बालाघाट में सरकारी फोर्टिफाइड चावल की कथित हेराफेरी मामले में SIT ने हर्ष राइस मिल से चार ट्रक और 100 से अधिक खाली बोरे जब्त किए हैं।

सरकारी फोर्टिफाइड चावल घोटाले की जांच तेज: हर्ष राइस मिल से चार ट्रक और 100 से अधिक खाली बोरे जब्त, SIT को मिले अहम सुराग

Team The420
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बालाघाट: मध्य प्रदेश में सरकारी फोर्टिफाइड चावल की कथित हेराफेरी और एथनॉल उत्पादन से जुड़े बहुचर्चित घोटाले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। विशेष जांच दल (SIT) ने मंगलवार को बालाघाट जिले की टेकाड़ी स्थित हर्ष राइस इंडस्ट्री में छापेमारी कर चार ट्रकों और 100 से अधिक खाली बोरों को जब्त किया। जांच एजेंसी का मानना है कि ये जब्ती मामले की कड़ियों को जोड़ने में अहम साबित हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए ट्रकों का इस्तेमाल कथित तौर पर सरकारी चावल की हेराफेरी में किया गया था, जबकि खाली बोरे भी इसी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कार्रवाई मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और उनकी निशानदेही पर की गई। SIT अब दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन, परिवहन रिकॉर्ड, भंडारण व्यवस्था और वितरण से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।

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प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के नवेगांव डिपो से छिंदवाड़ा स्थित एवीजे ग्रुप के एथनॉल प्लांट के लिए भेजे गए सरकारी फोर्टिफाइड चावल को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाने के बजाय रास्ते में ही विभिन्न राइस मिलों में उतार दिया गया। सूत्रों के अनुसार, टेकाड़ी स्थित हर्ष राइस मिल से जब्त किए गए खाली बोरे भी उसी सरकारी चावल से जुड़े हो सकते हैं, हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

सूत्रों के मुताबिक, जब्ती की कार्रवाई के दौरान हर्ष राइस मिल का साझेदार और मामले का आरोपी विनोद शर्मा भी मौजूद था। जांच एजेंसी ने उसकी निशानदेही पर ट्रकों और खाली बोरों को कब्जे में लिया। अधिकारियों का मानना है कि इन बरामदगी से कथित हेराफेरी के तरीके और पूरे परिवहन नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

जांच के दायरे में पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता रामकिशोर कावरे के भाई कुमार कावरे और उनके भतीजे अविनाश कावरे का नाम भी सामने आया है। हालांकि जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ किसी नई कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनके संबंध में भी कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

SIT ने इससे पहले भी अलग-अलग राइस मिलों से बड़ी मात्रा में खाली बोरे बरामद किए हैं। वारासिवनी स्थित संचेती राइस मिल से करीब 2,000 खाली बोरे जब्त किए गए थे। जांच में आरोप है कि सरकारी चावल उतारने के बाद सबूत मिटाने के उद्देश्य से बोरों पर लगे टैग हटा दिए गए थे। इसी तरह सिवनी की नंदगोपाल राइस मिल से भी 1,000 से अधिक खाली बोरे बरामद किए गए। इन मामलों में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की जांच की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, अब जांच का फोकस केवल चावल की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे वित्तीय नेटवर्क, परिवहन व्यवस्था और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। बैंक खातों, भुगतान रिकॉर्ड, वाहन संचालन, गोदामों के स्टॉक रजिस्टर और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी चावल किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में कथित तौर पर डायवर्ट किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी खाद्यान्न से जुड़े मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज, जीपीएस डेटा, गोदाम रजिस्टर और वित्तीय लेनदेन की जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि आपूर्ति श्रृंखला के किसी भी चरण में अनियमितता पाई जाती है तो उससे पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल SIT की जांच जारी है। एजेंसी महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कुछ संदिग्ध राइस मिल संचालकों से भी पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी फोर्टिफाइड चावल की कथित हेराफेरी का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

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