वाराणसी में SIB की जांच में भागीरथी कंस्ट्रक्शन से जुड़ी ₹4.25 करोड़ की कथित GST चोरी और ₹2.88 करोड़ की बोगस ITC का मामला सामने आया है।

₹100 करोड़ से अधिक के GST फर्जीवाड़े का पर्दाफाश, सरगना समेत पांच गिरफ्तार; नेपाल में छिपा था एक आरोपी

Roopa
By Roopa
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बरेली: फर्जी फर्मों के जरिए ₹100 करोड़ से अधिक के कथित GST फर्जीवाड़े और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में सागर अग्रवाल, फुरकान हाशमी, विनीत अरोड़ा, अनुज अग्रवाल और शिवम उर्फ लाला शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि गिरोह फर्जी कंपनियां खड़ी कर उनके नाम पर बिल तैयार करता था और बिना वास्तविक कारोबार के रकम का लेनदेन दिखाकर बोगस ITC का दावा करता था।

मामले की जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपियों से जुड़े विभिन्न फर्मों और बैंक खातों के माध्यम से अब तक ₹100 करोड़ से अधिक का संदिग्ध वित्तीय लेनदेन किया गया। पुलिस के अनुसार, गिरोह में शामिल छह अन्य लोगों के नाम भी पूछताछ के दौरान सामने आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

मामला पिछले वर्ष सामने आया था, जब GST अधिकारियों की शिकायत पर बरेली के किला थाने में फर्जी फर्मों के माध्यम से कर चोरी का मुकदमा दर्ज किया गया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने पहले सद्दाम हुसैन और मोहम्मद समद उर्फ शाहरुख को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच में गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका सामने आती गई।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि किला क्षेत्र के बड़ा बाजार निवासी फुरकान हाशमी घटना के बाद नेपाल भाग गया था। आरोप है कि वह वहां अपनी पहचान छिपाकर संदीप नाम से रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, नेपाल में रहते हुए भी वह अपने साथियों के संपर्क में था और एक मैसेजिंग एप के माध्यम से कथित फर्जी इनवॉइस तैयार करने के काम में शामिल रहा।

पूछताछ में फुरकान ने कथित तौर पर गिरोह के संचालन से जुड़े कई अहम खुलासे किए। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने सागर अग्रवाल को मुख्य सरगना के रूप में चिन्हित किया। आरोप है कि सागर फर्जी फर्में उपलब्ध कराने और वास्तविक कंपनियों के बीच बोगस ITC ट्रांसफर कराने की व्यवस्था में मुख्य भूमिका निभाता था।

जांच में सामने आया कि फुरकान के अनुसार विनीत अरोड़ा, अनुज अग्रवाल और शिवम उर्फ लाला के साथ मिलकर डीएम कंपाउंड के सामने एक कार्यालय संचालित किया जाता था। कथित तौर पर इसी जगह से फर्जी फर्मों की चेन और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन को संचालित किया जाता था। पुलिस ने बाद में सागर, विनीत, अनुज और शिवम को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में फर्जी फर्म तैयार करने का तरीका भी सामने आया। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ऐसे लोगों की तलाश करता था जिनके नाम और पते पर कंपनियां या फर्में खोली जा सकें। इसके बदले उन्हें रकम दी जाती थी। फुरकान ने कथित तौर पर बताया कि विनीत अरोड़ा ने उसे फर्जी फर्म बनाने की सलाह दी और इसके लिए ₹50 हजार दिए। इसके बाद उसके घर के पते पर एफएस ट्रेडर्स नाम से फर्म खुलवाई गई।

आरोप है कि इन फर्मों का इस्तेमाल बिना वास्तविक कारोबार के बिल तैयार करने, रकम को अलग-अलग खातों में घुमाने और फर्जी तरीके से GST तथा ITC का लाभ लेने के लिए किया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए कितनी फर्जी फर्में बनाई गईं और किन वास्तविक कंपनियों के साथ कथित बोगस लेनदेन किया गया।

जांच में आरोपियों की कथित भूमिकाएं भी सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, विनीत अरोड़ा को नकद रकम के सेटलमेंट की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि अनुज अग्रवाल कथित तौर पर बोगस फर्मों के GST रिटर्न दाखिल करने का काम करता था। वहीं शिवम उर्फ लाला पर रकम को अलग-अलग माध्यमों से घुमाने और कथित तौर पर हवाला के जरिए लाभार्थी फर्मों तथा सागर अग्रवाल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होने का आरोप है।

पुलिस के मुताबिक, गिरोह से जुड़े सैय्यद सैफ, शाजिज, आसिफ, तौसिफ, फिरोज और फम्मी उर्फ फराज अभी फरार हैं। उनकी भूमिका और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है। पुलिस टीम इन आरोपियों की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर दबिश दे रही है।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, चार्जर, माउस और छह मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इन उपकरणों की जांच से फर्जी फर्मों, इनवॉइस, बैंक खातों और कथित ITC लेनदेन से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य मिलने की उम्मीद है।

पुलिस अब ₹100 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन की पूरी वित्तीय कड़ी खंगाल रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि फर्जी फर्मों के जरिए कितनी राशि का ITC लिया गया, पैसा किन खातों में पहुंचा और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लाभार्थी कौन हैं। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

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