अहमदाबाद में ट्रैवल कंपनी के नाम पर फर्जी QR code बनाकर ₹33.87 लाख की ठगी के मामले में गिरफ्तार महिला।

क्यूआर कोड से रचा ठगी का जाल: महिला ने ट्रैवल कंपनी और ग्राहकों से ₹33 लाख हड़पे

Team The420
5 Min Read

अहमदाबाद: डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के बीच क्यूआर कोड के जरिए ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस प्रकरण में एक महिला को गिरफ्तार किया गया है, जिसने कथित रूप से एक ट्रैवल कंपनी और उसके ग्राहकों से लगभग ₹33.87 लाख की धोखाधड़ी की। आरोप है कि महिला ने कंपनी के नाम पर फर्जी क्यूआर कोड तैयार कर ग्राहकों से भुगतान अपने निजी बैंक खाते में डलवा लिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई शिकायत दर्ज होने के बाद की गई, जिसमें एक ट्रैवल कंपनी के संचालक ने आर्थिक अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया था।

कंपनी से जुड़कर ही तैयार की गई ठगी की योजना

जांच में सामने आया है कि आरोपी वर्ष 2022 से कमीशन के आधार पर उक्त ट्रैवल कंपनी से जुड़ी हुई थी। प्रारंभ में उसने कंपनी की फ्रेंचाइजी लेने का प्रयास किया, लेकिन इसमें सफलता न मिलने पर उसने स्वयं ही कंपनी के नाम का उपयोग करते हुए यात्रा बुकिंग का कार्य प्रारंभ कर दिया।

FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership

इसी दौरान उसने योजनाबद्ध तरीके से ठगी का जाल बिछाया। कंपनी के नाम और पहचान का सहारा लेकर उसने ग्राहकों का विश्वास हासिल किया, जिससे किसी को भी प्रारंभ में संदेह नहीं हुआ।

फर्जी क्यूआर कोड से सीधे निजी खाते में पहुंची रकम

जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने एक ऐसा क्यूआर कोड तैयार किया, जिस पर ट्रैवल कंपनी का नाम प्रदर्शित होता था, जबकि वह उसके व्यक्तिगत बैंक खाते से जुड़ा हुआ था।

जब ग्राहक यात्रा पैकेज या टिकट बुकिंग के लिए भुगतान करते थे, तो उन्हें लगता था कि वे कंपनी को राशि दे रहे हैं, जबकि वास्तव में वह रकम सीधे आरोपी के खाते में स्थानांतरित हो रही थी।

इस ठगी को अंजाम देने के लिए आरोपी ने गांधीनगर के एक निजी बैंक में ‘उन्नति एंटरप्राइज’ के नाम से खाता खुलवाया था। बताया जा रहा है कि खाता खोलते समय और क्यूआर कोड तैयार करते समय भ्रामक जानकारी का उपयोग किया गया।

रिफंड न मिलने पर उजागर हुआ मामला

पूरा मामला तब सामने आया, जब कुछ ग्राहकों ने टिकट निरस्त होने के बाद धनवापसी के लिए कंपनी से संपर्क किया। जांच में पता चला कि संबंधित भुगतान कंपनी के खाते में पहुंचा ही नहीं था।

इसके बाद आंतरिक जांच शुरू की गई, जिसमें ठगी का पूरा खुलासा हुआ। आरोप है कि आरोपी ने विभिन्न लेनदेन के माध्यम से ₹33.87 लाख से अधिक की राशि एकत्रित की, जिसे न तो कंपनी को सौंपा गया और न ही ग्राहकों को लौटाया गया।

कंपनी ने अपनी साख बचाने के लिए खुद लौटाए पैसे

ग्राहकों का विश्वास बनाए रखने के लिए ट्रैवल कंपनी को स्वयं आगे आकर प्रभावित ग्राहकों को धनवापसी करनी पड़ी। इस प्रक्रिया में कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने डिजिटल भुगतान प्रणाली की कमजोरियों का लाभ उठाते हुए लंबे समय तक बिना संदेह उत्पन्न किए इस ठगी को अंजाम दिया।

गंभीर धाराओं में मामला दर्ज, जांच जारी

आरोपी के विरुद्ध धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से आगे की पूछताछ के लिए रिमांड प्रक्रिया प्रारंभ की गई।

जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस ठगी में अन्य व्यक्तियों की भी संलिप्तता है या नहीं।

क्यूआर कोड ठगी बना उभरता खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, क्यूआर कोड के माध्यम से होने वाली ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। लोग अक्सर बिना सत्यापन किए क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान कर देते हैं, जिसका लाभ अपराधी उठा रहे हैं।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “अपराधी अब डिजिटल भुगतान में लोगों के विश्वास का दुरुपयोग कर क्यूआर कोड के जरिए ठगी कर रहे हैं। भुगतान करने से पहले प्राप्तकर्ता की पूरी जानकारी की पुष्टि करना अत्यंत आवश्यक है।”

सतर्कता ही सबसे प्रभावी बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान करने से पहले प्रदर्शित नाम, यूपीआई पहचान और प्राप्तकर्ता की सत्यता अवश्य जांचनी चाहिए।

यह मामला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि डिजिटल सुविधाओं के साथ जोखिम भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इस प्रकार की ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

हमसे जुड़ें

Share This Article