उदयपुर: राजस्थान के उदयपुर में कृषि भूमि पर कब्जा करने और उसे फर्जी तरीके से बेचने की कथित साजिश का खुलासा हुआ है। सविना थाना पुलिस ने मामले में फरार चल रहे दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने जमीन के वास्तविक खातेदार की जगह डमी व्यक्ति खड़ा कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और कथित तौर पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए कृषि भूमि की बिक्री आगे बढ़ाने की कोशिश की। इस मामले में अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवल निवासी धनराज बैरवा और माछला मगरा निवासी यशवंत सिंह शक्तावत उर्फ सोनू के रूप में हुई है। दोनों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन के दस्तावेजों में कथित हेरफेर की योजना किसने बनाई और इसमें आरोपियों के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे।
दो कृषि भूखंडों को निशाना बनाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता मिथालाल वैष्णव ने सविना थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि डाकन कोटड़ा क्षेत्र में उनके दो कृषि भूखंड हैं। आरोप है कि कुछ लोगों ने इन जमीनों पर कब्जा करने और उन्हें हड़पने की नीयत से फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
शिकायत के बाद पुलिस ने जमीन से जुड़े दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और कथित लेनदेन की जांच शुरू की। जांच में आरोप है कि जमीन के वास्तविक खातेदार की जगह एक डमी व्यक्ति को खड़ा किया गया। इसके बाद उसके नाम से संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए और फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन की बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की गई।
डमी खातेदार के जरिए असली मालिक को हटाने की कोशिश
पुलिस को आशंका है कि कथित साजिश का उद्देश्य दस्तावेजों में जमीन के वास्तविक मालिक की जगह दूसरे व्यक्ति को खातेदार के रूप में पेश करना था। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन को वैध तरीके से बेचने या उसके हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जानी थी।
जांच में पावर ऑफ अटॉर्नी की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, उनमें किन लोगों ने मदद की और जमीन की बिक्री के लिए किसी खरीदार या बिचौलिए से संपर्क किया गया था या नहीं।
तकनीकी सुरागों से फरार आरोपियों तक पहुंची पुलिस
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी संसाधनों के साथ मुखबिर तंत्र की भी मदद ली। आरोपियों की गतिविधियों और संभावित ठिकानों से जुड़े सुराग जुटाए गए। इसके बाद धनराज बैरवा और यशवंत सिंह शक्तावत को गिरफ्तार किया गया।
इससे पहले इसी मामले में अनिल शर्मा, सिकंदर परमार और मनीष खराड़ी को गिरफ्तार किया जा चुका है। नए आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब सभी आरोपियों की भूमिका को जोड़कर कथित साजिश की पूरी कड़ी समझने में जुटी है।
जमीन के रिकॉर्ड से लेकर पूरे नेटवर्क की जांच
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए किन रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया और जमीन से संबंधित राजस्व प्रक्रिया में किसी स्तर पर गलत जानकारी पेश की गई थी या नहीं। दस्तावेजों की जांच के साथ आरोपियों के आपसी संपर्कों और संभावित लाभार्थियों का भी पता लगाया जा रहा है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि मामले में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, दस्तावेज तैयार कराने वालों और जमीन की बिक्री से जुड़े संभावित संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
अन्य जमीनों पर भी हो सकती है जांच
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या कथित फर्जीवाड़े का तरीका केवल शिकायतकर्ता की दो कृषि भूमि तक सीमित था या इसी तरह अन्य संपत्तियों को भी निशाना बनाया गया। पुलिस आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड और जमीन से जुड़े अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
फिलहाल गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह सत्यापित कर रही है कि कथित फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेजों के आधार पर जमीन की बिक्री या हस्तांतरण की कोई औपचारिक प्रक्रिया पूरी हुई थी या नहीं। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
