झालावाड़ में सरकारी और संविदा नौकरी दिलाने के नाम पर ₹16.40 लाख की कथित ठगी के मामले में आठ नए पीड़ित सामने आए हैं।

इजरायल में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित भर्ती घोटाला, इंटरनेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी पर FIR; बेरोजगार युवाओं से धोखाधड़ी की आशंका

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By Roopa
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आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में इजरायल में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित अनियमित भर्ती प्रक्रिया संचालित किए जाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने एक इंटरनेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि एजेंसी ने विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित सरकारी प्रक्रिया का पालन किए बिना बेरोजगार युवाओं की भर्ती के लिए सीधे साक्षात्कार आयोजित किए। सेवायोजन विभाग का कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के साथ धोखाधड़ी की आशंका उत्पन्न हुई है। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस एजेंसी की वैधता, भर्ती प्रक्रिया और उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, मामला आजमगढ़ के सिधारी थाना क्षेत्र का है, जहां सेवायोजन विभाग के सहायक निदेशक राममूर्ति की तहरीर पर संबंधित इंटरनेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायत में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर श्रम एवं सेवायोजन विभाग द्वारा संचालित रोजगार संगम पोर्टल के माध्यम से देश और विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की अधिकृत व्यवस्था बनाई गई है। विदेश में रोजगार के लिए उम्मीदवारों का चयन भी निर्धारित नियमों और विभागीय प्रक्रिया के तहत किया जाना अनिवार्य है।

शिकायत के अनुसार, संबंधित एजेंसी ने विभागीय पोर्टल का उपयोग किए बिना और निर्धारित दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए सिधारी क्षेत्र स्थित जयरामपुर स्टील फैक्ट्री के निकट एक तकनीकी संस्थान परिसर में इजरायल में श्रमिकों की भर्ती के नाम पर सीधे इंटरव्यू आयोजित किए। आरोप है कि इस दौरान बड़ी संख्या में बेरोजगार युवक रोजगार की उम्मीद में वहां पहुंचे और चयन प्रक्रिया में शामिल हुए।

सेवायोजन विभाग का कहना है कि विदेश में रोजगार से संबंधित भर्ती केवल अधिकृत माध्यमों और नियमानुसार ही कराई जानी चाहिए। यदि कोई संस्था निर्धारित प्रक्रिया से हटकर भर्ती अभियान चलाती है तो इससे नौकरी तलाशने वाले युवाओं के साथ आर्थिक और दस्तावेजी धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

प्रारंभिक जांच में पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित एजेंसी के पास विदेश में भर्ती कराने के लिए आवश्यक सरकारी अनुमति, लाइसेंस और वैधानिक स्वीकृतियां थीं या नहीं। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या अभ्यर्थियों से किसी प्रकार का पंजीकरण शुल्क, प्रोसेसिंग फीस या अन्य आर्थिक राशि ली गई थी तथा भर्ती के नाम पर उनसे कौन-कौन से दस्तावेज एकत्र किए गए।

जांच एजेंसियां इंटरव्यू के आयोजन से जुड़े रिकॉर्ड, प्रचार सामग्री, अभ्यर्थियों के आवेदन, एजेंसी के प्रतिनिधियों की भूमिका और संभावित वित्तीय लेनदेन का भी परीक्षण कर रही हैं। यदि जांच में यह सामने आता है कि भर्ती प्रक्रिया के नाम पर युवाओं को गुमराह किया गया या अवैध रूप से धन एकत्र किया गया, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के मामलों में अपराधी अक्सर आकर्षक वेतन, त्वरित चयन और सीमित समय के अवसर का लालच देकर युवाओं को निशाना बनाते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी विदेशी नौकरी के प्रस्ताव पर विश्वास करने से पहले संबंधित एजेंसी की सरकारी मान्यता, लाइसेंस, पंजीकरण और भर्ती प्रक्रिया की आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें। उन्होंने यह भी कहा कि बिना सत्यापन किसी भी एजेंसी को पासपोर्ट, आधार, शैक्षणिक प्रमाणपत्र या धनराशि उपलब्ध न कराएं और संदेह होने पर तुरंत पुलिस अथवा संबंधित सरकारी विभाग को सूचना दें।

पुलिस ने बताया कि सहायक निदेशक सेवायोजन की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और विवेचना उपनिरीक्षक को सौंप दी गई है। एजेंसी की वैधता, भर्ती प्रक्रिया, युवाओं से किए गए दावों और संभावित आर्थिक लेनदेन की जांच जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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