केरल हाईकोर्ट ने ₹15.85 करोड़ के SNDP माइक्रोफाइनेंस मामले में अभियोजन स्वीकृति को लेकर राज्य सरकार और अभियोजन पक्ष के अलग-अलग रुख पर सवाल उठाए हैं।

राजस्थान एंबुलेंस घोटाला: केरल हाईकोर्ट ने BJP नेता किरीट सोमैया पर ₹5 लाख मुआवजे का आदेश रद्द किया

Roopa
By Roopa
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कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने राजस्थान एंबुलेंस घोटाले से जुड़े मानहानि मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता किरीट सोमैया के खिलाफ ₹5 लाख मुआवजे के आदेश को रद्द कर दिया है। यह मामला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री वायलार रवि के बेटे रवि कृष्ण की ओर से दायर मानहानि मुकदमे से जुड़ा था। रवि कृष्ण ने आरोप लगाया था कि सोमैया ने उनकी कंपनी जिकित्जा हेल्थकेयर के खिलाफ राजस्थान में एंबुलेंस सेवा का ठेका कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से हासिल करने और राजनीतिक प्रभाव का लाभ उठाने के आरोप लगाए थे।

जस्टिस सतीश निनान और पी. कृष्ण कुमार की खंडपीठ ने कहा कि एर्नाकुलम की अतिरिक्त उप अदालत ने यह निष्कर्ष निकालने में गलती की कि सोमैया ने रवि कृष्ण की मानहानि की है। हाईकोर्ट ने माना कि निचली अदालत को इस पहलू पर पर्याप्त रूप से विचार करना चाहिए था कि सोमैया द्वारा लगाए गए आरोपों को बाद में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट से समर्थन मिला था। इसके अलावा, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था।

खंडपीठ ने निचली अदालत को मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है। इसके लिए दोनों पक्षों को पर्याप्त अवसर देकर उनकी दलीलें सुनने को कहा गया है। हाईकोर्ट के फैसले से मानहानि विवाद में सार्वजनिक हित, उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और राजनीतिक नेताओं द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की प्रकृति पर भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं।

रवि कृष्ण ने अपनी याचिका में दावा किया था कि सोमैया ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में उनकी कंपनी जिकित्जा हेल्थकेयर पर राजस्थान सरकार से एंबुलेंस सेवा का ठेका कथित तौर पर अवैध तरीके से हासिल करने का आरोप लगाया था। उनके अनुसार, यह ठेका उनके पिता वायलार रवि के राजनीतिक प्रभाव का फायदा उठाकर हासिल किया गया था। रवि कृष्ण ने इन आरोपों को गलत बताया और कहा कि उनकी कंपनी ने कानूनी प्रक्रिया के तहत ठेका हासिल किया था।

रवि कृष्ण ने मानहानि के लिए ₹1 करोड़ के मुआवजे की मांग की थी। साथ ही उन्होंने अदालत से सोमैया को भविष्य में उनके खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक बयान प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि, निचली अदालत ने मामले में ₹5 लाख मुआवजे का आदेश दिया था, जिसे अब हाईकोर्ट ने फिलहाल रद्द कर दिया है।

सोमैया की ओर से दलील दी गई थी कि उन्होंने उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर वही बातें सामने रखी थीं, जिन्हें वे सही मानते थे। उनका कहना था कि लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में रहने के दौरान उन्होंने यह मुद्दा जनहित में उठाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाद की जांच और सरकारी कार्रवाई से उनके आरोपों को आधार मिला।

मामले में CBI ने राजस्थान में एंबुलेंस सेवा के ठेके को लेकर कथित अनियमितताओं की जांच की थी। एजेंसी के अनुसार, जिकित्जा हेल्थकेयर के पक्ष में टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए तकनीकी शर्तों में कथित तौर पर बदलाव किए गए थे। जांच में परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान कथित अनियमितताओं, कंपनी की ओर से अधिक राशि के बिल पेश किए जाने और आरोपित व्यक्तियों को कथित भुगतान से जुड़े पहलुओं की भी जांच की गई।

CBI ने जिकित्जा हेल्थकेयर के निदेशकों के साथ राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री, तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री और राजस्थान के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तत्कालीन निदेशक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था। एजेंसी की कार्रवाई CAG की रिपोर्ट के बाद सामने आई थी। कंपनी को राजस्थान के अलावा केरल, पंजाब और बिहार में भी एंबुलेंस सेवाएं उपलब्ध कराने के ठेके मिले थे।

हाईकोर्ट ने इसी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए कहा कि निचली अदालत को यह जांचना चाहिए था कि सोमैया के आरोप पूरी तरह निराधार थे या उपलब्ध रिकॉर्ड और बाद की जांच से उन्हें किसी हद तक समर्थन मिला था। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि सोमैया BJP नेता और पूर्व सांसद के रूप में सार्वजनिक नीति से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रख रहे हो सकते हैं।

अब निचली अदालत को दोनों पक्षों को सुनकर मामले पर नए सिरे से विचार करना होगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ₹5 लाख के मुआवजे का पूर्व आदेश प्रभावी नहीं रहेगा, जबकि मूल मानहानि विवाद पर अंतिम फैसला निचली अदालत की आगे की सुनवाई और मूल्यांकन के बाद ही सामने आएगा।

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