अंबेडकरनगर। पैतृक मकान पर कथित तौर पर कब्जे की कोशिश और सरकारी अभिलेखों में परिवार के सदस्यों के नाम में कथित हेरफेर के मामले में अंबेडकरनगर पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत आठ नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके पैतृक परिवार से कोई संबंध नहीं रखने वाले व्यक्ति का नाम परिवार रजिस्टर में दर्ज कराने के लिए ग्राम पंचायत स्तर के अभिलेखों में बदलाव कराया गया। पुलिस ने अदालत के आदेश के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता हरिओम के अनुसार, उनके पिता राधेश्याम दुबे और मां राजकुमारी का निधन हो चुका है। वह आमादरवेशपुर स्थित पैतृक मकान में रहते हैं। आरोप है कि नसीरपुर निवासी राममनोज ने ग्राम सचिव और अन्य लोगों की कथित मदद से सरकारी अभिलेखों में अपना नाम दर्ज कराने की कोशिश की, ताकि बाद में पैतृक संपत्ति पर अपना दावा मजबूत किया जा सके।
हरिओम ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 26 अक्टूबर 2010 को राममनोज ने एक बैनामा कराया था। इसमें उसका पता नसीरपुर दर्ज था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में दस्तावेजों और अभिलेखों में उसका नाम बदलकर मनोज दुबे कर दिया गया और उसे आमादरवेशपुर के परिवार रजिस्टर में दर्ज करा दिया गया। इसी बदलाव को लेकर शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताई और इसे पैतृक मकान पर दावा मजबूत करने की कथित कोशिश बताया।
शिकायत के मुताबिक, 27 मई 2017 को तत्कालीन ग्राम प्रधान संतरा देवी ने परिवार रजिस्टर में मनोज दुबे और उसकी पत्नी लक्ष्मी के नाम दर्ज होने की पुष्टि की थी। इसके बाद 10 फरवरी 2023 को तत्कालीन ग्राम पंचायत स्तर पर जारी एक प्रमाण पत्र में राधेश्याम दुबे के बेटे के रूप में हरिओम के साथ मनोज कुमार का नाम भी दर्ज कर दिया गया। हरिओम का कहना है कि उनके पिता के परिवार में मनोज कुमार नाम का कोई पुत्र नहीं था।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में राममनोज के अलावा आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र के लोहरा निवासी शिवप्रसाद और बृजराज यादव की भी कथित भूमिका रही। आरोप है कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराने और संबंधित प्रमाण पत्र जारी कराने की प्रक्रिया में इन लोगों ने सहयोग किया। नाम दर्ज होने को लेकर विवाद सामने आने के बाद दोनों पक्षों के बीच मामला बढ़ गया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
हरिओम के मुताबिक, विवाद के बाद से उनके खिलाफ थाना और तहसील स्तर पर लगातार शिकायतें भी की जाती रहीं। उनका आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में कथित बदलाव का इस्तेमाल उनके खिलाफ दबाव बनाने और पैतृक मकान पर दूसरे व्यक्ति का दावा स्थापित करने के लिए किया जा रहा था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मामले में ग्राम प्रधान/प्रशासक अभिमन्यु मौर्य, पूर्व प्रधान संतरा देवी, ग्राम सचिव समेत आठ लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस ने आरोपों से जुड़े दस्तावेजों को जांच का आधार बनाया है। अधिकारियों के अनुसार, एफआईआर दर्ज होने के बाद परिवार रजिस्टर में की गई प्रविष्टियों और उन्हें प्रमाणित करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
सीओ आलापुर अरुण कुमार नौहवार के अनुसार, अदालत के आदेश के बाद आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस वर्ष 2010 में किए गए बैनामे, वर्ष 2017 में परिवार रजिस्टर में हुई प्रविष्टि और वर्ष 2023 में जारी प्रमाण पत्र समेत संबंधित अभिलेखों की जांच कर रही है।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर हुआ और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में किन अधिकारियों या पंचायत कर्मचारियों की भूमिका थी। पुलिस दस्तावेजों की मूल प्रतियां और उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान कर तथ्यों की पुष्टि करने में जुटी है।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामला पैतृक संपत्ति से जुड़े अधिकार और सरकारी अभिलेखों में दर्ज पारिवारिक विवरण की सत्यता से जुड़ा होने के कारण पुलिस सभी संबंधित दस्तावेजों और आरोपों की जांच कर रही है।
