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आगरा में किराए के फ्लैट से चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर, चार आरोपी हिरासत में

Roopa
By Roopa
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आगरा: ताजगंज थाना क्षेत्र के आरके पुरम में किराए के एक फ्लैट से संचालित कथित फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने खुलासा किया है। शनिवार को पुलिस ने फ्लैट पर छापा मारकर दो युवकों और दो युवतियों को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नौकरी के आकर्षक लेकिन फर्जी विज्ञापन प्रसारित कर लोगों को अपने संपर्क में लाते थे। इसके बाद कॉल और मैसेज के जरिए बातचीत कर उन्हें अलग-अलग बहानों से भरोसे में लिया जाता और कथित तौर पर रकम ठगी जाती थी। मौके से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप और अन्य सामग्री बरामद की गई है।

पुलिस को पिछले कुछ समय से आरके पुरम स्थित फ्लैट में संदिग्ध गतिविधियों और फर्जी कॉल सेंटर संचालित होने की सूचना मिल रही थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने गतिविधियों की जानकारी जुटाई और शनिवार को बताए गए फ्लैट पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद चार लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस अब बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है।

चारों आरोपियों की अलग-अलग जगहों से पहचान

पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए आरोपियों में दो युवक और दो युवतियां शामिल हैं। दोनों युवकों में एक जौनपुर जिले के सराय ख्वाजा थाना क्षेत्र के ग्राम घनघनवा का निवासी बताया गया है, जबकि दूसरा बिहार के छपरा जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के ग्राम कड़ींगा का रहने वाला है।

इसके अलावा हिरासत में ली गई दोनों युवतियों में एक आगरा के ताजगंज थाना क्षेत्र स्थित गोबर चौकी की रहने वाली है और दूसरी मथुरा जिले के कोसीकलां क्षेत्र की निवासी बताई गई है। पुलिस अब चारों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर जांच रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कॉल सेंटर में कौन किस तरह का काम करता था और ग्राहकों से संपर्क करने तथा रकम हासिल करने की जिम्मेदारी किसकी थी।

नौकरी के नाम पर सोशल मीडिया से बनाते थे संपर्क

प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला है कि आरोपी सोशल मीडिया पर नौकरी से जुड़े आकर्षक विज्ञापन पोस्ट करते थे। इन विज्ञापनों में नौकरी पाने के इच्छुक लोगों को बेहतर रोजगार और अन्य सुविधाओं का भरोसा दिया जाता था। विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले लोगों से मोबाइल फोन या मैसेजिंग एप के जरिए बातचीत शुरू की जाती थी।

आरोप है कि बातचीत के दौरान पीड़ितों को विश्वास में लेकर उनसे अलग-अलग कारणों के नाम पर रकम मांगी जाती थी। कभी नौकरी की प्रक्रिया, तो कभी अन्य औपचारिकताओं का हवाला देकर पैसे लिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने किन-किन नामों और पहचान का इस्तेमाल किया और कितने लोगों से संपर्क किया गया।

मोबाइल, सिम और लैपटॉप से खुलेगा नेटवर्क

छापेमारी के दौरान पुलिस ने कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप और अन्य सामग्री बरामद की है। जांच टीम अब इन उपकरणों में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट, मैसेज और अन्य डिजिटल जानकारी की पड़ताल कर रही है।

पुलिस को उम्मीद है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से आरोपियों के संभावित पीड़ितों, सहयोगियों और रकम के लेनदेन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी विज्ञापन किन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाले जाते थे और उनका संचालन किस व्यक्ति या समूह की ओर से किया जाता था।

फ्लैट मालिक से भी होगी पूछताछ

पुलिस अब उस फ्लैट के मालिक से भी पूछताछ कर रही है, जहां कथित कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि फ्लैट मालिक को वहां चल रही गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं। पुलिस किराये से संबंधित दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है।

डीसीपी सैयद अली अब्बास ने बताया कि एक फ्लैट से दो युवकों और दो युवतियों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि बरामद सामान की जांच और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित कॉल सेंटर का संचालन कब से हो रहा था, इसमें कितने लोग जुड़े थे और अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया गया। साथ ही ठगी से हासिल रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और आरोपियों के संपर्कों की जांच के बाद पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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