नई दिल्ली: ऑनलाइन प्रॉपर्टी पोर्टल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने किराए का घर तलाशना आसान बना दिया है, लेकिन अब यही तकनीक साइबर अपराधियों के लिए ठगी का नया हथियार बन रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स की मदद से ठग फर्जी मकान की लिस्टिंग, नकली दस्तावेज, वॉयस कॉल और वीडियो संदेश तैयार कर लोगों को भरोसे में ले रहे हैं और उनसे पैसे ऐंठ रहे हैं।
साइबर अपराधियों का तरीका अब केवल फर्जी विज्ञापन पोस्ट करने तक सीमित नहीं रह गया है। वे AI तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसी प्रॉपर्टी तस्वीरें तैयार कर रहे हैं, जो देखने में पूरी तरह वास्तविक लगती हैं। कई मामलों में फोटो को एडिट कर मकान की कमियों को छिपाया जाता है, फर्जी किरायानामा तैयार किया जाता है और मकान मालिक या प्रॉपर्टी एजेंट की पहचान की नकल करने की कोशिश की जाती है।
रेंटल स्कैम का सबसे आम तरीका ऐसी संपत्ति का विज्ञापन देना है, जो या तो वास्तव में मौजूद नहीं होती या फिर किराए के लिए उपलब्ध नहीं होती। साइबर अपराधी आकर्षक लोकेशन, कम किराया और बेहतर सुविधाओं का दावा करते हुए फर्जी लिस्टिंग तैयार करते हैं। इसके बाद वे इच्छुक किराएदारों से बुकिंग शुल्क, टोकन मनी या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर अग्रिम भुगतान की मांग करते हैं।
कई पीड़ितों को भुगतान करने के बाद पता चलता है कि जिस व्यक्ति से वे बातचीत कर रहे थे, वह असली मकान मालिक नहीं था और जिस संपत्ति के लिए पैसे दिए गए, वह केवल ठगी के लिए बनाई गई फर्जी लिस्टिंग थी।
साइबर अपराधी पहचान की चोरी के जरिए भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे वास्तविक प्रॉपर्टी विज्ञापनों की तस्वीरें, विवरण और संपर्क जानकारी कॉपी कर खुद को मकान मालिक या अधिकृत ब्रोकर के रूप में पेश करते हैं। कई बार वे दावा करते हैं कि वे विदेश में रह रहे हैं या किसी कारण से व्यक्तिगत मुलाकात नहीं कर सकते। इसके बाद पूरी किराया प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी करने का दबाव बनाया जाता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने संभावित किराएदारों को चेतावनी दी है कि यदि किसी मकान का किराया आसपास की अन्य संपत्तियों की तुलना में बहुत कम हो, मकान मालिक घर दिखाने से बच रहा हो, देखने से पहले ही भुगतान की मांग की जा रही हो या बातचीत केवल मैसेजिंग एप तक सीमित रखी जा रही हो, तो ऐसे मामलों में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
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साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि AI आधारित रेंटल स्कैम में अपराधी आधुनिक तकनीक को सोशल इंजीनियरिंग के साथ जोड़कर लोगों के भरोसे और भावनाओं का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ठग अब नकली पहचान, फर्जी दस्तावेज और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर पीड़ितों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि वे वास्तविक मकान मालिक या एजेंट से संपर्क में हैं।
प्रो. त्रिवेणी सिंह ने सलाह दी कि ऑनलाइन प्रॉपर्टी लेनदेन में बिना सत्यापन के कोई भी भुगतान नहीं करना चाहिए। किराएदारों को संपत्ति का व्यक्तिगत निरीक्षण करना चाहिए, मकान मालिक की पहचान की पुष्टि करनी चाहिए, स्वामित्व दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए और अनजान व्यक्तियों द्वारा भेजे गए संदिग्ध लिंक, दस्तावेज या डिजिटल अनुरोध स्वीकार करने से बचना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन उपलब्ध प्रॉपर्टी तस्वीरों की रिवर्स इमेज सर्च भी फर्जी लिस्टिंग की पहचान करने का प्रभावी तरीका है। यदि वही तस्वीरें अलग-अलग वेबसाइटों या अन्य स्थानों की संपत्तियों के साथ दिखाई देती हैं तो यह ठगी का संकेत हो सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि किराएदारों को संपत्ति और मकान मालिक की पुष्टि किए बिना बुकिंग राशि या सिक्योरिटी डिपॉजिट ट्रांसफर नहीं करना चाहिए। भुगतान हमेशा ऐसे बैंकिंग माध्यमों से करना चाहिए जिनका रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। नकद भुगतान या संदिग्ध भुगतान विकल्पों से बचना जरूरी है।
किरायानामा साइन करने से पहले सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ना भी आवश्यक है। इसमें किराया राशि, सिक्योरिटी डिपॉजिट, किराए की अवधि, रखरखाव की जिम्मेदारी और नोटिस अवधि जैसी जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। बातचीत, रसीद और भुगतान से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखना भविष्य में किसी विवाद या धोखाधड़ी की स्थिति में मददगार साबित हो सकता है।
AI आधारित रेंटल स्कैम यह दिखाते हैं कि साइबर अपराधी लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर ठगी के तरीके विकसित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन घर तलाशते समय जागरूकता, दस्तावेजों की पुष्टि और बिना सत्यापन अग्रिम भुगतान से बचना ही वित्तीय नुकसान रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
