धनबाद: रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को ठगने वाले एक कथित रैकेट का खुलासा हुआ है। आसनसोल-गया मेमू ट्रेन में टिकट जांच के दौरान धनबाद टिकट चेकिंग स्क्वायड ने 17 वर्षीय एक युवती को फर्जी महिला टिकट चेकिंग स्टाफ के रूप में पकड़ा। युवती रेलवे की आधिकारिक ड्रेस पहने हुए थी और उसके गले में आईडी कार्ड भी लगा था। हालांकि, पूछताछ में उसके रेलवे कर्मचारी नहीं होने की पुष्टि हुई। मामले की जानकारी सामने आने के बाद रेल पुलिस अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी है।
घटना उस समय सामने आई, जब धनबाद की महिला टिकट चेकिंग स्क्वायड आसनसोल से जांच करते हुए ट्रेन से वापस धनबाद लौट रही थी। इसी दौरान स्क्वायड की प्रभारी नूतन माला कुजूर और अन्य महिला टिकट जांच कर्मियों को युवती की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। टीम ने उससे पूछताछ शुरू की तो उसके पास मौजूद पहचान पत्र और रेलवे की वर्दी को लेकर कई सवाल खड़े हुए। इसके बाद मामले की जानकारी कॉमर्शियल कंट्रोल को दी गई। आरपीएफ की मौजूदगी में युवती को धनबाद स्टेशन पर ट्रेन से उतार लिया गया और आगे पूछताछ की गई।
जांच के दौरान युवती के पास मिला आईडी कार्ड प्रथम दृष्टया फर्जी पाया गया। कार्ड पर वरीय कार्मिक अधिकारी के नाम की मुहर लगी थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि कार्ड किस कार्यालय या संस्था की ओर से जारी किया गया है। युवती के पास टिकट जांच से संबंधित किसी वास्तविक रेलवे नियुक्ति दस्तावेज के होने की भी जानकारी नहीं मिली। खास बात यह रही कि वह यात्रियों से टिकट के नाम पर पैसे नहीं ले रही थी, बल्कि केवल टिकटों की जांच कर रही थी। इससे शुरुआती तौर पर यह सामने आया कि उसे संभवतः वास्तविक रेलवे स्टाफ जैसी भूमिका निभाने की ट्रेनिंग दी गई थी।
पूछताछ में युवती ने कथित रैकेट के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उसने बताया कि वह बांकुड़ा की रहने वाली है और उसके परिवार में उसकी मां हैं। युवती के अनुसार, सियालदह में सक्रिय एक रैकेट ने उसे और सात अन्य लड़कियों को रेलवे में टिकट चेकिंग स्टाफ के रूप में काम करने का झांसा दिया। आरोप है कि इन सभी लड़कियों के लिए टिकट चेकिंग स्टाफ जैसी ड्रेस तैयार कराई गई और फर्जी आईडी कार्ड उपलब्ध कराए गए। इसके बाद उन्हें अलग-अलग ट्रेनों में टिकट जांच के लिए भेजा जाने लगा।
युवती ने पूछताछ में अमित नाम के एक युवक का भी उल्लेख किया। उसके मुताबिक अमित सियालदह में एक इंस्टीट्यूट चलाता है और उसी ने उसे ट्रेन में टिकट जांच के लिए भेजा था। उसे बताया गया था कि ट्रेन में टिकट जांच करना उसकी ट्रेनिंग का हिस्सा है। युवती के अनुसार, इसी साल फरवरी में अमित और उसके साथियों ने आठ लड़कियों से रजिस्ट्रेशन के नाम पर एक-एक हजार रुपये लिए थे। इसके बाद ट्रेनिंग के नाम पर प्रत्येक लड़की से सात से आठ हजार रुपये तक वसूले गए।
इतना ही नहीं, कथित प्रशिक्षण के दौरान हर महीने लड़कियों से 2,300 रुपये अलग से लिए जाते थे। युवती ने बताया कि सियालदह में उन्हें रेलवे टिकट चेकिंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता था। इसके बाद 29 जून को उनकी कथित तौर पर परीक्षा भी कराई गई। इस पूरी प्रक्रिया को इस तरह तैयार किया गया था कि लड़कियों को विश्वास हो सके कि वे वास्तव में रेलवे में नौकरी पाने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
रेल पुलिस अब युवती से मिली जानकारी का सत्यापन कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि रैकेट में अमित के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं, फर्जी आईडी कार्ड और रेलवे की ड्रेस कहां से तैयार कराई गई तथा आठों युवतियों को किन-किन ट्रेनों में भेजा गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने लोगों से नौकरी के नाम पर रकम वसूली है।
फिलहाल मामले में किसी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत नहीं मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में रेल पुलिस युवती के परिजनों को बुलाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे बांड पर छोड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, उसके बयान से सामने आए कथित रैकेट ने रेलवे में नौकरी के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की जांच से ही स्पष्ट होगा कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके पीछे कितने लोग शामिल हैं।
