फर्जी इनवॉइस और गलत रिटर्न दाखिल कर GST सिस्टम के दुरुपयोग का आरोप; लंबे समय तक चले कथित फर्जीवाड़े की जांच तेज

76 वर्षीय अहमदाबाद व्यापारी पर ₹1.2 करोड़ की टैक्स मांग: GST फर्जीवाड़े में भरोसेमंद सलाहकार पर गंभीर आरोप

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By Roopa
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अहमदाबाद। अहमदाबाद के एक 76 वर्षीय व्यापारी पर ₹1.2 करोड़ से अधिक की भारी टैक्स देनदारी का संकट खड़ा हो गया है, जिसके पीछे उनके ही लंबे समय से जुड़े टैक्स सलाहकार पर GST सिस्टम के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद कर विभाग और पुलिस ने जांच तेज कर दी है, जबकि इस घटना ने छोटे और मध्यम व्यापारियों की पेशेवर सलाहकारों पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत के अनुसार, व्यापारी पिछले दो दशकों से सारंगपुर में इंडस्ट्रियल गैस उपकरणों का व्यवसाय चला रहे थे और अब तक किसी बड़े कर विवाद से बचते रहे थे। लेकिन हालात तब बदल गए जब उन्हें अचानक करोड़ों रुपये की GST डिमांड नोटिस मिलने लगी, जिसमें कथित तौर पर उनके ही फर्म के नाम पर गलत रिटर्न दाखिल किए जाने का उल्लेख था।

जांच में यह सामने आया है कि इस पूरे मामले की जड़ 2015 से जुड़ी है, जब आरोपी पहले एक चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म में व्यापारी के खातों का काम देखता था। बाद में उसने अपनी अलग कंसल्टेंसी शुरू कर दी और व्यापारी को यह भरोसा दिलाकर कि वह बेहतर तरीके से कर अनुपालन संभालेगा, पूरे वित्तीय और कर प्रबंधन का जिम्मा अपने पास ले लिया।

GST लागू होने के बाद 2017 से कथित फर्जीवाड़े की शुरुआत होने की बात जांच एजेंसियां कह रही हैं। आरोप है कि सलाहकार ने GST पोर्टल की लॉगिन डिटेल्स इस तरह से नियंत्रित कीं कि पूरा एक्सेस उसी के पास रहा। व्यापारी का मोबाइल नंबर खाते से जुड़ा था, लेकिन ईमेल आईडी पर नियंत्रण कथित रूप से सलाहकार का ही था, जिससे मालिक को सिस्टम की वास्तविक गतिविधियों की जानकारी नहीं मिल पाई।

लंबे समय तक व्यापारी ने बिना किसी जांच या सत्यापन के अपने रिटर्न पर भरोसा किया। यही ‘अंधा विश्वास’ अब जांच का मुख्य बिंदु बन गया है, क्योंकि इसी दौरान बड़े पैमाने पर लेनदेन दर्ज किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

दिसंबर 2025 में मामला तब सामने आया जब व्यापारी को GST शो-कॉज नोटिस मिला, जिसमें 2019-20 और 2021-22 जैसे वित्तीय वर्षों के लिए क्रमशः ₹54.33 लाख और ₹65.59 लाख सहित कुल ₹1.2 करोड़ से अधिक की मांग की गई। नोटिस मिलने के बाद व्यापारी सकते में आ गए।

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जब उन्होंने सलाहकार से सवाल किया तो आरोप है कि उसे ‘तकनीकी गलती’ बताकर मामले को टालने की कोशिश की गई। लेकिन संदेह बढ़ने पर व्यापारी ने खुद GST पोर्टल और विभाग से संपर्क किया, जिसके बाद कथित फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि 2019 से 2023 के बीच फर्म के नाम पर बड़ी संख्या में खरीद-बिक्री दर्ज की गई, जबकि उस दौरान व्यापार काफी हद तक निष्क्रिय बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों को शक है कि फर्जी इनवॉइस तैयार कर अन्य व्यापारियों को भी टैक्स क्रेडिट का लाभ दिलाया गया हो सकता है।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डिजिटल रिकॉर्ड, GST लॉग, बैंक ट्रांजैक्शन और ईमेल डेटा की गहन जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला GST सिस्टम में बाहरी सलाहकारों पर अत्यधिक निर्भरता के खतरों को उजागर करता है। उनका कहना है कि डिजिटल टैक्स सिस्टम में छोटे व्यवसायी अक्सर बिना नियमित निगरानी के पूरा नियंत्रण दूसरों को सौंप देते हैं, जिससे इस तरह की धोखाधड़ी की संभावना बढ़ जाती है।

फिलहाल जांच जारी है और यह भी देखा जा रहा है कि क्या इसी सलाहकार ने अन्य व्यापारियों के साथ भी इसी तरह की गतिविधियां की हैं। व्यापारी अभी भी विवादित टैक्स मांग के बोझ तले हैं और अपने नाम को साफ कराने के लिए कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं।

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