बल्लारी: बल्लारी जिले में किसानों के साथ बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। 85 किसानों का आरोप है कि कुछ व्यापारी मक्का और पया खरीदने के बाद ₹1.87 करोड़ का भुगतान किए बिना रातों-रात फरार हो गए। प्रभावित किसानों की शिकायत पर सिरिगेरी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई और अब फरार व्यापारियों की तलाश में पुलिस सक्रिय है।
घोटाले का पूरा विवरण
किसान टी. संतोष (भैरपुरा) के अनुसार, चार आरोपी—बसवनगौड़ा और मंजुनाथगौड़ा (भैरपुरा), मंजुनाथगौड़ा (सिरिगेरी), और के. मंजुनाथगौड़ा (कर्नूल, आंध्र प्रदेश)—ने लगभग 85 किसानों से मक्का और पया खरीदा, लेकिन भुगतान नहीं किया।
पिछले दो महीनों में, सिरुगुप्पा तालुक के सैकड़ों किसानों ने इन व्यापारियों को हजारों बोरे मक्का और पया बेचे। बार-बार “आज” या “कल” भुगतान का वादा करने के बावजूद, व्यापारी कथित रूप से फरार हो गए।
किसानों की मुश्किलें
गुस्से और निराशा में किसान आरोपी के घरों के सामने जमा हुए, लेकिन सभी घर बंद मिले। इससे स्पष्ट हुआ कि व्यापारी भाग गए हैं।
“हमने उन पर भरोसा करके अपनी उपज बेची, लेकिन अब हम असहाय रह गए हैं,” एक किसान ने कहा।
खरीदी गई फसलों का कुल मूल्य लगभग ₹1.87 करोड़ आंका गया है, मक्का की कीमत ₹1,980 प्रति क्विंटल और पया ₹2,400 प्रति क्विंटल थी। कई किसानों ने फसल की खेती के लिए ऋण लिया था और अब उन्हें चुकाने में कठिनाई हो रही है।
“हमने खेती में सब कुछ लगाया, उम्मीद थी कि उपज बेचने के बाद लाभ होगा। अब हम ऋण चुकाने या परिवार चलाने में असमर्थ हैं,” एक और किसान ने रोते हुए बताया।
पुलिस कार्रवाई और तकनीकी जांच
सिरिगेरी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। अधिकारी फरार व्यापारियों को पकड़ने और बकाया राशि वसूलने में सक्रिय हैं। जांच का मुख्य फोकस है:
- वित्तीय नुकसान और बकाया राशि की सटीक पहचान।
- आरोपियों से जुड़े बैंक ट्रांज़ैक्शन, ऑनलाइन भुगतान और फंड मूवमेंट की ट्रेसिंग।
- व्यापारियों के डिजिटल footprint की समीक्षा: मोबाइल, WhatsApp संदेश, और ऑनलाइन लेन-देन।
- आरोपी और उनके सहयोगियों के बीच नेटवर्क और संभावित साजिश की जांच।
प्रभावित किसानों की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित करना, विशेषकर जिन पर ऋण का बोझ है।
जांच में बैंकिंग और डिजिटल डाटा का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पता लगाया जा सके कि पैसा किन खातों में ट्रांसफर हुआ और कौन इसके वास्तविक लाभार्थी हैं।
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व्यापक प्रभाव
यह घोटाला फसल खरीद प्रक्रिया की कमजोरियों और छोटे किसानों पर वित्तीय जोखिम को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी धोखाधड़ी ग्रामीण आजीविका पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है और स्थानीय व्यापार नेटवर्क में अविश्वास पैदा कर सकती है।
अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी को रोकने के लिए बेहतर निगरानी और नियामक ढांचे की आवश्यकता है। किसानों ने पुलिस और जिला प्रशासन से अपील की है कि जांच तेजी से पूरी की जाए, बकाया राशि वसूली जाए और धोखाधड़ी पर रोक लगाई जाए।
अगले कदम
पुलिस अन्य जिलों, जैसे कर्नूल, आंध्र प्रदेश, के साथ समन्वय कर फरार व्यापारियों का पता लगा रही है।
- आरोपियों के खाते या संपत्ति को फ्रीज़ करने के प्रयास जारी हैं।
- बैंक और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच जारी, जिससे भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी के पैटर्न का पता लगाया जा सके।
- किसान शांति पूर्वक विरोध जारी रखे हुए हैं और न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
