधी निर्णयों की भी गहन जांच की गई।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि आधुनिक आपराधिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य अक्सर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार व्हाट्सएप, सोशल मीडिया गतिविधियां, मोबाइल डेटा और इलेक्ट्रॉनिक संचार कई बार ऐसी कड़ियां उजागर कर देते हैं जो पारंपरिक जांच में सामने नहीं आ पातीं। उन्होंने कहा कि डिजिटल फॉरेंसिक और तकनीकी विश्लेषण आज गंभीर अपराधों की जांच का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी वित्तीय दस्तावेजों, बीमा दावों, बैंक खातों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा क्या इसके पीछे कोई व्यापक आर्थिक लाभ का नेटवर्क सक्रिय था।
इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि संगठित अपराध केवल हिंसा तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि उनमें वित्तीय लाभ, डिजिटल संचार और पेशेवर तंत्र का कथित दुरुपयोग भी शामिल हो सकता है। पुलिस का कहना है कि आगे की जांच के साथ इस बहुस्तरीय साजिश से जुड़े और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
