विदेश में नौकरी दिलाने का वादा कर आरोपियों ने वसूले लाखों रुपये; दूतावास से पुष्टि के बाद खुली फर्जीवाड़े की परत, कई और पीड़ितों की आशंका

‘फिनलैंड वर्क परमिट’ का झांसा: अहमदाबाद के युवक से ₹12 लाख की ठगी, नकली दस्तावेज़ों से रचा गया पूरा खेल

Roopa
By Roopa
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अहमदाबाद: विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। ताजा मामला अहमदाबाद से सामने आया है, जहां एक 35 वर्षीय युवक को फिनलैंड में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ₹12 लाख की ठगी कर ली गई। आरोप है कि फर्जी वर्क परमिट और नकली दस्तावेज़ों के जरिए पूरे घटनाक्रम को असली दिखाने की कोशिश की गई।

पीड़ित मिलन बारोट, जो राणिप इलाके के निवासी हैं और साणंद स्थित एक निजी कंपनी में एचआर व प्रशासनिक पद पर कार्यरत हैं, ने शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि वर्ष 2024 में वह विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान उनके एक परिचित के माध्यम से उनकी मुलाकात आरोपी नैमिश शाह से हुई, जिसने खुद को इमिग्रेशन कंसल्टेंट बताया और यूरोप के देशों में नौकरी दिलाने का दावा किया।

शिकायत के अनुसार, नैमिश शाह ने मिलन बारोट को फिनलैंड के एक होटल में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान उसने अपने कार्यालय में कई बार मुलाकात कर भरोसा कायम किया और प्रक्रिया शुरू करने के नाम पर पीड़ित से पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य पहचान दस्तावेज़ जमा करवा लिए। इतना ही नहीं, सुरक्षा के नाम पर एक साइन किया हुआ खाली चेक भी ले लिया गया।

कुछ समय बाद आरोपी ने व्हाट्सएप के जरिए कथित ऑफर लेटर, वीजा से जुड़े दस्तावेज़ और यहां तक कि फिनलैंड का नकली रेजिडेंस परमिट कार्ड भी भेजा। इन दस्तावेज़ों के आधार पर यह विश्वास दिलाया गया कि पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है और अब केवल भुगतान शेष है।

इसके बाद आरोपी ने पीड़ित को अपने सहयोगी रोहित एन शर्मा के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। 11 नवंबर से 19 नवंबर के बीच पीड़ित ने कई किस्तों में अपने और अपनी पत्नी के खातों से कुल ₹12 लाख ट्रांसफर कर दिए।

हालांकि, भुगतान के बाद भी न तो यात्रा की कोई तारीख तय हुई और न ही कोई आधिकारिक पुष्टि मिली। लगातार टालमटोल से संदेह होने पर मिलन बारोट ने फिनलैंड दूतावास से ईमेल के जरिए संपर्क किया। वहां से मिली प्रतिक्रिया ने पूरे मामले की सच्चाई उजागर कर दी—भेजे गए दस्तावेज़ संदिग्ध और संभवतः फर्जी थे।

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इस खुलासे के बाद पीड़ित ने आरोपियों से पैसे वापस करने और दस्तावेज़ लौटाने की मांग की। आरोप है कि फरवरी में उनके मूल दस्तावेज़ तो कूरियर के जरिए वापस कर दिए गए, लेकिन ₹12 लाख की राशि अब तक वापस नहीं की गई।

मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान बैंक लेन-देन, डिजिटल चैट, और दस्तावेज़ों की सत्यता की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह एक संगठित गिरोह हो सकता है, जिसने इसी तरह अन्य लोगों को भी निशाना बनाया हो।

साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं। इस संदर्भ में प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “विदेशी नौकरी या वर्क परमिट के नाम पर ठगी के मामलों में अपराधी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का सहारा लेते हैं। वे भरोसा जीतने के लिए फर्जी दस्तावेज़, वेबसाइट और कम्युनिकेशन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पीड़ित को संदेह नहीं होता।”

उन्होंने आगे कहा कि किसी भी विदेशी नौकरी के प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से सत्यापन करना बेहद जरूरी है। साथ ही, कभी भी बिना जांच के बड़ी रकम ट्रांसफर करना गंभीर जोखिम साबित हो सकता है।

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि विदेश में नौकरी के सपने दिखाकर ठगी करने वाले गिरोह कितने सक्रिय हो चुके हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों ने कितने लोगों को इसी तरह ठगा और क्या इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों या देशों से जुड़े हैं।

फिलहाल, पीड़ित को न्याय दिलाने और आरोपियों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है, लेकिन यह घटना आम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आई है।

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