ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. माहरूख मिर्जा की शिकायत पर FIR; दो फ्लैटों की डील के बाद ₹94.30 लाख और कथित तौर पर ₹1.17 करोड़ का अतिरिक्त होम लोन

फ्लैट दिलाने के नाम पर पूर्व कुलपति से ₹2.11 करोड़ की ठगी का आरोप, पांच बैंकों से भी कराया लोन

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By Roopa
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लखनऊ: ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. माहरूख मिर्जा ने फ्लैट खरीदने के नाम पर ₹2.11 करोड़ की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। उनकी शिकायत पर कैसरबाग पुलिस ने श्री बालाजी कंस्ट्रक्शन की यूनिट न्यू कॉन बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशक नटवर गोयल, उनके बेटे हिमांशु गोयल और पांच बैंकों से जुड़े लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि फ्लैट खरीदने के लिए शुरू हुई प्रक्रिया के दौरान उनके नाम पर पहले ₹94.30 लाख का लोन कराया गया और बाद में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों से ₹1.17 करोड़ का अतिरिक्त होम लोन भी करा लिया गया।

प्रो. माहरूख मिर्जा के मुताबिक, वर्ष 2023 में उन्हें लखनऊ में फ्लैट खरीदना था। इसी दौरान उनका संपर्क न्यू कॉन बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक नटवर गोयल और उनके बेटे हिमांशु से हुआ। आरोप है कि दोनों ने उन्हें कैसरबाग के लालबाग स्थित सिने ग्रैंड अपार्टमेंट में फ्लैट संख्या 103 और 104 दिखाए। बातचीत के बाद एक फ्लैट की कीमत ₹52.50 लाख और दूसरे की कीमत ₹55 लाख तय की गई।

शिकायत के अनुसार, फ्लैट खरीदने की प्रक्रिया के दौरान आरोपियों ने 14 दिसंबर 2023 को प्रो. मिर्जा के नाम पर ₹94.30 लाख का लोन कराया। आरोप है कि लोन की रकम मिलने के बाद इसे हड़प लिया गया, जबकि दोनों फ्लैटों की बिक्री पूरी नहीं की गई। पूर्व कुलपति का दावा है कि उन्हें न तो संबंधित संपत्ति का वैध कब्जा मिला और न ही लोन की रकम के संबंध में संतोषजनक जानकारी दी गई।

मामला यहीं नहीं रुका। प्रो. मिर्जा ने आरोप लगाया कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पांच अलग-अलग बैंकों से अतिरिक्त ₹1.17 करोड़ का होम लोन भी स्वीकृत कराया गया। शिकायत में आरोप है कि इस प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और बैंक से जुड़े कुछ अधिकारियों की मिलीभगत रही। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन ऋणों के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जमा किए गए और उनकी सत्यता का सत्यापन किस स्तर पर हुआ।

पूर्व कुलपति को इस कथित वित्तीय अनियमितता की जानकारी तब हुई जब बैंकों की ओर से उन्हें नोटिस मिलने शुरू हुए। शिकायत के मुताबिक, 8 जून 2025 को उन्हें बैंकों से नोटिस प्राप्त हुए। इसके कुछ दिन बाद 13 जून को उनके फ्लैट पर बैंकों की ओर से कानूनी कार्रवाई से संबंधित नोटिस चस्पा कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जानकारी जुटाई और पुलिस से शिकायत की।

शिकायत में कुल कथित नुकसान ₹2.11 करोड़ बताया गया है। पुलिस अब बैंक खातों, लोन आवेदन, संपत्ति के दस्तावेज, हस्ताक्षरों और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि पूर्व कुलपति के नाम पर अलग-अलग बैंकों से ऋण लेने की प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई और लोन की रकम आखिर किन खातों में पहुंची।

मामले में पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद प्राथमिकी दर्ज की है। कैसरबाग पुलिस के मुताबिक, नटवर गोयल, हिमांशु गोयल और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ दर्ज मामले की विवेचना की जा रही है। पुलिस बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर सकती है, यदि जांच के दौरान उनकी संलिप्तता के साक्ष्य सामने आते हैं।

हालांकि, कंपनी ने पूर्व कुलपति के आरोपों को खारिज किया है। न्यू कॉन बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड के जीएम सेल्स आर.के. श्रीवास्तव ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि प्रो. मिर्जा ने फ्लैट खरीदने के बाद एक एफिडेविट पर हस्ताक्षर किए थे और कंपनी ने उनके साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं की। कंपनी का पक्ष पुलिस जांच में भी महत्वपूर्ण रहेगा।

अब पुलिस दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि ₹2.11 करोड़ की कथित वित्तीय गड़बड़ी कैसे हुई। जांच में लोन आवेदन, संपत्ति के कागजात, बैंक लेनदेन और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

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