नई दिल्ली: अटल पेंशन योजना (APY) में लाभार्थियों की पात्रता और निगरानी को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, योजना से जुड़े 14,14,947 लाभार्थी आयकरदाता पाए गए हैं। इसके अलावा करीब 14 लाख ऐसे लाभार्थियों के भी योजना से जुड़े होने की बात सामने आई है, जो अन्य पेंशन या सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। CAG ने ऐसे मामलों की पहचान कर पात्रता के अनुरूप कार्रवाई करने और विभिन्न योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई है।
अटल पेंशन योजना का उद्देश्य मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के लोगों को वृद्धावस्था में नियमित पेंशन की सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में आयकरदाताओं और अन्य पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों की मौजूदगी ने योजना की पात्रता जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। ऑडिट के मुताबिक, लाभार्थियों की स्थिति में बदलाव की निगरानी और अलग-अलग सरकारी योजनाओं के रिकॉर्ड का प्रभावी मिलान नहीं होने से ऐसे मामले सामने आए।
14.14 लाख आयकरदाताओं के नाम सामने आए
CAG की जांच में अटल पेंशन योजना के 14,14,947 सब्सक्राइबर आयकरदाता पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना की पात्रता से जुड़े नियमों के संदर्भ में ऐसे लाभार्थियों की स्थिति की जांच की जानी चाहिए। खासतौर पर उन मामलों में सत्यापन जरूरी है, जहां लाभार्थी योजना से जुड़ने के समय पात्र था, लेकिन बाद में उसकी आयकर स्थिति बदल गई।
रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केवल आवेदन के समय पात्रता की जांच पर्याप्त नहीं है। लाभार्थियों की स्थिति में समय के साथ होने वाले बदलावों की निगरानी के लिए सरकारी डेटाबेस के बीच नियमित मिलान की व्यवस्था आवश्यक है। इससे अपात्र लोगों के बने रहने और सार्वजनिक धन या सरकारी सहायता के संभावित गलत इस्तेमाल को रोका जा सकता है।
दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी ओवरलैप
CAG ने अटल पेंशन योजना और दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों के बीच संभावित दोहराव पर भी चिंता जताई है। ऑडिट में करीब 14 लाख ऐसे लाभार्थियों का उल्लेख किया गया है, जो अन्य पेंशन या सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में भी शामिल हैं।
रिपोर्ट में विशेष रूप से अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना और प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के लक्षित समूहों में ओवरलैप का मुद्दा उठाया गया है। इन योजनाओं के लाभार्थियों के बीच समानता होने से यह सुनिश्चित करना जरूरी हो जाता है कि पात्र व्यक्ति को निर्धारित लाभ मिले और एक ही व्यक्ति को अलग-अलग योजनाओं से ऐसे लाभ न मिलें, जिनके लिए वह पात्र नहीं है।
2 करोड़ सब्सक्राइबर का लक्ष्य पांच साल की देरी से पूरा
अटल पेंशन योजना की शुरुआत असंगठित क्षेत्र के कामगारों और ऐसे लोगों को वृद्धावस्था में वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी, जिनके पास नियमित पेंशन व्यवस्था नहीं है। योजना के लिए शुरुआती तौर पर 2 करोड़ सब्सक्राइबर का लक्ष्य तय किया गया था। CAG के अनुसार, यह लक्ष्य पांच वर्ष की देरी से पूरा हुआ।
इसके बाद योजना में पंजीकरण तेजी से बढ़ा। सितंबर 2022 तक अटल पेंशन योजना के कुल पंजीकृत ग्राहकों की संख्या 4 करोड़ से अधिक हो गई थी। हालांकि, ऑडिट में यह भी पाया गया कि योजना शुरू होने के बाद ऐसे सब्सक्राइबरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिनकी आयकर स्थिति पात्रता से जुड़े सवाल खड़े करती है।
एकल पेंशन नियामक तंत्र की सिफारिश
CAG ने पेंशन क्षेत्र की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एकल पेंशन नियामक तंत्र विकसित करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में सेबी और बीमा क्षेत्र के नियामक IRDAI की तर्ज पर पेंशन से जुड़ी योजनाओं की निगरानी के लिए अधिक समन्वित व्यवस्था की जरूरत बताई गई है।
ऑडिट के मुताबिक, अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में लाभार्थियों के रिकॉर्ड का प्रभावी डेटा मिलान नहीं होने से पात्रता संबंधी विसंगतियां सामने आ सकती हैं। एक केंद्रीकृत या बेहतर समन्वित व्यवस्था के जरिए लाभार्थियों की पहचान, रिकॉर्ड सत्यापन और संभावित दोहरे लाभ की निगरानी मजबूत की जा सकती है।
CAG की रिपोर्ट के बाद सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि अटल पेंशन योजना का लाभ वास्तविक लक्षित वर्ग तक सुनिश्चित किया जाए और ऐसे लाभार्थियों की पहचान की जाए, जो पात्रता मानदंडों के अनुरूप नहीं हैं या अन्य योजनाओं से जुड़े होने के कारण संभावित रूप से दोहरा लाभ ले रहे हैं। रिपोर्ट की सिफारिशों पर कार्रवाई से योजना की पात्रता जांच, डेटा साझा करने और निगरानी व्यवस्था में बदलाव की संभावना है।
