चेन्नई। तमिलनाडु में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान खरीद में कथित फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अब राजस्व मंडल अधिकारी (आरडीओ) स्तर पर भी दस्तावेजों की जांच की जाएगी। तमिलनाडु नागरिक आपूर्ति निगम ने धान के सीधे खरीद केंद्रों (डीपीसी) पर आने वाले किसानों के दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया में एक अतिरिक्त स्तर जोड़ा है। इसका उद्देश्य दूसरे राज्यों से खरीदे गए धान और पुराने भंडार को तमिलनाडु में किसानों की उपज बताकर एमएसपी पर बेचने की आशंका को रोकना है।
नई व्यवस्था के तहत किसान द्वारा ऑनलाइन जमा किए गए ई-अडंगल और जमीन से जुड़े अन्य दस्तावेजों की आरडीओ स्तर पर जांच होगी। अभी तक फसल की जानकारी और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (वीएओ) तथा खरीद केंद्र पर तैनात अधिकारियों द्वारा किया जाता था। आरडीओ को कृषि विभाग से खेती के क्षेत्रफल, बीज वितरण और अन्य संबंधित आंकड़ों तक पहुंच मिलेगी। इससे यह जांचने में मदद मिलेगी कि किसी क्षेत्र में दर्ज खेती के रकबे के अनुपात में खरीद केंद्र पर पहुंचने वाला धान वास्तविक है या नहीं।
अधिकारियों के अनुसार, राज्य में धान की सरकारी खरीद में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। आरोप है कि तमिलनाडु और पड़ोसी आंध्र प्रदेश के कुछ चावल कारोबारियों तथा बिचौलियों द्वारा कर्ज में दबे किसानों से धान खरीदा जाता है और बाद में उसे सीधे खरीद केंद्रों पर किसानों की उपज के रूप में बेचने की कोशिश की जाती है। नई जांच व्यवस्था से ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की उम्मीद है।
तमिलनाडु में धान का खरीद मूल्य पड़ोसी दक्षिणी राज्यों की तुलना में अधिक होने के कारण इस तरह के कथित फर्जीवाड़े का आर्थिक प्रोत्साहन भी बढ़ जाता है। राज्य में अच्छी गुणवत्ता वाली धान की किस्मों के लिए करीब ₹2,750 प्रति क्विंटल और सामान्य किस्मों के लिए ₹2,600 प्रति क्विंटल का खरीद मूल्य निर्धारित है। अधिकारियों के मुताबिक, अच्छी गुणवत्ता वाली धान के मामले में यह दर कुछ पड़ोसी राज्यों की तुलना में करीब ₹350 से ₹400 प्रति क्विंटल अधिक है।
मौजूदा व्यवस्था में किसान ई-अडंगल फसल प्रशासन पोर्टल के जरिए अपनी खेती और फसल का विवरण दर्ज करते हैं। इसके बाद वीएओ खेत में खड़ी फसल का भौतिक सत्यापन करता है और आवेदन को मंजूरी दी जाती है। किसान खरीद केंद्र पर ई-अडंगल, पट्टा और जमीन से जुड़े अन्य दस्तावेजों के साथ बैंक पासबुक जमा कर धान बेचते हैं। भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाता है और सामान्यतः 10 दिन के भीतर राशि पहुंचाई जाती है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में व्यापारियों द्वारा कथित तौर पर कर्ज में दबे किसानों से करीब ₹1,800 से ₹2,000 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाता है। इसके बाद इसे सरकारी खरीद केंद्रों पर एमएसपी के करीब दाम पर बेचने की कोशिश की जाती है। इससे कारोबारियों को करीब 30 से 40 प्रतिशत तक का अंतर मिल सकता है। ऐसे मामलों में फर्जी ई-अडंगल प्रमाणपत्र तैयार कर किसान के नाम पर धान की खेती दिखाने का भी संदेह जताया गया है।
नई व्यवस्था का असर 2026-27 के खरीफ विपणन सत्र में खरीद केंद्रों के संचालन पर भी पड़ा है। एक सितंबर से शुरू हुए विपणन सत्र में कुछ जिलों में डीपीसी खोलने में देरी हुई, क्योंकि जिला प्रशासन को नई आरडीओ स्तर की जांच पूरी करनी पड़ी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष कुरुवई धान की खेती कम होने और कई क्षेत्रों में देर से बुआई होने के कारण किसानों पर देरी का असर फिलहाल सीमित रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 21 सितंबर तक राज्य में 498 सीधे खरीद केंद्र चालू हो चुके थे। बुधवार से करीब 200 और केंद्र शुरू किए जाने की योजना थी, जिससे गुरुवार तक सक्रिय केंद्रों की संख्या करीब 690 हो जाने की उम्मीद थी। पिछले वर्ष इसी अवधि में लगभग 1,050 खरीद केंद्र संचालित हो रहे थे।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष अकेले कुरुवई फसल से करीब 14 लाख टन धान का उत्पादन हुआ था, जबकि इस वर्ष उत्पादन काफी कम रहने की संभावना है। ऐसे में आरडीओ स्तर की जांच से वास्तविक खेती और सरकारी खरीद के बीच मिलान करने में मदद मिलेगी तथा दूसरे राज्यों या पुराने भंडार से आने वाले धान को किसानों की ताजा उपज बताकर एमएसपी पर बेचने की संभावित गड़बड़ी पर निगरानी बढ़ेगी।
