समापन नीलामी सत्र में कीमतों को प्रभावित करने का आरोप; कॉपथॉल मॉरीशस से ₹2.96 करोड़ और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग से ₹71.65 लाख जब्त करने का आदेश

नई प्रणाली ने पकड़ी सेंसेक्स में कथित सेंधमारी, दो कंपनियों पर सेबी की बड़ी कार्रवाई

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By Roopa
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नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शेयर बाजार के समापन नीलामी सत्र (Closing Auction Session) में सेंसेक्स की अंतिम कीमत को कथित तौर पर प्रभावित करने के मामले में दो कंपनियों के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई की है। नियामक ने जेपी मॉर्गन समूह से जुड़ी कॉपथॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड को बाजार में कारोबार करने से रोकते हुए क्रमश: ₹2.96 करोड़ और ₹71.65 लाख की रकम जब्त करने का आदेश दिया है।

सेबी के अंतरिम आदेश के अनुसार, मामला 13 अगस्त 2026 को सेंसेक्स से जुड़े साप्ताहिक वायदा सौदों की समाप्ति वाले दिन हुए कारोबार से जुड़ा है। उस दिन समापन नीलामी सत्र के दौरान सेंसेक्स की कीमत में कुछ असामान्य गतिविधियां दर्ज की गईं। नियामक की शुरुआती जांच में बाजार के नीचे की ओर बढ़ने के बीच महज 2 से 28 सेकंड के अंतराल में तीन तेज उछाल देखे गए।

सामान्य स्तर से करीब 240 अंक ऊपर बंद हुआ सेंसेक्स

सेबी के आकलन के मुताबिक, समापन नीलामी सत्र खत्म होने पर सेंसेक्स 78,080 के स्तर पर बंद हुआ। नियामक का अनुमान है कि सामान्य परिस्थितियों में सूचकांक का अंतिम स्तर इससे करीब 240 अंक नीचे रह सकता था। इसी असामान्य गतिविधि ने सेबी को संदेह पैदा किया कि कुछ बड़े ऑर्डरों के जरिए बाजार की अंतिम कीमत को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

नियामक ने दोनों कंपनियों के कारोबार और उनके डेरिवेटिव पोजीशन की जांच की। सेबी के मुताबिक, कंपनियों के पास उस दिन सेंसेक्स से जुड़े वायदा सौदे थे और अंतिम कीमत में बदलाव का उनके वित्तीय हितों पर सीधा असर पड़ सकता था।

कॉपथॉल पर बड़े खरीद ऑर्डर लगाकर कीमत बढ़ाने का आरोप

सेबी के अनुसार, सेंसेक्स में तेजी के दौरान कॉपथॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड की ओर से असामान्य रूप से बड़े खरीद ऑर्डर लगाए गए। एक दो सेकंड की अवधि में बाजार में रखे गए कुल खरीद ऑर्डरों में कंपनी की हिस्सेदारी 99.91% तक पहुंच गई।

नियामक का आरोप है कि इन ऑर्डरों का उद्देश्य वास्तविक रूप से शेयर खरीदना नहीं था। सेंसेक्स का स्तर ऊपर जाने के बाद कंपनी ने अपने बड़े ऑर्डरों का महत्वपूर्ण हिस्सा रद्द कर दिया। सेबी ने शुरुआती स्तर पर इसे ऐसी गतिविधि के तौर पर देखा है, जिसका संभावित उद्देश्य अंतिम कीमत को कृत्रिम रूप से प्रभावित करना था।

आदेश में कहा गया है कि खरीद ऑर्डरों और उनके बाद हुए रद्दीकरण के समय का विश्लेषण इस मामले में महत्वपूर्ण है। नियामक अब यह देख रहा है कि इन गतिविधियों से कंपनी की डेरिवेटिव पोजीशन को किस तरह आर्थिक लाभ मिला।

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मानसी शेयर पर आठ शेयरों में भारी बिकवाली का आरोप

दूसरी ओर, मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड पर सेंसेक्स में शामिल आठ शेयरों में संदर्भ कीमत से काफी नीचे भारी बिकवाली के ऑर्डर लगाने का आरोप है। सेबी के मुताबिक, इन ऑर्डरों का असर संबंधित शेयरों की कीमतों और इसके परिणामस्वरूप सेंसेक्स के स्तर पर पड़ सकता था।

नियामक का आरोप है कि दोनों कंपनियों की गतिविधियों को उनके संबंधित डेरिवेटिव सौदों के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है। यदि अंतिम कीमत को प्रभावित करके वायदा पोजीशन से लाभ हासिल किया गया, तो यह बाजार की निष्पक्षता और पारदर्शिता के खिलाफ माना जा सकता है।

सेबी की नई निगरानी व्यवस्था से सामने आया मामला

इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि असामान्य मूल्य गतिविधियों की पहचान समापन नीलामी सत्र की निगरानी के दौरान हुई। अंतिम कुछ सेकंड में बड़े ऑर्डर, कीमत में अचानक बदलाव और ऑर्डर रद्द होने के पैटर्न जैसे संकेत नियामक की जांच के केंद्र में हैं।

सेबी ने फिलहाल इसे अंतरिम आदेश के रूप में जारी किया है। आदेश में सामने आए आरोपों और निष्कर्षों पर संबंधित पक्षों को आगे अपनी स्थिति रखने का अवसर मिलेगा। अंतिम कार्रवाई जांच और नियामकीय प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगी।

मामला यह भी दिखाता है कि बाजार नियामक अब केवल बड़े लेनदेन पर ही नहीं, बल्कि ट्रेडिंग के समय, ऑर्डर के आकार, कीमत और ऑर्डर रद्द करने के पैटर्न को जोड़कर संभावित हेरफेर की पहचान कर रहा है। खासतौर पर डेरिवेटिव सौदों की समाप्ति वाले दिनों में अंतिम कीमतों में मामूली बदलाव भी बड़े वित्तीय लाभ या नुकसान का कारण बन सकता है।

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