अलीगढ़: साइबर ठगी के लिए बैंक खातों के इस्तेमाल के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में अलीगढ़ पुलिस ने दो और संदिग्ध खातों पर मुकदमे दर्ज किए हैं। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरजी) से मिली सूचनाओं की जांच के बाद सामने आया कि इन खातों में देश के अलग-अलग राज्यों में हुई ऑनलाइन ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। पुलिस के अनुसार, अकेले एक खाते के खिलाफ सात अलग-अलग जिलों से साइबर ठगी की शिकायतें सामने आई हैं। दोनों खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया के साथ बैंक से लेनदेन का पूरा ब्योरा मांगा गया है।
पहला मामला लोधा क्षेत्र के हैबतपुर गांव निवासी बबीता देवी पत्नी संजय कुमार के कैनरा बैंक खाते से जुड़ा है। बबीता देवी वर्तमान में हरियाणा के बल्लभगढ़ स्थित राजीव कॉलोनी, हली चौक में रह रही हैं। एनसीआरजी पोर्टल से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने खाते की पड़ताल की। जांच में पता चला कि इस खाते के खिलाफ महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस कमिश्नरेट के हिंजेवाड़ी थाने में साइबर ठगी की शिकायत दर्ज है। संबंधित खाताधारक को पूछताछ के लिए नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
एक खाते में सात राज्यों से पहुंची रकम
दूसरा मामला लोधा क्षेत्र के नगला दान सहाय निवासी अवनीश कुमार पुत्र पन्ना सिंह के बैंक खाते से संबंधित है। पुलिस जांच में यह खाता भी एनसीआरजी पोर्टल पर संदिग्ध पाया गया। खाते की पड़ताल के दौरान पता चला कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई साइबर ठगी की रकम इस खाते में पहुंची थी।
पुलिस के अनुसार, अवनीश कुमार के खाते से जुड़े मामलों के तार राजस्थान, आंध्र प्रदेश, बिहार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैले हैं। राजस्थान के बूंदी जिले के देई और झुंझुनूं जिले के मंडेला थाने में दो शिकायतें दर्ज हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश के एनटीआर कमिश्नरेट के जग्गैयापेट, बिहार के पटना जिले के शास्त्री नगर, हरियाणा के यमुनानगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के बंडा थाने में भी ऑनलाइन ठगी की शिकायतें सामने आई हैं।
जांच में सामने आया कि अलग-अलग मामलों में पीड़ितों से ठगी गई रकम इसी बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी। इस आधार पर पुलिस को आशंका है कि खाते का इस्तेमाल साइबर अपराधियों ने रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया।
चार-पांच खातों में बांटी जाती है रकम
साइबर सेल अब दोनों खातों से जुड़े यूपीआई आईडी, मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप नंबर और अन्य डिजिटल संपर्कों की जांच कर रही है। पुलिस को संदेह है कि इसके पीछे संगठित साइबर गिरोह काम कर रहा है। जांच के अनुसार, ठगी की रकम किसी एक खाते में आने के बाद उसे तत्काल चार-पांच अन्य खातों में भेज दिया जाता है। इससे रकम की वास्तविक दिशा और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
साइबर क्राइम थाने में दोनों मुकदमे लोधा थाने की हेल्प डेस्क पर तैनात उपनिरीक्षक विनेश कुमार की ओर से दर्ज कराए गए हैं। साइबर क्राइम इंस्पेक्टर रामेंद्र शुक्ला के मुताबिक, दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। खातों को फ्रीज कराने के साथ बैंक से विस्तृत लेनदेन रिकॉर्ड मांगा गया है।
मूल बैंक खाता देना भी अपराध
एसपी देहात एवं साइबर क्राइम के नोडल अधिकारी मनीष कुमार मिश्रा ने कहा कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क मूल बैंक खातों पर काफी हद तक निर्भर रहता है। किसी अन्य व्यक्ति को अपना बैंक खाता उपलब्ध कराना, किराये पर देना या बेच देना भी अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि एनसीआरजी और संबंधित समन्वय पोर्टल से मिलने वाली सूचनाओं पर पुलिस तत्काल कार्रवाई कर रही है।
अलीगढ़ पुलिस पिछले एक वर्ष से साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले मूल बैंक खातों की पहचान के लिए अभियान चला रही है। इसी वर्ष जनवरी में पुलिस ने 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 600 व्हाट्सऐप ग्रुप बंद कराए थे। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को संभावित साइबर ठगी से बचाने का दावा किया गया था और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन वाले खाते चिन्हित किए गए थे।
पुलिस अब एनसीआरजी से मिलने वाली नई सूचनाओं के आधार पर अन्य संदिग्ध खातों की भी जांच कर रही है। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी अनजान व्यक्ति को बैंक खाता, सिम कार्ड, यूपीआई विवरण या ओटीपी उपलब्ध न कराएं। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर सूचना देकर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
