क्रिप्टो करेंसी में निवेश का लालच एक बार फिर बड़ा साइबर फ्रॉड साबित हुआ है। आगरा में खाद्य एवं रसद विभाग में तैनात एक विपणन निरीक्षक से डिजिटल ठगों ने सुनियोजित साजिश के तहत करीब ₹2.06 करोड़ की ठगी कर ली। यह पूरा मामला साइबर थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू कर दी गई है।
पीड़ित अगम तेज प्रकाश, निवासी मुन्ना पैलेस कॉलोनी, देवरी रोड, ने बताया कि 9 अगस्त 2025 को उनके फेसबुक मैसेंजर पर ‘निधि शर्मा’ नाम की एक महिला प्रोफाइल से संदेश आया था। शुरुआत में बातचीत सामान्य रही, लेकिन धीरे-धीरे यह संवाद भरोसे और दोस्ती में बदल गया। इसी भरोसे को अपराधियों ने अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया।
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कुछ दिनों बाद बातचीत को फेसबुक से हटाकर व्हाट्सएप पर शिफ्ट किया गया, जहां ठगों ने क्रिप्टो ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर भारी मुनाफे का लालच देना शुरू किया। आरोपियों ने दावा किया कि कम समय में कई गुना रिटर्न संभव है। भरोसा मजबूत करने के लिए उन्हें फर्जी डिजिटल वाउचर, चार्ट और निवेश ग्राफ दिखाए गए, जिससे पूरा सिस्टम वास्तविक प्रतीत होने लगा।
इसके बाद पीड़ित को ‘ट्रस्ट कॉइन ट्रेडिंग’ नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल किया गया, जहां पहले से मौजूद कई फर्जी निवेशक और एडमिन सक्रिय थे। शुरुआती चरण में छोटी रकम निवेश करवाकर पीड़ित को “डिजिटल प्रॉफिट” भी दिखाया गया, जिससे उनका विश्वास पूरी तरह मजबूत हो गया। इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करना शुरू कर दिया।
जैसे-जैसे निवेश बढ़ता गया, ठगों ने एक फर्जी क्रिप्टो वेबसाइट के जरिए पूरा सिस्टम नियंत्रित करना शुरू कर दिया। यह वेबसाइट असली एक्सचेंज जैसी दिखती थी, लेकिन पूरी तरह से नकली और नियंत्रित प्लेटफॉर्म था। जब पीड़ित ने अपनी राशि निकालने की कोशिश की, तो टैक्स और तकनीकी नियमों का बहाना बनाकर विड्रॉल रोक दिया गया।
इसके बाद ठगी में नए किरदार शामिल हुए। ‘निधि शर्मा’ के पिता बनकर एक व्यक्ति ने संपर्क किया और खुद को निर्दोष बताते हुए पैसे वापस दिलाने का आश्वासन दिया। कुछ समय बाद ‘आलोक’ नाम का एक और व्यक्ति सामने आया, जिसने खुद को क्रिप्टो विशेषज्ञ बताकर दावा किया कि वह फंसी हुई रकम निकलवा सकता है, लेकिन इसके लिए कमीशन और टैक्स देना जरूरी है।
इसी दौरान आरोपियों ने खुद को SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) से रजिस्टर्ड बताकर पूरे फ्रॉड को वैध दिखाने की कोशिश की, जिससे पीड़ित का भरोसा और गहरा हो गया। इसी झांसे में आकर पीड़ित ने पिछले 8 महीनों में विभिन्न बैंक खातों, UPI आईडी और क्रिप्टो वॉलेट एड्रेस पर कुल ₹2.06 करोड़ ट्रांसफर कर दिए।
जब पैसे निकालने की सारी कोशिशें विफल रहीं और आरोपियों ने अचानक संपर्क तोड़ दिया, तब जाकर पीड़ित को एहसास हुआ कि वह एक सुनियोजित साइबर जाल में फंस चुका है। जांच करने पर पता चला कि वेबसाइट पर दिखाया जा रहा “लाभ” पूरी तरह फर्जी था और उसका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं था।
इस मामले में आरोपी ‘निधि शर्मा’ और ‘आलोक’ नाम के व्यक्तियों की पहचान सामने आई है, जिनके नाम पर पूरे फ्रॉड का संचालन किया जा रहा था। पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, UPI ट्रांजैक्शन और वेबसाइट के IP एड्रेस की तकनीकी जांच कर रही है।
फिलहाल यह भी आशंका जताई जा रही है कि यह एक संगठित साइबर ठगी गिरोह है, जिसके तार अन्य राज्यों और संभवतः अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
