बरेली: खुद को IAS, SDM और ADM बताकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी करने वाली विप्रा शर्मा के खिलाफ दो और FIR दर्ज हुई हैं। दोनों मामलों में शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विप्रा ने सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा देकर लाखों रुपये लिए, लेकिन न तो नौकरी दिलाई और न ही पूरी रकम वापस की। पुलिस के मुताबिक, फर्जी अधिकारियों के रूप में लोगों को प्रभावित करने वाले इस कथित गिरोह के खिलाफ अब तक 43 मामले दर्ज हो चुके हैं।
पहला मामला प्रेमनगर के जाटवपुरा निवासी सनी सिंह की शिकायत पर दर्ज किया गया है। सनी सलेक्शन प्वाइंट चौराहे के पास एक फैशन स्टोर में सेल्समैन के तौर पर काम करते थे। इसी दौरान गोल्डन ग्रीन पार्क निवासी विप्रा शर्मा वहां खरीदारी के लिए आती थी। शिकायत के मुताबिक, बातचीत के दौरान विप्रा ने खुद को SDM बताया और सनी को तृतीय श्रेणी कर्मचारी या क्लर्क के पद पर सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया।
आरोप है कि विप्रा ने नौकरी लगवाने के लिए करीब ₹8 लाख खर्च होने की बात कही। उसके झांसे में आकर सनी ने 10 मार्च 2024 से 8 नवंबर 2025 के बीच करीब ₹1.75 लाख की रकम उसे दे दी। काफी समय बीतने के बाद भी जब नौकरी नहीं लगी तो सनी ने अपनी रकम वापस मांगी। आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय उन्हें लगातार टाला गया। बाद में सनी को जानकारी मिली कि विप्रा कथित ठगी के एक मामले में जेल जा चुकी है। इसके बाद उन्होंने बारादरी थाने में शिकायत दर्ज कराई।
दूसरा मामला कालीबाड़ी निवासी सुनील यादव की शिकायत पर सामने आया। सुनील के अनुसार, वर्ष 2022-23 के दौरान विप्रा एक युवक को कंप्यूटर सिखाने के लिए उनके पास आती थी। इसी दौरान उसने खुद को SDM बताया और दावा किया कि वह पहले एक युवक की सचिवालय में नौकरी लगवा चुकी है। इस दावे के बाद सुनील को अपने परिचितों की नौकरी लगवाने का भरोसा दिया गया।
शिकायत के मुताबिक, सुनील ने अपने भाई सुधीर यादव, जसवीर यादव और दोस्त अरुण की सरकारी नौकरी लगवाने के लिए कुल ₹6.5 लाख विप्रा को दिए। इसके बाद डाक के जरिए नियुक्तिपत्र भेजे जाने लगे। जब ज्वाइनिंग की तारीख करीब आती, तो कथित तौर पर नया नियुक्तिपत्र भेजकर प्रक्रिया आगे बढ़ने का भरोसा दिया जाता। लंबे समय तक नौकरी नहीं लगने पर सुनील को दस्तावेजों और पूरी प्रक्रिया पर संदेह हुआ।
सुनील ने जब रकम वापस करने का दबाव बनाया तो आरोप है कि विप्रा अलग-अलग जिलों में तैनाती होने की बात कहकर उन्हें टालती रही। शिकायत के अनुसार, दबाव बढ़ने पर उसने ₹2.25 लाख वापस किए, लेकिन शेष रकम नहीं लौटाई। बाद में विप्रा के कथित फर्जीवाड़े से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद सुनील ने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई।
अप्रैल में सामने आया था कथित फर्जी अफसर नेटवर्क
पुलिस ने 28 अप्रैल को फर्जी अफसर बनकर ठगी करने वाले कथित नेटवर्क का खुलासा किया था। कार्रवाई के दौरान विप्रा शर्मा, उसकी बहन शिखा और ममेरी बहन दीक्षा पाठक को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, गिरोह से जुड़े कुछ अन्य आरोपी, जिनमें विप्रा के पिता वीरेंद्र शर्मा भी शामिल हैं, अभी फरार बताए जा रहे हैं।
पुलिस का आरोप है कि विप्रा खुद को IAS अधिकारी बताती थी और लोगों के सामने SDM या ADM के तौर पर पेश होती थी। उसकी बहनें सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को कथित तौर पर भरोसे में लेकर गिरोह तक पहुंचाती थीं। इसके बाद नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने और फर्जी नियुक्तिपत्रों के जरिए पीड़ितों को लंबे समय तक भ्रम में रखने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, इस कथित गिरोह के खिलाफ बारादरी, कोतवाली, सुभाषनगर, किला और इज्जतनगर थानों में अब तक 43 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। नए मामलों के सामने आने के बाद पुलिस अब आरोपियों से जुड़े पुराने शिकायतकर्ताओं और कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को भी खंगाल रही है। दोनों नई FIR के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
