नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुजरात में संचालित कथित अवैध कॉल सेंटरों के जरिए अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर-वित्तीय धोखाधड़ी मामले में एक प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों के दौरान चलाए गए इस कथित नेटवर्क ने अमेरिकी नागरिकों से 72.1 लाख डॉलर से अधिक की ठगी की। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब ₹600 करोड़ से अधिक बैठती है।
सीबीआई के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान अंकित सतीशचंद्र पांडेय के रूप में हुई है। उसे 23 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी का आरोप है कि पांडेय इस अवैध कॉल सेंटर की स्थापना और उसके संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। मामले की जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी और उसके सहयोगी वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करते थे। बातचीत के दौरान वे खुद को अमेरिकी संघीय एजेंसियों के अधिकारी के रूप में पेश करते थे। इनमें फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी), अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी (सीआईएसए) जैसी एजेंसियों के अधिकारियों की पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।
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पीड़ितों को कथित तौर पर बताया जाता था कि उनकी पहचान का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति ने उनके कंप्यूटर सिस्टम के जरिये बाल अश्लील सामग्री तक पहुंच बनाने के लिए किया है। इस तरह की गंभीर बात बताकर उन्हें कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता था। जांच के अनुसार, इस दबाव का इस्तेमाल पीड़ितों को आरोपियों के निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर करने में किया गया।
सीबीआई का आरोप है कि बातचीत आगे बढ़ने के बाद पीड़ितों को अपने बैंक खातों से रकम निकालने के लिए कहा जाता था। इसके बाद उन्हें उस रकम से सोना खरीदने के लिए प्रेरित या मजबूर किया जाता था। खरीदा गया सोना कथित तौर पर आरोपियों की ओर से अमेरिका में लगाए गए कूरियर व्यक्तियों को सौंपने के लिए कहा जाता था।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस तरीके से अलग-अलग अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर कुल 72.1 लाख डॉलर से अधिक की कथित ठगी की गई। मामले में ठगी की पूरी रकम, पीड़ितों की संख्या और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
सीबीआई ने आरोपी से जुड़े अहमदाबाद के विभिन्न ठिकानों पर तलाशी भी ली। अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए, जिनमें कथित तौर पर डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। इन उपकरणों और उनसे प्राप्त डेटा की जांच के जरिए कॉल सेंटर के संचालन, पीड़ितों से संपर्क, वित्तीय लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
मामले की जांच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित साइबर-वित्तीय धोखाधड़ी के उस तरीके पर भी केंद्रित है, जिसमें अपराधी खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर विदेशी नागरिकों को डराते हैं। इसके बाद उन्हें बैंक खाते खाली करने, नकदी निकालने या कीमती सामान खरीदकर कथित तौर पर आरोपियों के प्रतिनिधियों को सौंपने के लिए तैयार किया जाता है।
सीबीआई अब जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गुजरात में चल रहे कथित अवैध कॉल सेंटर से कितने लोग जुड़े थे और अमेरिका में पीड़ितों से सामान या रकम हासिल करने वाले नेटवर्क तक इसका संपर्क किस तरह था।
अंकित सतीशचंद्र पांडेय की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कार्रवाई जांच से सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। सीबीआई ने मामले में आरोपी और उससे जुड़े नेटवर्क पर लगाए गए आरोपों की जांच जारी होने की बात कही है।
