HYBE चेयरमैन बैंग सी-ह्युक पर प्री-IPO डीलिंग्स और कथित निवेशक धोखे के मामले में गिरफ्तारी वारंट की मांग ने के-पॉप इंडस्ट्री में हलचल बढ़ा दी

AP विधायक की बैंक खाता में सेंध: फर्जी ट्रैफिक चालान लिंक में ₹12 लाख की चोरी

Roopa
By Roopa
4 Min Read

पोलावरम/अमरावती। आंध्र प्रदेश के पोलावरम से जनता सेना के विधायक चिर्री बलराजू हाल ही में साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुए, जिसमें उनके बैंक खाते से कुल ₹12 लाख की राशि गायब हो गई। अधिकारियों के अनुसार, विधायक को उनके मोबाइल पर एक मैसेज प्राप्त हुआ, जिसमें कहा गया कि उनके ऊपर एक ट्रैफिक चालान लंबित है। संदेश में एक लिंक भी था, जो देखने में रोड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) का आधिकारिक नोटिस प्रतीत हो रहा था।

विश्वास करते हुए विधायक ने लिंक पर क्लिक किया। कुछ ही मिनटों में उनके बैंक खाते से कई लेनदेन किए गए, जिससे कुल ₹12 लाख की राशि निकाल ली गई। घटना का पता चलते ही विधायक ने तत्काल नजदीकी जीलुगुमिली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर क्राइम विभाग की मदद से धन की ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग कर रही है।

फर्जी लिंक के जरिए तेजी से बढ़ती धोखाधड़ी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के साइबर फ्रॉड के मामले हाल के वर्षों में बढ़ते जा रहे हैं। धोखेबाज अक्सर RTA चालान, बैंक अपडेट, कूरियर डिलीवरी या KYC वेरिफिकेशन के नाम पर फर्जी लिंक भेजते हैं। ये लिंक SMS, WhatsApp या सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाए जाते हैं। एक बार क्लिक करने पर, यह व्यक्ति की निजी और वित्तीय जानकारी चुरा सकते हैं और बैंक खाते से धन निकाल सकते हैं।

आंध्र प्रदेश के DGP हरीश कुमार गुप्ता ने जनता को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध ऐप्स डाउनलोड न करें। उन्होंने यह भी जोर दिया कि चालान या बिल से संबंधित सभी भुगतानों को केवल आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ऐप्स के माध्यम से ही करना चाहिए।

FutureCrime Summit 2026 Calls for Speakers From Government, Industry and Academia

त्वरित कार्रवाई से धन की रिकवरी संभव

डीजीपी ने आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या निकटतम पुलिस स्टेशन पहुंचें। उन्होंने बताया कि जल्दी कार्रवाई करने पर कभी-कभी खोई हुई राशि की रिकवरी भी संभव है।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, राजनीतिक और सरकारी व्यक्तियों को निशाना बनाकर इस तरह के घोटाले बढ़ते जा रहे हैं। यह केवल व्यक्तिगत वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक विश्वास और सरकारी संस्थानों की डिजिटल सुरक्षा पर भी प्रश्न खड़ा करता है।

सावधानी और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मोबाइल और कंप्यूटर उपयोग के दौरान हमेशा सतर्क रहें। किसी भी लिंक या ऐप पर क्लिक करने से पहले स्रोत की पुष्टि करें। बैंकिंग और सरकारी लेनदेन के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल्स और सत्यापित ऐप्स का उपयोग किया जाना चाहिए।

साइबर धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि और हाई‑प्रोफाइल शिकार जैसे विधायक बलराजू की घटना इस बात का संकेत हैं कि डिजिटल सुरक्षा के प्रति जनता और अधिकारियों दोनों को सतर्क रहना अनिवार्य है। आंध्र प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां फर्जी लिंक और डिजिटल फ्रॉड के जरिए खातों से लाखों रुपये चोरी किए गए।

यह घटना जनता के लिए एक चेतावनी भी है कि डिजिटल धोखाधड़ी अब किसी भी व्यक्ति को निशाना बना सकती है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई राजनीतिक शख्सियत।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन और सरकारी प्रक्रियाओं में सतर्कता, नियमित पासवर्ड अपडेट और केवल भरोसेमंद ऐप्स व पोर्टल्स का इस्तेमाल इस तरह के फ्रॉड से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

हमसे जुड़ें

Share This Article