बलरामपुर। पुलिस ने बालरामपुर में एक बड़े साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है और पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर देशभर के लोगों को ठगा कर लगभग ₹58 करोड़ की रकम हड़पने में शामिल थे।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मोहम्मद अकराम खान, बच्चा लाल, अतिफ, प्रतीक मिश्रा और सुजीत सिंह के रूप में हुई है। सभी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। जांच में सामने आया कि यह गिरोह एक सुनियोजित नेटवर्क के तहत लोगों को अपने बैंक अकाउंट और लिंक्ड मोबाइल सिम कार्ड भाड़े पर देने के लिए उकसाता था। अकाउंट धारकों को ₹15,000–20,000 का भुगतान किया जाता था, जबकि इस व्यवस्था में एजेंटों को लगभग ₹5,000 कमीशन मिलता था।
गिरोह ने फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर कई अतिरिक्त बैंक अकाउंट और सिम कार्ड बनाए, जिन्हें ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी, पहचान की नकल और अवैध जुआ प्लेटफॉर्म से पैसा प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया गया। आरोपियों ने लेनदेन को छुपाने के लिए क्यूआर कोड, यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल कर कई खातों में धनराशि ट्रांसफर की।
जांच में यह भी पता चला कि गिरोह ने कई व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए संचालन समन्वित किया। बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड मिठाई के डिब्बों में छिपाकर कूरियर के जरिए सहयोगियों तक पहुंचाए जाते थे। अब तक पुलिस ने सिंडिकेट से जुड़े 17 बैंक अकाउंट की पहचान की है और देशभर में 14 शिकायतें दर्ज हुई हैं। केवल आठ खातों की विस्तार से जांच में ही ₹5 करोड़ से अधिक के लेनदेन सामने आए हैं, जबकि पूरे नेटवर्क से जुड़ी कुल ठगी लगभग ₹58 करोड़ आंकी गई है।
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पुलिस ने आरोपियों से पांच मोबाइल फोन और फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए। जांच में यह भी सामने आया कि अतिफ का आपराधिक रिकॉर्ड है। पुलिस ने बताया कि सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान और वित्तीय लेनदेन का पता लगाने के प्रयास जारी हैं। डिजिटल साक्ष्य और लेनदेन रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का दायरा सामने लाया जा सके।
यह मामला साइबर अपराधियों की बढ़ती जटिलता को उजागर करता है, जो तकनीकी कौशल और संगठित नेटवर्क का इस्तेमाल कर बड़ी रकम की ठगी करते हैं। पुलिस ने आम नागरिकों से सावधानी बरतने और किसी भी ऑनलाइन निवेश या अपरिचित लेनदेन में पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही शामिल होने की सलाह दी है।
यह कार्रवाई न केवल साइबर ठगी की गंभीरता को दर्शाती है, बल्कि देशभर में फैल रहे डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ पुलिस की सक्रियता को भी उजागर करती है।
