फर्जी आईटीसी और बोगस फर्मों का जाल बेनकाब; 13 मामलों की केंद्रीकृत जांच से तेज होंगी गिरफ्तारियां

जीएसटी फ्रॉड पर बड़ा एक्शन: ₹50 करोड़ की कर चोरी की जांच अब एसआईटी के हवाले

Roopa
By Roopa
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बरेली: बड़े पैमाने पर हो रही जीएसटी चोरी के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए जिले में दर्ज सभी 13 मामलों की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दी है। इस फैसले से फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और बोगस फर्मों के जरिए किए जा रहे टैक्स फ्रॉड की जांच में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, पहले पांच मामलों की जांच पहले ही एसआईटी को ट्रांसफर की जा चुकी थी, जबकि शेष आठ मामलों को भी अब इसी टीम को सौंप दिया गया है। इसके साथ ही अब सभी मामलों की जांच एक ही एजेंसी के तहत केंद्रीकृत तरीके से होगी, जिससे जांच में समन्वय और प्रभावशीलता दोनों बढ़ेंगी।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन मामलों में पिछले एक साल के दौरान ₹50 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी की गई है। हालांकि जांच एजेंसियों का मानना है कि यह आंकड़ा अभी शुरुआती है और जैसे-जैसे वित्तीय लेनदेन की गहराई से पड़ताल होगी, घोटाले का दायरा और भी बड़ा सामने आ सकता है।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने बोगस कंपनियों का नेटवर्क तैयार कर फर्जी बिलिंग का सहारा लिया। इन नकली बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया जाता था, जिससे टैक्स देनदारी कम दिखाई जाती थी या अवैध रूप से रिफंड हासिल किया जाता था। यह तरीका जीएसटी फ्रॉड के मामलों में देशभर में तेजी से फैल रहा है और इसे पकड़ना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है।

एसआईटी को मजबूत करने के लिए क्राइम ब्रांच के एक अनुभवी अधिकारी को मुख्य विवेचक बनाया गया है, जबकि विभिन्न थानों से कई सह विवेचकों को टीम में शामिल किया गया है। टीम का विस्तार इस उद्देश्य से किया गया है कि सभी मामलों की गहराई से जांच कर तय समय में निष्कर्ष तक पहुंचा जा सके।

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जिन मामलों की जांच पहले एसआईटी को सौंपी गई थी, वे प्रेमनगर, किला, इज्जतनगर, बिथरी चैनपुर और कैंट थाना क्षेत्रों से जुड़े हैं। वहीं, हाल ही में बहेड़ी, बारादरी, शाही, बिथरी चैनपुर और इज्जतनगर क्षेत्रों में दर्ज अन्य मामलों को भी एसआईटी के हवाले कर दिया गया है। सभी मामलों को एक साथ लाने से जांच एजेंसियों को आपसी कड़ियों को जोड़ने और पूरे नेटवर्क की पहचान करने में मदद मिलेगी।

प्रदेश स्तर पर भी जीएसटी चोरी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। वर्ष 2018 से अब तक विभिन्न जिलों में 200 से अधिक मामलों में ₹1,000 करोड़ से ज्यादा की कर चोरी सामने आ चुकी है। इनमें अधिकांश मामलों में फर्जी आईटीसी और कागजी कंपनियों के जरिए धोखाधड़ी की गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह एक संगठित और व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है।

जांच एजेंसियां अब डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। बैंक खातों के लेनदेन, जीएसटी रिटर्न, कंपनी रजिस्ट्रेशन और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इस नेटवर्क के तार अन्य जिलों या राज्यों से तो नहीं जुड़े हैं।

अधिकारियों का मानना है कि सभी मामलों को एसआईटी को सौंपने से मुख्य आरोपियों की पहचान जल्द हो सकेगी और उनकी गिरफ्तारी में तेजी आएगी। इसके अलावा, विभिन्न जांच इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा, जिससे कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकेगी।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के आर्थिक अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। दोषियों के खिलाफ गिरफ्तारी, संपत्ति की जब्ती और सख्त कानूनी कार्रवाई जैसे कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और जरूरत पड़ने पर नए मुकदमे भी दर्ज किए जा सकते हैं।

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