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बिना OTP, लिंक या ऐप के महिला के खाते से ₹50 हजार गायब, मीरगंज में साइबर ठगी का मामला दर्ज

Roopa
By Roopa
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मीरगंज: बरेली जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला के बैंक खाते से कथित तौर पर बिना OTP साझा किए और किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किए ₹50 हजार निकाल लिए गए। दियोरिया अब्दुल्लागंज गांव की रहने वाली महिला के खाते से दो दिनों में अलग-अलग छोटे लेनदेन के जरिए रकम निकाले जाने की शिकायत पुलिस से की गई है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गांव निवासी शंभू खां ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी पत्नी अन्नो बेगम का बैंक खाता रामपुर जिले में HDFC Bank की मिल शाखा में है। शिकायत के मुताबिक, 21 जुलाई को खाते से ₹25 हजार और 23 जुलाई को दोबारा ₹25 हजार निकाल लिए गए। इस तरह दो दिनों के भीतर खाते से कुल ₹50 हजार की रकम गायब हो गई।

छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन में निकाली रकम

शिकायतकर्ता के मुताबिक, खाते से पूरी रकम एक ही बार में नहीं निकाली गई, बल्कि कई छोटे ट्रांजैक्शन के माध्यम से निकासी की गई। परिवार को जब खाते से रकम निकलने की जानकारी हुई तो उन्होंने बैंक लेनदेन की जांच की और इसके बाद पुलिस से शिकायत की।

परिवार ने पुलिस को बताया कि उन्होंने या उनकी पत्नी ने किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP साझा नहीं किया था। इसके अलावा किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, अनजान ऐप डाउनलोड करने या बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को देने से भी इनकार किया गया है।

यही वजह है कि खाते से रकम निकलने का तरीका जांच का अहम हिस्सा बन गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिना OTP या संदिग्ध लिंक के जरिए बताए गए तरीके के बावजूद खाते से रकम किस माध्यम से निकाली गई।

बैंक रिकॉर्ड से खुलेगा रकम निकासी का तरीका

पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। अब जांचकर्ताओं की नजर बैंक खाते से जुड़े तकनीकी और वित्तीय रिकॉर्ड पर है। पुलिस बैंक से संबंधित ट्रांजैक्शन का विस्तृत विवरण, निकासी का माध्यम और रकम जिन खातों या माध्यमों तक पहुंची, उसकी जानकारी जुटा रही है।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि रकम ATM, कार्ड, बैंकिंग सेवा, किसी डिजिटल भुगतान माध्यम या किसी अन्य तरीके से निकाली गई थी। यदि लेनदेन किसी दूसरे बैंक खाते या डिजिटल माध्यम तक पहुंचा है तो उसके आधार पर संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश की जाएगी।

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बिना OTP ठगी की शिकायत में तकनीकी जांच अहम

साइबर अपराध विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी खाते से अनधिकृत रकम निकलने के हर मामले में केवल OTP साझा किए जाने को ही संभावित कारण मानना सही नहीं है। लेनदेन का तरीका, खाते की सुरक्षा, कार्ड या बैंकिंग क्रेडेंशियल के इस्तेमाल और रकम के अंतिम गंतव्य की जांच से घटना की वास्तविक तकनीकी प्रक्रिया सामने आ सकती है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, ऐसे मामलों में पीड़ित के डिवाइस, बैंकिंग लेनदेन, लॉगिन गतिविधियों और रकम के ट्रेल की तकनीकी जांच जरूरी होती है। उनके अनुसार, यदि पीड़ित ने OTP या लिंक का इस्तेमाल नहीं किया है तो जांच को इस बात पर केंद्रित करना चाहिए कि अनधिकृत लेनदेन किस माध्यम से अधिकृत हुआ और उसके पीछे कौन-सी डिजिटल या बैंकिंग कड़ी मौजूद थी।

पुलिस खंगाल रही रकम का पूरा ट्रेल

जांचकर्ताओं के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि ₹50 हजार की रकम आखिर किस खाते, व्यक्ति या माध्यम तक पहुंची। बैंकिंग रिकॉर्ड और तकनीकी सुरागों के आधार पर पुलिस संभावित साइबर ठगों तक पहुंचने की कोशिश करेगी।

फिलहाल मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि बैंक से प्राप्त रिकॉर्ड और तकनीकी जांच के बाद ही घटना में इस्तेमाल किए गए तरीके और आरोपियों की पहचान स्पष्ट हो सकेगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि बैंक खाते से अनधिकृत रकम निकलने के मामलों में लेनदेन के तकनीकी तरीके और पूरे वित्तीय ट्रेल की जांच कितनी महत्वपूर्ण है।

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