कानपुर: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कानपुर नगर में IBPS परीक्षा में नकल कराने वाले कथित गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों को परीक्षा में अनुचित तरीके से पास कराने के लिए फर्जी या अनधिकृत सहायक लेखक उपलब्ध कराने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अवनीश यादव, आशीष कुमार, राहुल कुमार सिन्हा और अंकित सचान के रूप में हुई है।
जांच के अनुसार, गिरोह कथित तौर पर दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा में सहायक लेखक की व्यवस्था करने के प्रावधान का दुरुपयोग कर रहा था। इसी व्यवस्था की आड़ में अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान अनुचित मदद पहुंचाने का आरोप है।
चार आरोपी गिरफ्तार, कई सामान बरामद
STF ने कानपुर में कार्रवाई के दौरान चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से कथित तौर पर पांच मोबाइल फोन, चार आधार कार्ड, तीन पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और बैंक एटीएम कार्ड बरामद किए गए।
जांच टीम को एक आईपैड, वैगनआर कार, फर्जी दस्तावेज और ₹2,750 नकद भी मिला है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। STF यह पता लगाने में जुटी है कि इनका इस्तेमाल कथित परीक्षा फर्जीवाड़े में किस तरह किया गया।
फर्जी सहायक लेखकों के जरिए नकल कराने का आरोप
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित गिरोह दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों को निशाना बनाता था। ऐसे अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा में सहायक लेखक के तौर पर दूसरे लोगों की व्यवस्था की जाती थी और आरोप है कि वे परीक्षा के दौरान अनुचित तरीके से मदद करते थे।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अभ्यर्थियों और कथित गिरोह के बीच संपर्क कैसे स्थापित होता था, सहायक लेखकों की व्यवस्था कौन करता था और क्या इसी तरीके से अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी नकल कराई गई।
बरामद दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसी व्यक्ति की पहचान का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल या फर्जी दस्तावेजों का उपयोग सहायक लेखक के रूप में परीक्षा में शामिल होने के लिए किया गया था या नहीं।
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पूछताछ में दो अन्य नाम सामने आए
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान कथित गिरोह के सरगना मनीष कुमार मिश्रा और बिहार निवासी राजू गुप्ता के नाम सामने आने की जानकारी मिली है।
STF अब इन दोनों की चारों गिरफ्तार आरोपियों से कथित कड़ी की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह का नेटवर्क केवल कानपुर तक सीमित था या इसके तार दूसरे शहरों, अभ्यर्थियों और परीक्षा केंद्रों तक भी जुड़े हैं।
जांच में कथित तौर पर यह भी पता लगाया जाएगा कि अभ्यर्थियों से सहायक लेखक उपलब्ध कराने या परीक्षा में अनुचित मदद के बदले रकम ली जाती थी या नहीं।
BNS और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत केस
मामले में सचेंडी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
STF बरामद मोबाइल फोन और आईपैड की डिजिटल जांच कर रही है। इनमें मौजूद संदेश, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सामग्री से आरोपियों, अभ्यर्थियों और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बीच संपर्क की जानकारी मिलने की संभावना है।
पहचान पत्रों और फर्जी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है, ताकि उनके कथित इस्तेमाल और परीक्षा प्रक्रिया से संबंध को स्पष्ट किया जा सके।
बड़े नेटवर्क की तलाश में जांच जारी
STF अब इस कथित परीक्षा फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि गिरफ्तार आरोपी स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे या किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे।
जांच का फोकस कथित सरगना, परीक्षा में लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों, सहायक लेखकों की भूमिका और संभावित वित्तीय लेनदेन पर है। आगे की कार्रवाई बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों और आरोपियों से पूछताछ में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
