फिक्स्ड-लाइन नेटवर्क अधिग्रहण की मंजूरी के दौरान दी गई जानकारी पर यूरोपीय आयोग ने उठाए सवाल; आरोप साबित होने पर कंपनी पर वैश्विक सालाना कारोबार का 1% तक जुर्माना संभव, KKR ने आरोपों को खारिज करते हुए कानूनी चुनौती देने की बात कही

यूरोपीय संघ के नियामकों को गुमराह करने के आरोप में KKR पर कार्रवाई, Telecom Italia के €22 अरब के सौदे की दोबारा जांच

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By Roopa
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नई दिल्ली। अमेरिकी निवेश कंपनी KKR यूरोप में अपने बड़े दूरसंचार सौदे को लेकर नियामकीय कार्रवाई का सामना कर रही है। यूरोपीय आयोग ने सोमवार को कंपनी पर आरोप लगाया कि उसने Telecom Italia के फिक्स्ड-लाइन नेटवर्क के 22 अरब यूरो के अधिग्रहण की समीक्षा के दौरान नियामकों को गलत या भ्रामक जानकारी दी थी। यह सौदा वर्ष 2024 में मंजूर हुआ था। अब आयोग की जांच में सामने आए आरोपों के कारण कंपनी पर भारी जुर्माना लगने की आशंका पैदा हो गई है। हालांकि, अभी तक आयोग ने उल्लंघन का अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और अधिग्रहण को मिली मंजूरी भी बरकरार है।

यूरोपीय संघ की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था यूरोपीय आयोग ने लगभग एक साल तक चली जांच के बाद KKR को आरोपों से संबंधित औपचारिक दस्तावेज भेजा है। इसे स्टेटमेंट ऑफ ऑब्जेक्शंस कहा जाता है। इसमें आयोग ने बताया है कि कंपनी ने तीसरे पक्ष की दूरसंचार कंपनियों के साथ पहले से मौजूद दीर्घकालिक नेटवर्क एक्सेस समझौतों की शर्तों को लेकर गलत या भ्रामक जानकारी दी थी। इन समझौतों के तहत अन्य दूरसंचार कंपनियों को Telecom Italia के नेटवर्क का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है।

नेटवर्क इस्तेमाल की शर्तों पर विवाद

विवाद की जड़ Telecom Italia के फिक्स्ड-ब्रॉडबैंड नेटवर्क तक दूसरी दूरसंचार कंपनियों की पहुंच और उसकी कीमतों से जुड़ी है। KKR ने अधिग्रहण की मंजूरी के लिए नियामकों के समक्ष यह भरोसा दिया था कि वह थोक नेटवर्क सेवाओं का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के लिए मौजूदा शर्तों को अपने स्तर पर खराब नहीं करेगी। पहले से लागू दीर्घकालिक समझौतों में बदलाव भी संबंधित पक्षों की आपसी सहमति के आधार पर ही किया जाना था।

हालांकि, प्रतिद्वंद्वी दूरसंचार कंपनियों ने शिकायत की कि सौदे के बाद Telecom Italia के फिक्स्ड-ब्रॉडबैंड नेटवर्क तक पहुंचने के लिए उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। इन कंपनियों का आरोप था कि नेटवर्क एक्सेस की कीमतें एकतरफा बढ़ाई गईं, जबकि अधिग्रहण की समीक्षा के दौरान KKR ने नियामकों को इसके विपरीत भरोसा दिलाया था।

इन शिकायतों के बाद यूरोपीय आयोग ने मामले की जांच शुरू की। अब आयोग का प्रारंभिक आरोप है कि KKR ने मौजूदा दीर्घकालिक समझौतों को समान शर्तों पर जारी रखने के संबंध में ऐसी जानकारी दी, जो गलत या भ्रामक हो सकती है। जांच का मुख्य प्रश्न यह है कि क्या अधिग्रहण को मंजूरी दिलाने के लिए दी गई जानकारी वास्तविक व्यावसायिक परिस्थितियों और बाद में लागू की गई शर्तों के अनुरूप थी।

