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आगरा में रजिस्ट्री घोटाला: ₹900 करोड़ के बैनामों में आयकर नियमों का उल्लंघन

Team The420
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आगरा। आयकर विभाग की इंटेलीजेंस एवं क्रिमिनल इंवेस्टीगेशंस शाखा ने सोमवार को एत्मादपुर स्थित रजिस्ट्री दफ्तर में बड़े पैमाने पर सर्वे किया। पांच घंटे की जांच में करीब 900 करोड़ रुपये के बैनामों में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ। इससे पहले विभाग ने किरावली और सदर में भी इसी प्रकार की जांच कर चुका है।

जांच की शुरुआत होते ही उप निबंधक कार्यालय में अफरातफरी मच गई। स्टाफ घबरा गया और रजिस्ट्री कराने आए लोग इधर-उधर होने लगे। विभाग की टीम ने सवालों की झड़ी लगाई, लेकिन कई बैनामों के जवाब नहीं मिले। अधिकारियों ने पाया कि उप निबंधक कार्यालय ने एसएफटी (स्पेशल फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन) रिपोर्टिंग का पालन नहीं किया, जो आयकर नियमों के तहत अनिवार्य है।

नकद भुगतान पर सवाल: जांच में कई ऐसे बैनामे सामने आए, जिनमें नकद भुगतान दिखाया गया। आयकर विभाग ने रजिस्ट्री से रिकार्ड हासिल किए और उप निबंधक को सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इससे बड़े सौदे करने वालों पर शिकंजा कसने का रास्ता खुल गया।

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30 लाख के बैनामों की रिपोर्टिंग नहीं: संपत्ति की खरीद-बिक्री के 30 लाख रुपये या अधिक के बैनामों को विभाग को रिपोर्ट करना अनिवार्य है। साथ ही 20 हजार रुपये से अधिक का नकद लेन-देन नियमों के तहत निषिद्ध है। उप निबंधक कार्यालय ने इन नियमों का पालन नहीं किया। विभाग ने बीते वर्षों के रिकॉर्ड भी तलब किए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि नियमों का उल्लंघन कब और कैसे हुआ।

औपचारिकताओं की अनदेखी: बैनामों के समय टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) और पैन नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है। लेकिन बीते वर्षों के बैनामों में इन औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया गया। विभाग ने लापरवाही के लिए संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई का संकेत दिया।

फार्म 60 और एसएफटी रिपोर्टिंग: दस लाख रुपये या अधिक के बैनामे में यदि सौदा करने वाले के पास पैन नहीं है, तो फार्म 60 भरना जरूरी है। इसके साथ एसएफटी फार्म संख्या 61 और 61ए के माध्यम से वित्तीय लेन-देन का विवरण आयकर विभाग को देना होता है। उप निबंधक कार्यालय ने इन आवश्यकताओं का पालन नहीं किया, जिससे नियमों का उल्लंघन हुआ।

उप निबंधक की शिकायतें: एमएलसी आकाश अग्रवाल और बार एसोसिएशन, एत्मादपुर ने शासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि बैनामों में मोटी रकम लेकर वित्तीय गड़बड़ी की गई। बार एसोसिएशन ने साक्ष्य भी पेश किए, जिसमें न्यूनतम स्टांप शुल्क पर बड़े लेन-देन को छिपाने की कोशिश की गई।

टीडीएस और पूंजीगत लाभ का उल्लंघन: बैनामे की राशि 50 लाख रुपये या अधिक होने पर खरीदार को बिकवाल से 1% टीडीएस काटना अनिवार्य है। लेकिन कई बिल्डरों ने नगरीय क्षेत्र की कृषि भूमि के करोड़ों रुपये के सौदे बिना टीडीएस और पैन नंबर दर्ज किए। इस तरह के सौदों में पूंजीगत लाभ को नजरअंदाज किया गया और आयकर से दूरी बनाए रखी गई। अब विभाग इन सौदों की गहन जांच कर रहा है।

नियमानुसार नगरीय सीमा से आठ किलोमीटर के दायरे में कृषि भूमि को कैपीटल असेट माना जाता है। इसके लिए आयकर की धारा 2(14) लागू होती है और टीडीएस व पूंजीगत लाभ की देयता बनती है। आयकर विभाग ने संबंधित बैनामों की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है और नियमों के उल्लंघन के लिए कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

संक्षेप में, एत्मादपुर रजिस्ट्री दफ्तर में पांच घंटे की जांच ने 900 करोड़ रुपये के बैनामों में वित्तीय अनियमितताओं का भंडाफोड़ किया। नकद भुगतान, रिपोर्टिंग की अनदेखी और औपचारिकताओं के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं, जिनकी जांच जारी है। विभाग ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं और जल्द ही कड़ी कार्रवाई करने की संभावना जताई है।

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