अलीगढ़: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से वर्ष 2019 में कॉमर्स विषय में पीएचडी करने वाले जुनैद अहमद को करीब ₹400 करोड़ की कथित निवेश ठगी के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी पर एएमयू के सैकड़ों कर्मचारियों समेत आम लोगों को निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर रकम जुटाने और बाद में उस धनराशि को अपने कर्मचारियों तथा सहयोगियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, जुनैद के खिलाफ अलग-अलग थानों में पांच मुकदमे दर्ज हैं और उसके अन्य कथित सहयोगियों की तलाश की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, जुनैद अहमद ने निवेश के नाम पर लोगों को आकर्षक रिटर्न का भरोसा दिलाया था। वह कथित तौर पर ‘इन्वेस्टमेंट’, ‘साइना हॉलिडेज’ और ‘सेहला फार्मा’ जैसी योजनाओं में पैसा लगाने के लिए लोगों को तैयार करता था। शुरुआत में निवेशकों को लाभ मिलने से उसकी गतिविधियों पर ज्यादा संदेह नहीं हुआ। बाद में निवेश का दायरा बढ़ता गया और बड़ी संख्या में लोगों से रकम जुटाई जाने लगी।
जांच में सामने आया कि जुनैद ने 2019 में एएमयू से पीएचडी पूरी करने के बाद म्यूचुअल फंड कारोबार शुरू किया था। शुरुआती दौर में उसे कुछ लाभ मिला, लेकिन बाद में कारोबार में भारी नुकसान होने लगा। पुलिस का आरोप है कि इस नुकसान से उबरने और तत्काल बड़ी रकम जुटाने के लिए उसने वर्ष 2022 में मैरिस रोड स्थित लैंडमार्क मॉल में ‘साइना फाइनेंशियल एडवाइजर’ नाम से कार्यालय शुरू किया। आरोप है कि इस कार्यालय के माध्यम से निवेश के नाम पर लोगों से रकम एकत्र की जाती थी।
पुलिस के अनुसार, जुनैद विशेष रूप से एएमयू कर्मचारियों और परिचित लोगों को अपने निवेश प्रस्तावों के जरिए भरोसे में लेता था। उन्हें सामान्य निवेश विकल्पों की तुलना में अधिक लाभ मिलने का दावा किया जाता था। विश्वास बनने के बाद निवेशकों से रकम आरोपी द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। पुलिस अब इन खातों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर जुटाई गई रकम कहां गई और इसमें कितने बैंक खाते इस्तेमाल किए गए।
अलीगढ़ पुलिस के अनुसार, आरोपी अनूपशहर रोड स्थित एमराल्ड गुलिस्ता अपार्टमेंट में रहता था। उसे शुक्रवार को अनूपशहर रोड से गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से तीन कथित फर्जी आधार कार्ड और ₹25 हजार नकद बरामद किए गए। पुलिस का कहना है कि बरामद दस्तावेजों की जांच की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इनका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी करीब तीन वर्षों तक लोगों से निवेश के नाम पर रकम जुटाता रहा। वर्ष 2025 में कुछ निवेशकों को लेनदेन और रिटर्न को लेकर संदेह होने लगा। इसके बाद शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं और मामले की जांच शुरू हुई। पुलिस अब उन निवेशकों की संख्या जुटा रही है जिन्होंने आरोपी की कथित योजनाओं में रकम लगाई थी। साथ ही विभिन्न बैंक खातों के जरिए हुए लेनदेन का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, बड़े निवेश घोटालों में भरोसा कायम करना आरोपियों की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। किसी शैक्षणिक या पेशेवर पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल लोगों में विश्वसनीयता पैदा करने के लिए किया जा सकता है। ऐसे मामलों में बैंकिंग लेनदेन, कंपनी के दस्तावेज, निवेशकों से हुई डिजिटल बातचीत और धन के अंतिम उपयोग की जांच से पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ₹400 करोड़ की रकम में कितनी धनराशि वास्तव में निवेश के नाम पर जुटाई गई और कितनी रकम अन्य खातों या संपत्तियों में स्थानांतरित की गई। आरोपी के कथित सहयोगियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर अन्य पीड़ितों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
फिलहाल जुनैद अहमद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है और मामले की वित्तीय जांच जारी है। पुलिस उसके बैंक खातों, कथित कंपनियों, निवेश योजनाओं और सहयोगियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। साथ ही अन्य संभावित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
