व्हाट्सऐप के जरिए शेयरों में हेरफेर का आरोप, ईडी ने ₹200 करोड़ के ट्रेडिंग खाते फ्रीज किए

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By Roopa
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नई दिल्ली। शेयर बाजार में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए कथित हेरफेर के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब 200 करोड़ मूल्य के ट्रेडिंग खाते फ्रीज कर दिए हैं। जांच एजेंसी ने 29 ठिकानों पर तलाशी के दौरान दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं। मामला दो सूचीबद्ध कंपनियों आरएम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड और आरएंडबी डेनिम्स लिमिटेड के शेयरों में कथित पंप-एंड-डंप गतिविधियों से जुड़ा है।

आरोप है कि व्हाट्सऐप समूहों और सोशल मीडिया के जरिए चुनिंदा शेयरों को खरीदने के लिए निवेशकों को प्रेरित किया गया, जिससे शेयरों के कारोबार और कीमतों में तेजी आई। इसके बाद कुछ निवेशकों और शेयर आवंटियों ने बढ़ी हुई मांग का फायदा उठाकर अपने शेयर बेच दिए। ईडी मामले में वित्तीय लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।

ईडी के मुंबई जोनल कार्यालय-1 ने 16 अक्टूबर को मुंबई, नासिक, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर में तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दायरे में दोनों कंपनियों के कार्यालय, उनके प्रवर्तकों और तरजीही आधार पर शेयर या वारंट हासिल करने वाले आवंटियों के आवास, स्टॉक ब्रोकिंग और वित्तीय कंपनियों के ठिकाने शामिल थे। कथित तौर पर प्रचार के लिए व्हाट्सऐप समूह चलाने वाले लोगों से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली गई।

एक साल में 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और वारंट आवंटित

जांच एजेंसी के अनुसार, अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच दोनों कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को तरजीही आवंटन के माध्यम से 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और परिवर्तनीय वारंट जारी किए। ईडी को संदेह है कि इस आवंटन में इस्तेमाल की गई रकम का बड़ा हिस्सा आपस में जुड़े व्यक्तियों, कंपनियों और ऋणदाताओं के एक सीमित समूह से आया था।

जांच में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद कई महीनों तक दोनों कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाई गईं, जबकि शेयरों का बड़ा हिस्सा संबंधित समूह के भीतर ही बना रहा। एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि शेयरों के आवंटन, वित्तपोषण और बाद में हुई खरीद-बिक्री के बीच क्या संबंध था।

व्हाट्सऐप पर खरीदारी के संदेश, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

ईडी के मुताबिक, दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह से फरवरी 2026 के बीच ‘मल्टीबैगर स्टॉक्स’ जैसे नामों वाले व्हाट्सऐप समूहों में दोनों कंपनियों के शेयर खरीदने की सिफारिशें नियमित रूप से प्रसारित की गईं। इन संदेशों के जरिए खुदरा निवेशकों को संबंधित शेयरों में निवेश के लिए आकर्षित करने का कथित प्रयास किया गया।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इन समूहों के संचालन में ऐसे सिम कार्डों का इस्तेमाल किया गया, जो हरियाणा और मुंबई में दूसरे लोगों के नाम पर पंजीकृत थे। हालांकि, समूहों का संचालन गुजरात के भावनगर से किए जाने की बात सामने आई है। कथित प्रचार अभियान में एक्स, एसएमएस और अन्य माध्यमों का भी इस्तेमाल किया गया।

ईडी के अनुसार, लगातार खरीदारी की सिफारिशों के बाद शेयरों में खरीदारों की संख्या, कारोबार की मात्रा और कीमतों में तेज वृद्धि हुई। इसके बाद तरजीही आवंटन के जरिए पहले कम कीमत पर शेयर या वारंट हासिल करने वाले कुछ लोगों ने बढ़ी हुई मांग का फायदा उठाकर अपने शेयर बड़ी संख्या में निवेशकों को बेच दिए। एजेंसी को संदेह है कि इस प्रक्रिया में खुदरा निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा हो सकता है।

लाभार्थियों के समूहों की भूमिका की जांच

जांच में एफ्लुएंस जेम्स और उससे जुड़े पक्षों, कावा एचयूएफ तथा उससे संबंधित पक्षों और कोमालय कंसल्टेंसी सहित कुछ लाभार्थी समूहों की पहचान किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि इन समूहों से जुड़े लाभार्थियों ने तरजीही वारंट के जरिए अपेक्षाकृत कम कीमत पर शेयर हासिल किए थे। इसके बाद कथित प्रचार अभियान के दौरान खरीदारी बढ़ने से उन्हें अपनी हिस्सेदारी बेचने का अवसर मिला।

ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि इन आवंटनों के पीछे वास्तविक लाभार्थी कौन थे, शेयर खरीदने के लिए धन कहां से आया और प्रचार अभियान में शामिल लोगों के साथ उनका कोई वित्तीय या व्यावसायिक संबंध था या नहीं। मामले में जब्त दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

निवेशकों को सोशल मीडिया टिप्स से सतर्क रहने की सलाह

इस मामले के बीच जिरोधा के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितिन कामथ ने 20 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर शेयर बाजार से जुड़ी अपुष्ट सिफारिशों को लेकर निवेशकों को आगाह किया। उन्होंने व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, एसएमएस और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर मिलने वाले शेयर टिप्स के आधार पर निवेश करने के जोखिमों की ओर ध्यान दिलाया।

कामथ ने कहा कि व्हाट्सऐप समूहों के जरिए शेयरों की कीमतों में कृत्रिम तेजी लाने की कोशिशों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स द्वारा शेयरों तथा आईपीओ के प्रचार के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने निवेशकों को बिना जांच-पड़ताल के ऐसे संदेशों पर भरोसा करने से बचने की सलाह दी।

पंप-एंड-डंप योजना में आम तौर पर किसी शेयर की कीमत बढ़ाने के लिए उसके बारे में भ्रामक या अत्यधिक सकारात्मक प्रचार किया जाता है। कीमत बढ़ने पर पहले से शेयर रखने वाले लोग अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं, जिसके बाद कीमत गिरने पर देर से निवेश करने वालों को नुकसान हो सकता है।

ईडी की जांच अभी जारी है। एजेंसी यह निर्धारित करने में जुटी है कि कथित शेयर हेरफेर में किन लोगों की क्या भूमिका थी और निवेशकों को हुए संभावित नुकसान का दायरा कितना है।

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