बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में ₹16.26 करोड़ के जीएसटी फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। फर्जी फर्म बनाकर जाली टैक्स चालान (इनवॉइस) जारी करने और अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल करने के आरोप में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इज्जतनगर और कैंट थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुई इन गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसियां अब इस पूरे कथित जीएसटी फर्जीवाड़ा नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं, जिससे सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचने का आरोप है।
मामले में 12 जनवरी को राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त गौरव सिंह की तहरीर पर इज्जतनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार, ‘हिम ट्रेडर्स’ नाम से एक फर्जी फर्म बनाकर जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी टैक्स बिल जारी किए जा रहे थे। बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के जरिए ₹16,26,62,609 का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लिया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अनुराग आर्या ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया और पूरे नेटवर्क की जांच के निर्देश दिए। जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और खुफिया जानकारी के आधार पर एसआईटी के मुख्य विवेचक एवं कैंट इंस्पेक्टर संजय धीर ने इज्जतनगर पुलिस टीम के साथ शुक्रवार रात नैनीताल रोड स्थित रोड नंबर-8 के पास छापेमारी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हिमांशु कुमार, निवासी अशर्द कमरुई गांव, थाना करपी, जिला अरवल (बिहार), और कुंवर सनोज मौर्य, निवासी बांसपुरा गांव, थाना सोरों, जिला कासगंज, जो वर्तमान में बरेली के बारादरी क्षेत्र स्थित तुलसी नगर में रह रहा है, के रूप में हुई है। दोनों आरोपियों को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पूछताछ के दौरान हिमांशु कुमार ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह वर्ष 2019 से ‘हिम ट्रेडर्स’ के नाम से फर्जी फर्म संचालित कर रहा था। उसने जांचकर्ताओं को बताया कि उसने यह फर्म हुमेर उर्फ मुबारक खान के कहने पर बनाई थी, जिसके बदले उसे ₹3 लाख दिए गए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस फर्म का इस्तेमाल वास्तविक कारोबार के बजाय केवल फर्जी बिल तैयार करने और अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा था।
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दूसरे आरोपी कुंवर सनोज मौर्य ने भी पूछताछ में कथित रूप से स्वीकार किया कि वह कमीशन के बदले फर्जी जीएसटी बिल तैयार कराता था। जांच के अनुसार, उसने इस काम से अब तक करीब ₹7 लाख की कमाई की। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ पहले से भी धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले दर्ज हैं, जिससे उसके ऐसे वित्तीय अपराधों में पहले से शामिल होने की आशंका भी जताई जा रही है।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन, ₹852 नकद, पैन कार्ड, आधार कार्ड तथा बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच एजेंसियां इन मोबाइल फोन और वित्तीय दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कर रही हैं ताकि इस कथित जीएसटी फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लाभार्थियों, फर्जी कंपनियों और संदिग्ध बैंक लेनदेन का पता लगाया जा सके।
प्रारंभिक जांच में अधिकारियों को आशंका है कि यह मामला केवल एक फर्जी फर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे फर्जी कंपनियां बनाकर जाली बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का अवैध लाभ लेने वाला एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। एसआईटी बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड, जीएसटी रिटर्न और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
जांच एजेंसियां हुमेर उर्फ मुबारक खान सहित इस कथित गिरोह के अन्य संभावित सरगनाओं और सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जैसे-जैसे नए साक्ष्य सामने आएंगे, इस मामले में और गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि फर्जी जीएसटी पंजीकरण, जाली दस्तावेजों और फर्जी बिलिंग के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले संगठित नेटवर्क कर व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
