आगरा: करीब ₹1 लाख करोड़ की कथित विदेशी रेमिटेंस और शेल कंपनियों के जरिए रकम विदेश भेजे जाने के मामले में आयकर विभाग ने आगरा में पहली बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने ताजगंज निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) रेहान खान के खिलाफ कथित तौर पर बिना उचित सत्यापन के प्रमाणपत्र जारी करने और संदिग्ध लेनदेन के जरिए रकम विदेश भेजने में मदद करने के आरोप में FIR दर्ज कराई है।
यह कार्रवाई 18 अगस्त से शुरू हुई पांच दिन की देशव्यापी तलाशी के बाद हुई है। आयकर विभाग की जांच में देश के कई शहरों में 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट और 346 कंपनियों व फर्मों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई थी। विभाग अब बरामद दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटा है।
Form 15CB में उचित सत्यापन नहीं करने का आरोप
रेहान खान के आवास की तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि विदेश रकम भेजने से पहले जरूरी सत्यापन किए बिना Form 15CB प्रमाणपत्र जारी किए गए।
Form 15CB कुछ निर्धारित परिस्थितियों में गैर-निवासियों को किए जाने वाले भुगतान और उस पर लागू कर संबंधी जानकारी से जुड़ा प्रमाणपत्र है। ऐसे मामलों में चार्टर्ड अकाउंटेंट से संबंधित दस्तावेजों, भुगतान की प्रकृति और लेनदेन से जुड़े पक्षों की जानकारी की जांच की अपेक्षा की जाती है।
आयकर विभाग अब यह जांच कर रहा है कि जिन प्रमाणपत्रों के आधार पर विदेशी रेमिटेंस की गई, उनमें वास्तविक कारोबारी लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों का पर्याप्त सत्यापन किया गया था या नहीं।
हजारों करोड़ रुपये के कथित लेनदेन की जांच
विभाग का दावा है कि तलाशी के दौरान ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि रेहान खान ने कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये की संदिग्ध या बेहिसाब रकम विदेश भेजने में मदद की।
पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं के सामने CA अभिषेक गुप्ता और निखिल हरवानी के नाम भी सामने आने की बात कही गई है। जांच एजेंसी अब दोनों की कथित भूमिका और रेहान खान से उनके संबंधों की पड़ताल कर रही है।
इसके साथ ही उन कंपनियों और फर्मों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं, जिनका नाम संदिग्ध लेनदेन में सामने आया है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि रकम का स्रोत क्या था, उसे किन खातों और संस्थाओं के जरिए भेजा गया और विदेश में अंतिम लाभार्थी कौन थे।
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शेल कंपनियों के जरिए रकम भेजने की आशंका
जांच एजेंसी को आशंका है कि कुछ कंपनियों का इस्तेमाल वास्तविक कारोबारी गतिविधियों के बजाय रकम को विदेश भेजने के माध्यम के रूप में किया गया हो सकता है। आयकर अधिकारी अब कंपनियों के कारोबार, बैंक खातों, आयात-निर्यात दस्तावेजों और विदेशी भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कथित विदेशी रेमिटेंस के पीछे वास्तविक आयात या कारोबारी लेनदेन मौजूद थे या केवल कागजी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान किए गए।
पांच दिन चली देशव्यापी तलाशी
रेहान खान के खिलाफ कार्रवाई आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा की पांच दिन चली व्यापक तलाशी का हिस्सा है। देश के अलग-अलग शहरों में CA, कंपनियों और फर्मों से जुड़े परिसरों की तलाशी लेकर वित्तीय दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड जुटाए गए।
जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों को आपस में जोड़कर कथित विदेशी धन हस्तांतरण की पूरी संरचना समझने की कोशिश कर रही है। बैंक खातों, भुगतान रिकॉर्ड और कारोबारी दस्तावेजों के मिलान से यह पता लगाया जा रहा है कि कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग और संस्थाएं शामिल थीं।
विदेश भेजी गई रकम के मनी ट्रेल पर फोकस
जांच का अगला प्रमुख चरण कथित रकम के मनी ट्रेल को ट्रैक करना है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि पैसा किन खातों से निकला, किन कंपनियों के माध्यम से आगे बढ़ा और विदेश में किन संस्थाओं या व्यक्तियों तक पहुंचा।
आयकर विभाग यह भी जांच रहा है कि विदेशी भुगतान के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेज वास्तविक कारोबारी गतिविधियों को दर्शाते थे या नहीं। रेहान खान के खिलाफ दर्ज FIR आगरा में इस व्यापक जांच से सामने आई पहली बड़ी आपराधिक कार्रवाई है।
आगे की कार्रवाई बरामद दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड, पूछताछ और विदेशी लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर निर्भर करेगी। जांच बढ़ने के साथ अन्य CA, कंपनियों और संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
