SEBI ने न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों के कथित उल्लंघन मामले में Omaxe समेत छह पक्षों पर कुल ₹1.92 करोड़ जुर्माना और बाजार से प्रतिबंध लगाया है।

ओमैक्से पर सेबी की बड़ी कार्रवाई, कंपनी समेत छह पक्षों पर बाजार में रोक; ₹1.92 करोड़ जुर्माना

Team The420
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नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में रियल एस्टेट कंपनी ओमैक्से और उससे जुड़े पांच अन्य पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की है। नियामक ने छह पक्षों पर कुल ₹1.92 करोड़ का जुर्माना लगाया है और उन्हें तय अवधि के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित किया है। सेबी के आदेश के अनुसार, ओमैक्से पर तीन महीने की रोक लगाई गई है, जबकि कंपनी के प्रमोटर रोहताश गोयल और जय भगवान गोयल समेत चार अन्य संबंधित पक्षों पर एक साल के लिए बाजार में कारोबार करने पर रोक रहेगी।

जिन अन्य पक्षों पर कार्रवाई हुई है, उनमें समूह की कंपनियां ड्रीम होम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और गिल्ड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड तथा ओमैक्से के पूर्व संयुक्त प्रबंध निदेशक सुनील गोयल शामिल हैं। प्रतिबंध की अवधि में संबंधित पक्ष प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रतिभूतियों और म्यूचुअल फंड की इकाइयों समेत अन्य प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे। सेबी के आदेश में प्रतिभूति बाजार से किसी भी रूप में जुड़ने पर भी रोक लगाई गई है।

मामला ओमैक्से की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता से जुड़ा है। नियमों के तहत सूचीबद्ध कंपनियों को कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास रखना आवश्यक है। सेबी ने अपने आदेश में कहा कि ओमैक्से निर्धारित 25 प्रतिशत न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता को स्वतंत्र सार्वजनिक शेयरधारिता के माध्यम से हासिल करने में विफल रही।

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नियामक की जांच में आरोप है कि कुछ संस्थाओं ने ओमैक्से के शेयर ऐसे फंड से खरीदे, जिसका स्रोत ओमैक्से और उसकी समूह कंपनियां थीं। इन संस्थाओं को बाद में सार्वजनिक शेयरधारकों के रूप में दिखाया गया। सेबी के अनुसार, कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं से निकली रकम को कई स्तरों के माध्यम से भेजा गया और अंततः उसी रकम का इस्तेमाल ओमैक्से के शेयर खरीदने में किया गया।

सेबी के मुताबिक, ओमैक्से और उसकी समूह कंपनियों ने डीवीएम रियलटर्स प्राइवेट लिमिटेड, गर्व बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और जीत बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कुल ₹46.50 करोड़ की रकम भेजी। नियामक के अनुसार, इस धनराशि का इस्तेमाल 3 जून 2013 और 29 अक्टूबर 2013 को हुए ऑफर फॉर सेल के दौरान ओमैक्से के शेयर खरीदने में किया गया। सेबी ने कहा कि इन लेनदेन को अलग-अलग फंड ट्रांसफर या स्वतंत्र शेयर खरीद के रूप में अलग करके नहीं देखा जा सकता।

सेबी के आदेश के अनुसार, 3 जून 2013 के ऑफर फॉर सेल के बाद फंड से खरीदे गए शेयरों को सार्वजनिक हिस्सेदारी की गणना से हटाने पर कंपनी की सार्वजनिक हिस्सेदारी रिपोर्ट किए गए 16.21 प्रतिशत के बजाय करीब 14.57 प्रतिशत रह जाती। इसी तरह, 29 अक्टूबर 2013 के ऑफर फॉर सेल के बाद सार्वजनिक हिस्सेदारी 20.97 प्रतिशत के बजाय करीब 19.04 प्रतिशत रह जाती।

बाद में बोनस शेयर जारी किए जाने के बाद भी फंड से खरीदे गए शेयरों और उनसे जुड़े बोनस शेयरों को अलग करने पर सार्वजनिक हिस्सेदारी 25.01 प्रतिशत के बजाय करीब 22.71 प्रतिशत रहने की बात सेबी के आदेश में कही गई है। इसका अर्थ यह था कि संबंधित शेयरों को स्वतंत्र सार्वजनिक हिस्सेदारी मानने पर कंपनी की हिस्सेदारी निर्धारित सीमा के ऊपर दिखाई दे रही थी, जबकि उन शेयरों को हटाने के बाद यह सीमा से नीचे आ जाती थी।

सेबी ने इस व्यवस्था को प्रतिभूति लेनदेन से जुड़ी कथित धोखाधड़ीपूर्ण और भ्रामक योजना माना है। नियामक ने सेबी अधिनियम और प्रतिभूति बाजार में धोखाधड़ी तथा अनुचित व्यापार गतिविधियों की रोकथाम से जुड़े नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन पाया। इसके अलावा न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता और शेयरधारिता पैटर्न के खुलासे से संबंधित नियमों के उल्लंघन के लिए भी ओमैक्से और संबंधित पक्षों को जिम्मेदार ठहराया गया है।

सेबी की कार्रवाई में जुर्माने के साथ बाजार से प्रतिबंध भी शामिल है। आदेश के अनुसार, ओमैक्से पर तीन महीने और अन्य पांच संबंधित पक्षों पर एक साल की रोक लागू होगी। प्रतिबंध के दौरान वे प्रतिभूति बाजार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कारोबार करने के अलावा किसी अन्य रूप में भी बाजार से जुड़ नहीं सकेंगे।

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