आगरा। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए टैक्स चोरी के बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि एक ही मोबाइल नंबर के आधार पर कई फर्मों का पंजीकरण कर करोड़ों रुपये के फर्जी लेनदेन दिखाए गए और ITC का गलत दावा किया गया।
प्रारंभिक जांच में स्वास्तिक इंटरप्राइजेज नाम की फर्म पर फोकस किया गया, जिसके रिकॉर्ड और पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी का स्थानीय इनपुट के साथ मिलान किया गया। जब फर्म द्वारा दाखिल रिटर्न की गहन जांच की गई, तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
जांच में पाया गया कि फर्म ने दिल्ली, लखनऊ, गोरखपुर और आगरा की विभिन्न कंपनियों के साथ ₹9.19 करोड़ के लेनदेन का दावा किया था। इनमें रेशमी रंग (दिल्ली), गणेश इंटरप्राइजेज (लखनऊ), अंबे ट्रेडर्स (गोरखपुर), वीके ट्रेडर्स और यश इंटरप्राइजेज (आगरा) शामिल थीं।
हालांकि, जब इन लेनदेन की वास्तविकता की जांच की गई, तो यह पूरी तरह कागजी निकले। किसी भी प्रकार की वास्तविक खरीद-बिक्री या माल की आवाजाही का प्रमाण नहीं मिला। इसके बावजूद फर्म ने ₹1.71 करोड़ का ITC क्लेम कर लिया था।
जांच एजेंसियों ने इस फर्जीवाड़े के आधार पर फर्म के लेजर में दर्शाए गए ₹1.23 करोड़ के ITC को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक कर दिया है। साथ ही, संबंधित फर्म को अस्तित्वहीन पाया गया है और इसके पंजीकरण को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब जांच में पता चला कि स्वास्तिक इंटरप्राइजेज द्वारा दिए गए एक ही मोबाइल नंबर पर उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कुल 10 फर्मों का पंजीकरण कराया गया था। इनमें से पांच फर्मों का पंजीकरण पहले ही फर्जी दस्तावेजों के चलते रद्द किया जा चुका है, जबकि बाकी की जांच जारी है।
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जांच में यह भी सामने आया कि एक फर्म से पाइप की खरीद दिखाई गई, जबकि उस फर्म ने अपने रिकॉर्ड में पेपर की बिक्री दर्शाई थी। इस तरह के विरोधाभासों ने पूरे नेटवर्क की पोल खोल दी। वाहनों की मूवमेंट की जांच में भी कोई वास्तविक परिवहन गतिविधि नहीं मिली, जिससे यह साफ हो गया कि पूरा कारोबार केवल कागजों पर चल रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क ITC पास ऑन करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। इसके तहत अलग-अलग राज्यों और जिलों में अपनी ही फर्मों का पंजीकरण कर फर्जी लेनदेन दिखाए जाते थे, जिससे टैक्स चोरी की जा सके।
मामले में अजीत सिंह के खिलाफ थाना लोहामंडी में एफआईआर दर्ज कराई गई है। जांच आगे बढ़ाते हुए विभाग अब खरीद-बिक्री के आगे और पीछे के पूरे लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटा है, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
कर विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फर्जी ITC दावे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाते हैं और टैक्स प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और तकनीकी निगरानी बेहद जरूरी है।
फिलहाल, आगरा में उजागर हुआ यह मामला फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी के संगठित नेटवर्क की एक बड़ी कड़ी के रूप में सामने आया है, जिस पर विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है।
