बाराबंकी। बदोसराय क्षेत्र के एक गांव में ब्लैकमेलिंग से परेशान 18 वर्षीय युवती ने बुधवार देर रात फंदे से लटककर जान दे दी। परिवार का आरोप है कि युवती को मोबाइल फोन पर लगातार धमकियां मिल रही थीं। कॉल करने वाला कथित तौर पर अश्लील तस्वीरें प्रसारित करने और पुलिस कार्रवाई कराने की धमकी दे रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि युवती को ब्लैकमेल करने वाला कोई साइबर अपराधी था या उसका कोई परिचित।
परिजनों के अनुसार, युवती का शव देर रात कमरे में दुपट्टे के सहारे फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने युवती का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर उसकी कॉल हिस्ट्री, व्हाट्सऐप कॉल और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है।
युवती के भाई के मुताबिक, मोबाइल फोन की जांच करने पर उसमें कई व्हाट्सऐप कॉल मिलीं। परिवार का दावा है कि युवती ने मौत से पहले गांव के एक जनसेवा केंद्र से किसी व्यक्ति के यूपीआई खाते में ₹15 हजार का भुगतान किया था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि यह रकम किस कारण भेजी गई और भुगतान का ब्लैकमेलिंग से कोई संबंध था या नहीं।
भाई ने बताया कि 15 सितंबर को युवती के मोबाइल पर आई एक कॉल उसने खुद रिसीव की थी। उसके अनुसार, कॉल करने वाले ने धमकी देने के बाद फोन काट दिया था। परिवार को आशंका है कि इसके बाद भी युवती पर दबाव बनाया जाता रहा। हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कॉल करने वाला कौन था और उसके द्वारा दी गई धमकियों का युवती की मौत से क्या संबंध था।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
पुलिस की शुरुआती जांच में कॉल करने वाले व्यक्ति और जिस यूपीआई खाते में रकम भेजी गई, दोनों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस डिजिटल भुगतान का विवरण, मोबाइल में मौजूद बातचीत और कॉल से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि युवती की किसी व्यक्ति से पहले से पहचान या संपर्क था या उसे किसी अज्ञात साइबर अपराधी ने निशाना बनाया था।
परिवार के अनुसार, युवती के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। घर में उसकी मां के अलावा पांच भाई-बहन हैं। युवती परिवार में दूसरे नंबर पर थी। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। अभी तक ब्लैकमेलिंग के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है और न ही यह स्पष्ट है कि ₹15 हजार का भुगतान किस उद्देश्य से किया गया था। पुलिस मोबाइल और बैंकिंग लेनदेन से मिलने वाले सुरागों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
