बेंगलुरु। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को लेकर गंभीर आरोप सामने रखे हैं। ईडी के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार बिचौलिए बसवराज कन्नाले ने पूछताछ के दौरान दावा किया कि उसने गंगवार को करीब ₹1.30 करोड़ नकद दिए और प्रश्नपत्र लीक कराने की प्रक्रिया में गहनों की खरीद के लिए भी रकम उपलब्ध कराई।
ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी जांच में गंगवार की हिरासत हासिल करने के लिए बिचौलिए के पूछताछ में दिए गए बयानों का हवाला दिया। एजेंसी ने पिछले सप्ताह गंगवार और कन्नाले को गिरफ्तार किया था। कन्नाले को बाद में कर्नाटक अपराध जांच विभाग (CID) ने भी अपनी जांच में हिरासत में लिया।
ईडी ने विशेष अदालत को बताया कि कन्नाले के अनुसार उसने गंगवार को ₹1.30 करोड़ नकद दिए थे। इसके अलावा उसके माध्यम से गहने भी खरीदे गए। जांच एजेंसी के मुताबिक, बेंगलुरु के एक प्रमुख आभूषण प्रतिष्ठान से करीब ₹23 लाख का हीरे का हार खरीदा गया था। वहीं, कर्नाटक CID ने गंगवार की जमानत सुनवाई के दौरान दावा किया था कि कन्नाले के माध्यम से ₹28 लाख से अधिक कीमत का सोने का हार भी खरीदा गया। CID के अनुसार, इनमें से गहने गंगवार के एक मित्र के पास से बरामद किए गए हैं।
गंगवार अगस्त 2026 में गिरफ्तार हुए थे। वह 2024 से मार्च 2026 तक करीब दो साल KPSC के परीक्षा नियंत्रक पद पर रहे। ईडी अब इस अवधि में आयोजित अन्य परीक्षाओं में भी कथित अपराध से हासिल रकम के इस्तेमाल और धन के लेनदेन की जांच कर रही है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एजेंसी यह भी देख रही है कि कन्नाले ने गंगवार के लिए लंबे समय तक धन का प्रबंधन किया था या नहीं। ईडी को 2025 में भी कन्नाले की ओर से गंगवार को रकम हस्तांतरित किए जाने की जानकारी मिली है।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कन्नाले को प्रवेश परीक्षा के प्रश्न उपलब्ध कराने के लिए ₹30 लाख से ₹40 लाख मिले थे। आरोप है कि उसने पशु चिकित्सा अधिकारी पद के अभ्यर्थियों से चयन कराने के नाम पर करीब ₹1.50 करोड़ अग्रिम रिश्वत के रूप में जुटाए। इसमें कुछ रकम नकद थी, जबकि करीब ₹80 लाख के बैंक हस्तांतरण का पता लगाया गया है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
ईडी के अनुसार, 7 जनवरी को गंगवार के घर पहुंचे कन्नाले को कथित तौर पर प्रश्नपत्र और उसके उत्तर एक पेन ड्राइव में दिए गए थे। इसके बाद कथित तौर पर पैसे देने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थी एयरबीएनबी के विला में ठहरे थे, जहां उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र दिया गया। मुख्य परीक्षा 9 जनवरी को हुई थी।
मामले में KPSC के अध्यक्ष सहूकर शिवशंकरप्पा और आयोग के अन्य सदस्यों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित अनियमितताओं से हासिल रकम को किस तरह स्थानांतरित या छिपाया गया।
पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती को लेकर विवाद तब सामने आया जब असफल अभ्यर्थी डॉ. एस. मंजूनाथ ने 24 जुलाई 2026 को प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कमजोर शैक्षणिक रिकॉर्ड वाले 29 अभ्यर्थियों ने 600 में 450 से अधिक अंक हासिल किए और उनका चयन पशु चिकित्सा अधिकारियों के रूप में हो गया।
जनवरी में हुई KPSC प्रवेश परीक्षा में सरकारी सेवाओं में 400 पशु चिकित्सक पदों के लिए करीब 1,400 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 329 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। CID और ED अब कथित प्रश्नपत्र लीक, रिश्वत, बैंक लेनदेन और भर्ती प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रहे हैं।
