कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्कूल सेवा आयोग (SSC) के Group-C और Group-D कर्मचारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नई चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, उनकी कथित सहयोगी अर्पिता मुखर्जी और निष्कासित तृणमूल कांग्रेस नेता कुंतल घोष समेत अन्य आरोपियों को मामले में नामजद किया है। ED के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर अपात्र उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने, परीक्षा परिणामों में हेरफेर और रैंक में बदलाव जैसी गतिविधियां की गईं।
जांच एजेंसी ने यह पूरक अभियोजन शिकायत 20 अगस्त को कोलकाता की विशेष PMLA अदालत के समक्ष दाखिल की। इस मामले में ED ने इससे पहले जनवरी 2025 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस FIR पर आधारित है, जिसमें पश्चिम बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन (WBCSSC) के जरिए Group-C और Group-D कर्मचारियों की भर्ती में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
ED ने आरोप लगाया कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री के तौर पर पार्थ चटर्जी का WBCSSC और उससे जुड़े संस्थानों पर व्यापक प्रभाव था और उन्होंने अपने पद का कथित दुरुपयोग कर अवैध नियुक्तियों को प्रभावित करने में भूमिका निभाई। एजेंसी के अनुसार, अयोग्य उम्मीदवारों की सूची कथित तौर पर निर्देशों के आधार पर तैयार की जाती थी। इसके बाद इन सूचियों को कथित बिचौलिए प्रसन्न कुमार रॉय और उसके सहयोगियों तक पहुंचाया जाता था, जो उम्मीदवारों के लिए सिफारिश और नियुक्ति पत्र जारी कराने की व्यवस्था करते थे।
जांच में OMR आधारित परीक्षा परिणामों में कथित हेरफेर और योग्य उम्मीदवारों की रैंक को पीछे धकेलकर अपात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति दिलाने के आरोप भी सामने आए हैं। ED का दावा है कि विभिन्न पदों के लिए उम्मीदवारों से कथित तौर पर ₹10 लाख से ₹20 लाख तक की रकम मांगी जाती थी। Group-C पदों के लिए करीब ₹15-16 लाख और Group-D पदों के लिए ₹10-12 लाख तक वसूले जाने का आरोप है।
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एजेंसी ने मामले में अपराध से अर्जित रकम का अनुमान ₹630.40 करोड़ लगाया है। हालांकि, ED ने कहा कि यह रकम और अधिक हो सकती है, क्योंकि कथित भर्ती घोटाले में केवल एक तरीके से ही अनियमितता नहीं हुई। जांच में रैंक जंपिंग, पैनल से बाहर नियुक्तियां, पैनल की अवधि समाप्त होने के बाद नियुक्तियां और RTI तथा पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रियाओं के कथित दुरुपयोग जैसे पहलुओं की भी पड़ताल की गई है।
पार्थ चटर्जी, अर्पिता मुखर्जी और कुंतल घोष को ED ने जून में पश्चिम बंगाल सेंट्रल SSC Assistant Teachers भर्ती से जुड़े एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी आरोपी बनाया था। पार्थ चटर्जी को जुलाई 2022 में प्राथमिक शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक अलग मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दी और अप्रैल 2026 में उनकी रिहाई हुई।
इस मामले में अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने WBCSSC की भर्ती प्रक्रिया को धोखाधड़ी से प्रभावित माना था। अदालत ने 25,000 से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। ED के अनुसार, अदालत के फैसले में OMR अंकों में हेरफेर, रैंक जंपिंग और अवैध नियुक्तियों जैसी बड़े पैमाने की अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया था।
नई चार्जशीट के साथ ED ने मामले में कथित वित्तीय लेनदेन, भर्ती प्रक्रिया में भूमिका और अवैध नियुक्तियों से जुड़े नेटवर्क की जांच को आगे बढ़ाया है। एजेंसी अब कथित अपराध से अर्जित रकम के स्रोत, उसके इस्तेमाल और उससे जुड़े अन्य लाभार्थियों की कड़ियों को भी खंगाल रही है। मामले में आगे की सुनवाई विशेष PMLA अदालत में होगी।
