आजमगढ़। मदरसा जामिया नूरुल उलूम मुबारकपुर की मान्यता से जुड़े भूमि और भवन के अभिलेख कथित तौर पर कूटरचित पाए जाने के मामले में सोमवार को 22 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। नामजद लोगों में झारखंड के जामताड़ा के जिला जज रिजवान अहमद का नाम भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय के पटल सहायक आमिर हुसैन की तहरीर पर मुबारकपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में मदरसे की प्रबंध समिति से जुड़े लोगों के अलावा प्रबंधक जहीन अहमद के परिवार के सदस्य भी नामजद हैं।
प्राथमिकी के अनुसार, मदरसे की मान्यता से संबंधित दस्तावेजों को लेकर पहले शिकायत और जांच की प्रक्रिया शुरू हुई थी। मदरसा शिक्षा परिषद की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने मदरसा प्रबंधन से स्पष्टीकरण के साथ मूल दानपत्र प्रस्तुत करने को कहा था। प्रबंधन की ओर से दिए गए जवाब और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के दौरान वर्ष 1998 में आलिया स्तर की स्थायी मान्यता कथित तौर पर कूटरचित दानपत्र के आधार पर हासिल किए जाने का मामला सामने आया।
जांच में दानपत्र की तारीख 20 जून 1997 बताई गई। इसमें मदरसे के लिए दी गई भूमि को मोहम्मदाबाद गोहना तहसील में स्थित बताया गया था। मोहम्मदाबाद गोहना वर्तमान में मऊ जिले का हिस्सा है। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि मऊ जिले का गठन 1988 में हो चुका था। इसके बावजूद संबंधित दस्तावेज में जमीन को आजमगढ़ में दर्शाया गया था। इसी आधार पर अभिलेखों की सत्यता पर सवाल उठे।
मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के लिए अवसर दिए जाने की बात भी प्राथमिकी में कही गई है। आरोप है कि प्रबंधन की ओर से इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका। जांच के दौरान मदरसे में एक साथ दो प्रबंध समितियों के होने का मामला भी सामने आया। इसके बाद मदरसे की मान्यता निलंबित कर दी गई। परिषद की रजिस्ट्रार ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, नामजद लोगों में मदरसा प्रबंधक जहीन अहमद के पिता अल्ताफ अहमद, पत्नी शगुफ्ता बानो, बेटे फहीम अहमद और साहिल के अलावा ससुर अफी अहमद भी शामिल हैं। प्राथमिकी में दर्ज परिवार के दो सदस्यों अल्ताफ अहमद और अफी अहमद का निधन हो चुका है। पुलिस अब मुकदमे में नामजद सभी लोगों की भूमिका और दस्तावेजों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
मामले में 1998 की प्रबंधकीय सूची और वर्ष 2024-25 की प्रबंध समिति के बीच भी अंतर सामने आया है। 1998 की सूची में सदर अलहाज अफी अहमद, नायब सदर मोहम्मद तारिक, प्रबंधक-सचिव जहीन अहमद, नायब सचिव शहनवाज आलम, खजांची मोहम्मद हामिद, ऑडिटर रिजवान अहमद समेत अन्य सदस्यों के नाम दर्ज थे। इसी सूची में अल्ताफ हुसैन, मेराज अहमद, एहसानुल हक, कबर्रानुल हक, फहीम अहमद और रजीउद्दीन सदस्य बताए गए थे।
वहीं, 2024-25 की प्रबंध समिति में सदर अहमदुल्लाह, नायब सदर मोहम्मद साकिब, प्रबंधक-सचिव जहीन अहमद, उपसचिव शहनवाज आलम, खजांची मोहम्मद हामिद और ऑडिटर रिजवान अहमद के अलावा शगुफ्ता बानो, नेहाल अहमद, मोहम्मद आदिब, सैयद राहिल हुसैन और फहीम अहमद के नाम शामिल हैं। दोनों समितियों में छह नाम समान होने की बात सामने आई है।
जामताड़ा के जिला जज रिजवान अहमद ने कहा कि इस मामले में शिकायत पहले ही पुलिस अधीक्षक, थानाध्यक्ष और मदरसा शिक्षा परिषद की रजिस्ट्रार को भेजी जा चुकी थी। उनका कहना है कि उस समय शिकायत की जांच या कार्रवाई नहीं हुई। अब प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले ने औपचारिक जांच का रूप ले लिया है।
सदर क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी ईश्वर लाल ने बताया कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से मिली तहरीर के आधार पर जामताड़ा के जिला जज समेत 22 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की विवेचना कर रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