KKR ने आरोपों से असहमति जताई

KKR ने यूरोपीय आयोग के आकलन से कड़ा असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि Telecom Italia के नेटवर्क कारोबार के अधिग्रहण की वर्ष 2024 में हुई समीक्षा के दौरान उसने जो जानकारी दी थी, उसकी सटीकता पर वह कायम है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह आयोग के प्रारंभिक आरोपों का औपचारिक जवाब देगी और उनका जोरदार तरीके से विरोध करेगी।

KKR के अनुसार, आयोग की ओर से आरोपों से संबंधित दस्तावेज जारी किया जाना अपने आप में उल्लंघन का अंतिम फैसला नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि वह यूरोपीय आयोग के साथ रचनात्मक बातचीत जारी रखेगी। फिलहाल सौदे को दी गई नियामकीय मंजूरी प्रभावी बनी हुई है।

इस मामले में KKR को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। आने वाले महीनों में कंपनी आयोग के समक्ष बंद कमरे में होने वाली सुनवाई में अपना बचाव कर सकती है। इसके बाद नियामक उपलब्ध तथ्यों, दस्तावेजों और कंपनी के जवाब का आकलन करके अंतिम निर्णय लेगा। इसलिए फिलहाल यह तय नहीं है कि कंपनी पर जुर्माना लगाया जाएगा या नहीं।

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FiberCop समझौते भी जांच के केंद्र में

यूरोपीय आयोग ने Telecom Italia के नेटवर्क सौदे को मंजूरी देते समय कुछ दीर्घकालिक समझौतों को महत्वपूर्ण माना था। इनमें FiberCop और दूरसंचार कंपनियों Fastweb तथा Iliad के बीच हुए समझौते शामिल थे। FiberCop, Telecom Italia की अंतिम छोर तक नेटवर्क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने वाली इकाई है। इसका नेटवर्क दूसरी कंपनियों को ग्राहकों तक फिक्स्ड-ब्रॉडबैंड सेवाएं पहुंचाने में मदद करता है।

इन समझौतों का उद्देश्य नेटवर्क तक पहुंच की शर्तों को स्थिर बनाए रखना और संबंधित कंपनियों को व्यावसायिक अनिश्चितता से बचाना था। आयोग अब यह जांच रहा है कि अधिग्रहण की मंजूरी के दौरान इन समझौतों को लेकर दी गई जानकारी सही थी या नहीं और क्या नियामकों के सामने प्रस्तुत स्थिति वास्तविक परिस्थितियों से मेल खाती थी।

वैश्विक कारोबार के आधार पर जुर्माने का प्रावधान

यूरोपीय संघ के प्रतिस्पर्धा नियमों के तहत यदि कोई कंपनी किसी विलय या अधिग्रहण की समीक्षा के दौरान नियामकों को गुमराह करने की दोषी पाई जाती है, तो उस पर उसके कुल वैश्विक सालाना कारोबार का 1% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। KKR के आकार और अंतरराष्ट्रीय निवेश गतिविधियों को देखते हुए यह प्रावधान संभावित रूप से बड़ी वित्तीय देनदारी पैदा कर सकता है।

यूरोपीय आयोग पहले भी अधिग्रहण संबंधी जांच में गलत या भ्रामक जानकारी देने के मामलों में कंपनियों पर भारी जुर्माना लगा चुका है। ऐसे मामलों में नियामक केवल सौदे की प्रतिस्पर्धा पर पड़ने वाले प्रभाव को ही नहीं, बल्कि समीक्षा प्रक्रिया के दौरान दी गई जानकारी की विश्वसनीयता को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।

KKR के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण चरण आयोग के सामने अपना पक्ष रखना होगा। अंतिम निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि जांच में जुटाए गए साक्ष्य, कंपनी का जवाब और संबंधित नेटवर्क समझौतों की वास्तविक शर्तें आरोपों की पुष्टि करती हैं या नहीं।

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