आय से अधिक संपत्ति के मामलों में म्यूचुअल फंड, शेयर और जीवन बीमा पॉलिसियों में निवेश के संकेत; गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप, पशु डेयरी और ट्रकों में पैसा लगाने का भी पता, परिवार-परिचितों के नाम पर संपत्ति रखने का आरोप

जमीन से शेयर बाजार तक पहुंची भ्रष्टाचार की कमाई, विजिलेंस जांच में निवेश के नए तरीके उजागर

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By Roopa
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आगरा। भ्रष्टाचार के जरिए कथित तौर पर जुटाई गई रकम को छिपाने के लिए सरकारी अफसर और कर्मचारी अब केवल जमीन, मकान और जेवरात का सहारा नहीं ले रहे हैं। आय से अधिक संपत्ति के मामलों की जांच के दौरान सतर्कता अधिष्ठान को निवेश के ऐसे तरीके भी मिले हैं, जिनमें संदिग्ध रकम शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और जीवन बीमा पॉलिसियों में लगाने के आरोप हैं। कुछ मामलों में गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप, पशु डेयरी और ट्रकों में निवेश किए जाने की जानकारी भी जांच के दायरे में आई है। कई मामलों में संपत्ति और निवेश सीधे संबंधित लोकसेवक के नाम पर न होकर परिवार के सदस्यों या परिचितों के नाम पर होने की बात सामने आई है।

विजिलेंस आगरा सेक्टर के दायरे में आगरा के अलावा मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, हाथरस, अलीगढ़ और कासगंज जिले आते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस सेक्टर में हर साल सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने से संबंधित 200 से अधिक शिकायतें पहुंचती हैं। इसके साथ ही लोकसेवकों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति जुटाने की शिकायतें भी मिलती हैं। हालांकि, हर शिकायत को सीधे भ्रष्टाचार का मामला नहीं माना जाता। अधिकारियों के अनुसार कुछ शिकायतें आपसी रंजिश या सरकारी काम नहीं होने से नाराज लोगों की ओर से भी की जाती हैं। ऐसे में शिकायत की प्राथमिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाती है।

आय से अधिक संपत्ति की जांच में आय और संपत्ति का मिलान

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच के दौरान एक निर्धारित अवधि में संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की वैध आय का आकलन किया जाता है। इसके बाद जमीन, मकान, दुकान, बैंक खाते और दूसरे निवेशों से जुड़ी जानकारी जुटाकर उसकी तुलना आय से की जाती है। जांच में यह देखा जाता है कि संबंधित व्यक्ति के पास मौजूद संपत्ति और निवेश के लिए पर्याप्त वैध स्रोत उपलब्ध थे या नहीं।

यदि संपत्ति और निवेश घोषित या वैध आय की तुलना में अधिक पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति से रकम के स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेज मांगे जाते हैं। बैंक खातों, संपत्ति खरीद, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जाती है। वैध स्रोत का संतोषजनक प्रमाण नहीं मिलने पर मामले में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाती है।

जमीन-जेवर से आगे बढ़ा निवेश का तरीका

विजिलेंस जांच के अनुसार, पहले कथित अवैध रकम को जमीन, फ्लैट, कृषि भूमि, दुकान और सोने-चांदी जैसी संपत्तियों में लगाने के मामले अधिक सामने आते थे। अब जांच में निवेश के तरीकों में बदलाव के संकेत मिले हैं। कुछ मामलों में संदिग्ध रकम को म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और जीवन बीमा पॉलिसियों में लगाने की जानकारी सामने आई है।

इसके अलावा पशु डेयरी, गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप और ट्रक खरीदने में पैसा लगाने के मामले भी जांच के दायरे में आए हैं। जांच अधिकारियों के लिए ऐसे मामलों में केवल संपत्ति का मूल्यांकन ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि निवेश की रकम किस खाते से आई, किसके नाम पर निवेश हुआ और उस रकम का वास्तविक स्रोत क्या था, इसकी भी पड़ताल की जाती है।

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परिवार और परिचितों के नाम पर संपत्ति रखने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में संबंधित अधिकारी या कर्मचारी ने संपत्ति और निवेश अपने नाम पर नहीं किए। परिवार के सदस्यों या परिचितों के नाम पर जमीन, निवेश और अन्य संपत्तियां खरीदे जाने की बात सामने आई है। कुछ मामलों में अलग-अलग राज्यों में संपत्ति या निवेश करने की जानकारी भी जांच में मिली है।

ऐसे मामलों में विवेचक बैंक खातों, लेनदेन, संपत्ति खरीद के दस्तावेज और निवेश के रिकॉर्ड के बीच संबंध तलाशते हैं। यह भी देखा जाता है कि जिस व्यक्ति के नाम पर संपत्ति या निवेश है, उसकी घोषित आय उस निवेश को करने के लिए पर्याप्त थी या नहीं।

पत्नी की आय के दावों की भी जांच

आय से अधिक संपत्ति की जांच में कई बार अधिकारी की पत्नी के नाम पर संपत्ति या निवेश पाए जाने की बात सामने आती है। ऐसे मामलों में यह दावा किया जाता है कि पत्नी ट्यूशन पढ़ाने, बीमा एजेंट के तौर पर काम करने या कृषि से आय अर्जित करती हैं। जांच में इन दावों के समर्थन में आय, बैंक लेनदेन और अन्य दस्तावेज देखे जाते हैं।

विजिलेंस के अनुसार, कई मामलों में बताई गई आय और संपत्ति के मूल्य के बीच अंतर सामने आने पर जांच को आगे बढ़ाया जाता है। बैंक खातों, निवेश योजनाओं और संपत्ति खरीद के दस्तावेजों से यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि रकम का वास्तविक स्रोत क्या था।

2025-26 में 15 से अधिक मामले दर्ज

विजिलेंस के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में आगरा सेक्टर में आय से अधिक संपत्ति से संबंधित 15 से अधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें सिरसागंज तहसील के तत्कालीन लेखपाल अभिलाष सिंह, तत्कालीन नायब तहसीलदार नवीन कुमार और तत्कालीन उप जिलाधिकारी विवेक राजपूत के नाम शामिल हैं। इसके अलावा जलकल नगर निगम, बरेली के तत्कालीन मुख्य अभियंता राजेश कुमार और फिरोजाबाद के तत्कालीन आबकारी निरीक्षक कौशल कुमार के खिलाफ भी मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायत मिलने पर उसकी जांच की जाती है और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में वैध आय और संपत्ति के बीच अंतर का दस्तावेजी परीक्षण किया जाता है। एसपी विजिलेंस आलोक शर्मा के मुताबिक, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने वाले किसी लोकसेवक के खिलाफ रिश्वत विरोधी हेल्पलाइन नंबर 9454401864 पर शिकायत की जा सकती है।

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