72 वर्षीय वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ ने किसी को ओटीपी, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करने की बात कही; 3 जुलाई से 15 सितंबर के बीच कई लेनदेन, शिकायत के बाद महानगर पुलिस ने शुरू की जांच

AIIMS पटना के संस्थापक निदेशक के खाते से ₹3.22 लाख की साइबर ठगी, दो महीने तक होती रहीं अनधिकृत निकासी

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By Roopa
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लखनऊ। AIIMS पटना के संस्थापक निदेशक और वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. गिरीश कुमार सिंह के बैंक खाते से साइबर ठगों ने कथित तौर पर ₹3,22,408 निकाल लिए। 72 वर्षीय डॉ. सिंह वर्तमान में प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में कार्यरत हैं और लखनऊ के निशातगंज स्थित डॉ. बैजनाथ रोड के एल्डेको एम्परर इलाके में रहते हैं। मामले में महानगर पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

डॉ. सिंह की शिकायत के मुताबिक, उनके इंडियन बैंक खाते से 3 जुलाई से 15 सितंबर के बीच कई अनधिकृत लेनदेन हुए। करीब दो महीने से अधिक समय तक अलग-अलग चरणों में रकम खाते से निकलती रही। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी, पासवर्ड या बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं की थी।

शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उन्हें खाते से रकम निकलने की जानकारी तब हुई, जब अनधिकृत लेनदेन के बाद उनके खाते से धनराशि कट गई। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी जुटाई और पाया कि उनके खाते से उनकी अनुमति के बिना कई निकासी की गई थीं। कुल मिलाकर खाते से ₹3.22 लाख से अधिक की रकम निकल चुकी थी।

डॉ. सिंह ने 18 सितंबर को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर घटना की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद महानगर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और बैंक खाते से जुड़े लेनदेन की जांच शुरू की।

पुलिस अब खाते की बैंक विवरण पुस्तिका, संदिग्ध लेनदेन, धनराशि के हस्तांतरण और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि रकम किन खातों में गई, लेनदेन किस माध्यम से किए गए और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

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जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बिना ओटीपी या बैंकिंग पासवर्ड साझा किए खाते से अनधिकृत लेनदेन किस तरीके से संभव हुए। पुलिस डिजिटल लेनदेन की कड़ियों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

साइबर धोखाधड़ी के ऐसे मामलों में अपराधी कई बार पीड़ित की बैंकिंग जानकारी हासिल करने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, डॉ. सिंह के मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ठगी करने वालों ने खाते तक किस माध्यम से पहुंच बनाई। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही इसकी तस्वीर साफ हो सकेगी।

पुलिस के अनुसार, मामले से जुड़े बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। अनधिकृत लेनदेन की पूरी श्रृंखला का पता लगाने के साथ रकम के अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. सिंह लंबे समय से चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और AIIMS पटना के संस्थापक निदेशक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उनके खाते से हुई साइबर ठगी ने बैंक खातों की निगरानी और अनधिकृत लेनदेन की समय पर पहचान के महत्व को फिर सामने ला दिया है। मामले में पुलिस की जांच जारी है और अभी तक आरोपियों की पहचान या गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है।

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