लखनऊ। राजधानी में विज्ञापन और डिस्प्ले का काम करने वाली तीन फर्मों के बीच कथित आपसी लेनदेन के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने और जीएसटी देनदारी कम करने का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की विशेष जांच शाखा ने बुधवार से तीनों फर्मों के परिसरों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की, जो करीब तीन दिन चली। डालीबाग, जियामऊ और ट्रांसपोर्ट नगर स्थित ठिकानों पर हुई जांच के दौरान अधिकारियों ने कारोबारी दस्तावेज और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए। प्रारंभिक जांच में सामने आई देनदारी के आधार पर ₹2.48 करोड़ की राशि जमा कराई गई है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, जांच की शुरुआत सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों की ओर से इन फर्मों को किए गए भुगतान के आंकड़ों की पड़ताल से हुई। विशेष जांच शाखा ने सेवा देने वाली फर्मों को सरकारी स्तर पर किए गए भुगतान का रिकॉर्ड जुटाया और उसका मिलान संबंधित फर्मों के घोषित कारोबार तथा जमा किए गए जीएसटी से किया। इसी प्रक्रिया में तीन फर्मों के कारोबार और कर भुगतान से जुड़े आंकड़ों में अंतर सामने आया।
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सरकारी भुगतान के रिकॉर्ड में टैक्स कटौती का विवरण भी जांच का अहम हिस्सा रहा। जीएसटी व्यवस्था के तहत सरकारी विभाग और स्थानीय निकाय सेवा प्रदाताओं को भुगतान करते समय निर्धारित नियमों के अनुसार दो प्रतिशत टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) काटते हैं। विभाग ने टीडीएस से जुड़े इन आंकड़ों को फर्मों के घोषित कारोबार और जीएसटी रिटर्न में दर्ज विवरण से मिलाया। आंकड़ों में असमानता मिलने के बाद तीनों फर्मों के कारोबार और आपसी लेनदेन की विस्तृत जांच शुरू की गई।
जांच में अधिकारियों को तीनों फर्मों के बीच आपसी खरीद-बिक्री और अन्य कारोबारी लेनदेन के रिकॉर्ड मिले। विभाग का आरोप है कि इन लेनदेन के आधार पर आईटीसी का लाभ लिया गया और उसे आगे इस्तेमाल करते हुए वास्तविक कर देनदारी कम की गई। जांच में इलेक्ट्रॉनिक लेजर में उपलब्ध आईटीसी और फर्मों की ओर से किए गए दावों के बीच भी अंतर सामने आने की बात कही गई है।
अधिकारियों के अनुसार, कथित तौर पर आपसी लेनदेन के जरिए ऐसा कारोबारी रिकॉर्ड तैयार किया गया, जिससे यह प्रदर्शित हो कि संबंधित खरीद पर टैक्स पहले ही चुकाया जा चुका है। इसी आधार पर आईटीसी उपलब्ध होने का दावा किया गया और उसका इस्तेमाल आगे की जीएसटी देनदारी घटाने में किया गया। विभाग अब यह जांच कर रहा है कि दर्ज किए गए लेनदेन वास्तविक कारोबारी गतिविधियों पर आधारित थे या केवल कर लाभ हासिल करने के उद्देश्य से किए गए थे।
तीनों परिसरों में चली जांच के दौरान टीम ने विभिन्न दस्तावेज, कारोबारी रिकॉर्ड और लेनदेन से संबंधित जानकारी कब्जे में ली। इन रिकॉर्ड का अब फर्मों के जीएसटी विवरण, इलेक्ट्रॉनिक लेजर और बैंकिंग लेनदेन से मिलान किया जाएगा। अधिकारियों का उद्देश्य कथित आईटीसी दावों की पूरी श्रृंखला का पता लगाना है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन लेनदेन के आधार पर कितना कर लाभ लिया गया।
जांच के दौरान सामने आई देनदारी के आधार पर तीनों फर्मों से कुल ₹2.48 करोड़ जमा कराए गए हैं। हालांकि, विभाग ने इसे अंतिम कर देनदारी नहीं माना है। अधिकारियों के अनुसार, कब्जे में लिए गए दस्तावेजों और रिकॉर्ड की विस्तृत जांच अभी बाकी है। इसमें यदि अतिरिक्त अनियमितता या गलत तरीके से आईटीसी लेने की पुष्टि होती है तो कर देनदारी की राशि बढ़ सकती है।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि तीनों फर्मों के बीच धन और बिलों का प्रवाह किस तरह हुआ। इसके लिए अलग-अलग लेनदेन की तारीख, राशि, बिल, कर भुगतान और आईटीसी दावों का मिलान किया जा रहा है। साथ ही सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों से मिले भुगतान तथा फर्मों द्वारा घोषित कारोबार के बीच अंतर के कारणों की भी पड़ताल होगी।
फिलहाल राज्य कर विभाग की जांच जारी है। तीनों फर्मों के रिकॉर्ड की विस्तृत समीक्षा के बाद ही कथित टैक्स चोरी और आईटीसी के गलत इस्तेमाल की वास्तविक राशि स्पष्ट होगी। जांच पूरी होने पर जीएसटी कानून के तहत अतिरिक्त कर, ब्याज और अन्य देनदारी निर्धारित करने की कार्रवाई की जा सकती है।
