वाराणसी: होटल की ऑनलाइन बुकिंग रद्द कराने के लिए Google पर कस्टमर केयर नंबर खोजना रांची के एक पर्यटक को भारी पड़ गया। वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन के लिए पत्नी के साथ पहुंचे रवींद्र प्रसाद सिंह कथित साइबर ठगों के जाल में फंस गए और उनके बैंक खाते से कुल ₹5.13 लाख से अधिक की रकम निकाल ली गई। आरोप है कि ठगों ने खुद को होटल बुकिंग सेवा का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर WhatsApp के जरिए एक APK फाइल डाउनलोड कराई। फाइल डाउनलोड करने के बाद कुछ ही समय में खाते से कई लेनदेन हुए और ₹5,13,023 निकाल लिए गए।
होटल बुकिंग रद्द कराने के लिए शुरू की तलाश
रांची के बरियातू क्षेत्र के रहने वाले रवींद्र प्रसाद सिंह अपनी पत्नी के साथ रविवार को वाराणसी पहुंचे थे। उन्होंने काशी के अमाया होटल में दो दिनों के लिए कमरा बुक किया था। 23 और 24 अगस्त की बुकिंग रद्द कराने के लिए उन्होंने पहले होटल के रिसेप्शन से संपर्क किया।
होटल कर्मचारियों ने बताया कि कमरा Agoda के माध्यम से बुक किया गया है, इसलिए कैंसिलेशन की प्रक्रिया संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ही पूरी होगी। इसके बाद होटल कर्मचारियों की मदद से Google पर Agoda का कस्टमर केयर नंबर खोजा गया। खोज के दौरान मिले एक मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया।
WhatsApp से भेजी APK फाइल
शिकायत के मुताबिक, फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को कथित कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताया। उसने बुकिंग रद्द कराने की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर WhatsApp के जरिए एक APK फाइल का लिंक भेजा। कथित प्रतिनिधि ने रवींद्र प्रसाद से लिंक पर क्लिक कर फाइल डाउनलोड करने को कहा।
फाइल डाउनलोड करने के कुछ समय बाद उनके बैंक ऑफ इंडिया के खाते से लगातार लेनदेन शुरू हो गए। पीड़ित के मुताबिक, कई बार में कुल ₹5,13,023 खाते से निकाल लिए गए। जब उन्हें खाते से रकम निकलने की जानकारी हुई, तब तक बड़ी राशि साइबर अपराधियों के नियंत्रण वाले खातों में पहुंच चुकी थी।
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NCRP पर शिकायत, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच
घटना के बाद रवींद्र प्रसाद ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में बरियातू थाना, रांची में मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद उन्होंने मुकदमे की प्रति के साथ साइबर सेल वाराणसी को भी शिकायती पत्र दिया।
पुलिस अब खाते से निकली रकम के लेनदेन की कड़ी खंगाल रही है। इसके अलावा जिस मोबाइल नंबर से कथित कस्टमर केयर प्रतिनिधि ने संपर्क किया था, उसकी भी जांच की जा रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि APK फाइल किस स्रोत से भेजी गई और उसे डाउनलोड कराने के बाद आरोपी किस तकनीकी तरीके से बैंक खाते तक पहुंचने में सफल हुए।
फर्जी कस्टमर केयर नंबर बन रहा साइबर ठगी का हथियार
ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर लोकप्रिय कंपनियों, होटल, बैंक, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या ट्रैवल वेबसाइटों के नाम से फर्जी कस्टमर केयर नंबर इंटरनेट पर उपलब्ध करा देते हैं। Google जैसे सर्च इंजन पर किसी सेवा का नंबर तलाशने वाला व्यक्ति अनजाने में ऐसे नंबर पर पहुंच सकता है। बातचीत के दौरान ठग समस्या का समाधान करने का भरोसा देकर लिंक, APK या अन्य फाइल डाउनलोड करा सकते हैं।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, कस्टमर केयर नंबर खोजते समय केवल सर्च परिणाम में दिखाई देने वाले नंबर को आधिकारिक मान लेना जोखिम भरा है। किसी सेवा के लिए संपर्क नंबर हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक ऐप से सत्यापित करना चाहिए। अनजान व्यक्ति के कहने पर APK फाइल डाउनलोड करना विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ऐसी फाइल डिवाइस और उसमें मौजूद संवेदनशील जानकारी के लिए गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है कि होटल या यात्रा बुकिंग रद्द कराने के लिए किसी अनजान मोबाइल नंबर पर संपर्क करने से बचें। यदि किसी संदिग्ध लिंक या फाइल को डाउनलोड कर लिया गया है और खाते से अनधिकृत लेनदेन शुरू हो गया है, तो तुरंत बैंक को सूचित कर डिजिटल भुगतान सेवाओं को सुरक्षित करना चाहिए और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करानी चाहिए। यह मामला बताता है कि सुविधा के लिए Google पर की गई एक सामान्य खोज भी सावधानी न बरतने पर लाखों रुपये के नुकसान में बदल सकती है।
