असम सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने एक बड़े “व्हीकल इम्प्लांट” इंश्योरेंस घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें दुर्घटना रिकॉर्ड में हेरफेर कर ICICI Lombard General Insurance Company से गलत तरीके से मुआवजा लेने की साजिश रची गई थी। यह मामला वर्ष 2015 के बोंगाईगांव सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसे अब अदालत में पेश जांच निष्कर्षों के आधार पर संगठित आपराधिक साजिश माना गया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, एक बीमित मोटरसाइकिल को बाद में जानबूझकर दुर्घटना रिकॉर्ड में “इम्प्लांट” किया गया, जबकि वास्तविक हादसे में एक अलग वाहन शामिल था। जांचकर्ताओं का कहना है कि मूल रूप से एक दोपहिया वाहन और साइकिल की टक्कर हुई थी, लेकिन बाद में दस्तावेजों में बदलाव कर बीमित मोटरसाइकिल को शामिल कर दिया गया ताकि बीमा क्लेम की राशि बढ़ाई जा सके।
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यह मामला तब सामने आया जब ICICI Lombard की आंतरिक जांच में क्लेम दस्तावेजों में असंगतियां पाई गईं। इसके बाद कंपनी ने फील्ड वेरिफिकेशन शुरू किया और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पुलिस जनरल डायरी एंट्री प्राप्त की। इन रिकॉर्ड्स की FIR से तुलना करने पर वाहन नंबरों में स्पष्ट अंतर मिला, जिससे पूरे मामले पर संदेह गहरा गया।
इसके बाद बीमा कंपनी ने गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख किया, जिसने मामले को गंभीर मानते हुए आगे की जांच के निर्देश दिए। इसी क्रम में मामला असम SIT को सौंपा गया, जो पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत बीमा धोखाधड़ी मामलों की जांच कर रही थी।
गहन जांच के बाद SIT ने पुष्टि की कि दुर्घटना रिकॉर्ड में जानबूझकर बदलाव किया गया था और बीमित वाहन को फर्जी तरीके से केस फाइल में जोड़ा गया। जांच टीम ने इसे “बेहद संगठित और योजनाबद्ध” साजिश बताया, जिसमें कई स्तरों पर दस्तावेजों में हेरफेर किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, इस घोटाले में केवल कागजी बदलाव ही नहीं बल्कि पुलिस रिकॉर्डिंग प्रक्रिया में संभावित मिलीभगत के संकेत भी मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि शुरुआती जनरल डायरी एंट्री और बाद की FIR में वाहन विवरणों का अंतर ही मुख्य सुराग साबित हुआ।
ICICI Lombard ने कहा है कि कंपनी हर क्लेम को पारदर्शिता, निष्पक्षता और सावधानी के साथ जांचती है। मोटर क्लेम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कंपनी का उद्देश्य वैध दावों का समय पर निपटान करना है, लेकिन साथ ही किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोकना भी प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि “व्हीकल इम्प्लांट” जैसे इंश्योरेंस फ्रॉड बीमा प्रणाली के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में न केवल बीमा कंपनियों को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि ईमानदार पॉलिसीधारकों पर भी प्रीमियम बढ़ने का अप्रत्यक्ष बोझ पड़ता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अब अदालतें ऐसे मामलों में RTI रिकॉर्ड, पुलिस दस्तावेज और डिजिटल ट्रेल्स की गहन जांच पर अधिक भरोसा कर रही हैं ताकि रिकॉर्ड में किसी भी तरह की हेरफेर को पकड़ा जा सके। यह मामला भी इसी तकनीकी और दस्तावेजी सत्यापन की अहमियत को उजागर करता है।
SIT ने संकेत दिया है कि जांच अभी जारी है और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं, क्योंकि यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
फिलहाल असम SIT यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी तरह की तकनीक अन्य दुर्घटना बीमा मामलों में भी इस्तेमाल की गई थी। इस खुलासे ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि संगठित बीमा धोखाधड़ी नेटवर्क लगातार अधिक जटिल और तकनीकी रूप से उन्नत होते जा रहे हैं।
