बरेली: कैनविज कंपनी के सीएमडी कन्हैया गुलाटी और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ कथित निवेश धोखाधड़ी का एक और मामला सामने आया है। बरेली के बारादरी थाने में आठ पीड़ितों की शिकायत पर कन्हैया गुलाटी समेत 13 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कंपनी में निवेश के बदले हर महीने 5 प्रतिशत लाभ देने का भरोसा देकर उनसे कुल करीब ₹84 लाख लिए गए, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, मामले में कन्हैया गुलाटी के अलावा जगतपाल मौर्य, हरेंद्र प्रकाश पटेल, बादाम सिंह, नरेश पटेल, सोमपाल पटेल, अंशुल मौर्य, हरपाल पटेल, ओमप्रकाश मौर्य, प्रमोद सिंह परिहार, योगेंद्र गंगवार और यतेंद्र गंगवार के साथ एक अज्ञात व्यक्ति को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायतों के आधार पर पुलिस अब निवेश योजना, रकम के लेनदेन और आरोपियों की आपसी भूमिका की जांच कर रही है।
5% मासिक लाभ का दिया गया भरोसा
हरुनगला निवासी विनोद ने शिकायत में आरोप लगाया कि उसकी मुलाकात कुछ लोगों के माध्यम से कन्हैया गुलाटी और कंपनी से जुड़े व्यक्तियों से कराई गई थी। उसे कथित तौर पर बताया गया कि कंपनी में ₹1 लाख लगाने पर 22 महीने तक हर महीने 5 प्रतिशत लाभ दिया जाएगा और 24वें महीने में मूलधन वापस कर दिया जाएगा।
शिकायत के मुताबिक, इस योजना पर भरोसा करके विनोद ने अपने खाते से ₹5 लाख, अपनी मां विमला देवी के खाते से ₹10 लाख और बहन आरती के खाते से ₹6 लाख समेत कुल ₹22 लाख निवेश किए। आरोप है कि शुरुआती कुछ महीनों तक उसे लाभ की रकम मिलती रही, लेकिन फरवरी 2025 में भुगतान बंद हो गया।
जब निवेश की रकम और लाभ वापस मांगा गया तो कथित तौर पर आरोपियों ने धमकी दी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे पुलिस में पहुंच होने का हवाला देकर डराया गया और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
आठ पीड़ितों ने बताई अलग-अलग रकम
मामले में दर्ज शिकायतों के अनुसार, अन्य पीड़ितों ने भी अलग-अलग रकम निवेश करने का दावा किया है। सुनीता से ₹1 लाख, रामलली से ₹15 लाख, लता देवी से ₹5 लाख और सपना, उनके पिता तथा ससुर से मिलाकर ₹19.40 लाख लिए जाने का आरोप है।
इसी तरह ऊषा गुप्ता से ₹2 लाख, सूबेदार से ₹4.50 लाख, उमेश शंखधार से ₹6.50 लाख और अंकित पटेल से ₹15 लाख लिए जाने की शिकायत की गई है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि निवेश के लिए किसी ने जेवर गिरवी रखे तो किसी ने दूसरी जगह से पैसे की व्यवस्था की।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन रकमों को किन बैंक खातों में जमा कराया गया और बाद में उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
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70 से ज्यादा FIR, फिर भी गिरफ्तारी नहीं
कन्हैया गुलाटी के खिलाफ बरेली में पहले से बड़ी संख्या में धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ अब तक 70 से अधिक प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं। मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) भी गठित की गई है, लेकिन अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
जांच एजेंसियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित निवेश योजना के जरिए कितने लोगों से रकम जुटाई गई और कुल कितनी राशि का लेनदेन हुआ। अलग-अलग मामलों में सामने आए आरोपों के बीच बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच इस नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करने में अहम हो सकती है।
नवाबगंज में भी दर्ज हुआ अलग मामला
कैनविज कंपनी से जुड़ा एक अन्य मामला नवाबगंज थाने में भी दर्ज हुआ है। आदर्श नगर निवासी सुरजीत कुमार रस्तोगी ने आरोप लगाया कि उन्हें कंपनी में निवेश पर हर महीने 5 प्रतिशत लाभ देने का भरोसा दिलाया गया था। उन्होंने अपना मकान गिरवी रखकर कथित तौर पर ₹3 लाख निवेश किए।
शिकायत के अनुसार, अप्रैल 2025 के बाद कंपनी का कार्यालय बंद हो गया। रकम वापस मांगने पर कथित रूप से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। इस शिकायत पर पुलिस ने कन्हैया गुलाटी, यतेंद्र कुमार, योगेंद्र कुमार और प्रमोद परिहार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
जांच अब वित्तीय नेटवर्क पर केंद्रित
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच पुलिस के सामने केवल आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि कथित ठगी की पूरी वित्तीय कड़ी का पता लगाना भी चुनौती है। जांच में कंपनी के बैंक खाते, निवेशकों से प्राप्त रकम, एजेंटों की भूमिका और धन के आगे हुए हस्तांतरण की पड़ताल की जा सकती है।
फिलहाल दर्ज मामलों में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं और प्राथमिकी अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करती। पुलिस की जांच यह तय करेगी कि निवेश योजना के नाम पर रकम किस तरीके से जुटाई गई, भुगतान क्यों बंद हुआ और कथित तौर पर जमा की गई राशि आखिर किन लोगों या खातों तक पहुंची।
