मळवीवाड़ी की सरकारी जमीन को वर्ग-2 से वर्ग-1 कराने के लिए अपर जिलाधिकारी के नाम से कथित फर्जी आदेश तैयार करने का आरोप; मुगळी के तातोबा भिकाजी गावड़ा पर केस, आरटीआई से सामने आया मामला

फर्जी आदेश, नकली मुहर और डिजिटल सिग्नेचर… 12 एकड़ सरकारी जमीन ₹29 लाख में बेचने का आरोप

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By Roopa
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चंदगढ़: कोल्हापुर जिले के चंदगढ़ तहसील क्षेत्र में सरकारी जमीन से जुड़ा कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि जिलाधिकारी कार्यालय की नकली मुहर और डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर अपर जिलाधिकारी के नाम से फर्जी आदेश तैयार किया गया। इस आदेश को चंदगढ़ तहसील कार्यालय में वास्तविक सरकारी दस्तावेज के तौर पर पेश कर मळवीवाड़ी गांव की करीब 12 एकड़ सरकारी जमीन को वर्ग-2 से वर्ग-1 में बदलवाने का आरोप है। इसके बाद जमीन को निजी नामों पर दर्ज कराकर करीब ₹29 लाख में बेच दिया गया। मामले में मुगळी निवासी तातोबा भिकाजी गावड़ा के खिलाफ चंदगढ़ थाने में केस दर्ज किया गया है।

शिकायत प्रभारी नायब तहसीलदार शशिकांत बापुसाहेब किल्लेदार ने दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक, कथित फर्जीवाड़े का सिलसिला करीब 10 महीने से चल रहा था। मळवीवाड़ी गांव के गट नंबर 230 की जमीन सरकारी स्वामित्व वाली है। आरोप है कि तातोबा गावड़ा ने जिलाधिकारी कार्यालय की कथित नकली मुहर और डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल करते हुए अपर जिलाधिकारी के नाम से एक आदेश तैयार किया।

तहसील कार्यालय में पेश किया गया कथित फर्जी आदेश

आरोप के अनुसार, तैयार किए गए आदेश को वास्तविक सरकारी आदेश बताकर चंदगढ़ तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किया गया। इसी दस्तावेज के आधार पर सरकारी जमीन की श्रेणी वर्ग-2 से बदलकर वर्ग-1 कर दी गई। श्रेणी परिवर्तन के बाद जमीन को निजी नामों पर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। जांच में सामने आया कि जमीन विलास गणपती पाटील, अरुण गणपती पाटील, नारायण गणपती पाटील और परशराम गणपती पाटील, सभी तुडये निवासी, के नाम दर्ज की गई।

इसके बाद कथित तौर पर 12 एकड़ सरकारी जमीन को पंजीकृत बिक्री विलेख के जरिए ₹29 लाख में किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दिया गया। शिकायत में आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य की बताई जा रही सरकारी जमीन को कथित दस्तावेजी हेरफेर के जरिए निजी नामों पर कराने के बाद बिक्री की गई। इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी मुहर, डिजिटल हस्ताक्षर और राजस्व रिकॉर्ड के कथित दुरुपयोग की भूमिका की जांच की जा रही है।

आरटीआई से सामने आई गड़बड़ी

मामला सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों से सामने आया। आरटीआई के जरिए हासिल रिकॉर्ड की जांच के दौरान जमीन के स्वामित्व, उसकी श्रेणी में बदलाव और कथित आदेश से संबंधित दस्तावेजों में विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की।

मामले का संज्ञान लेने के बाद प्रांताधिकारी एकनाथ काळबांडे ने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासन की शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर चंदगढ़ पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब फर्जी आदेश तैयार करने से लेकर जमीन की श्रेणी बदलने और बाद में उसकी बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।

डिजिटल हस्ताक्षर और राजस्व रिकॉर्ड की जांच

जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जिलाधिकारी कार्यालय की मुहर और डिजिटल हस्ताक्षर की कथित नकल कैसे तैयार की गई। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि कथित फर्जी आदेश तहसील कार्यालय में किस प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया गया और उसके आधार पर सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव कैसे हुआ।

जमीन को वर्ग-2 से वर्ग-1 में बदलने के बाद चार लोगों के नाम दर्ज किए जाने और फिर पंजीकृत बिक्री विलेख के जरिए उसे आगे हस्तांतरित किए जाने की कड़ियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस संबंधित राजस्व रिकॉर्ड, कथित आदेश, डिजिटल दस्तावेज, बिक्री विलेख और जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।

अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में

पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कथित फर्जी आदेश तैयार करने और इस्तेमाल करने में तातोबा गावड़ा की क्या भूमिका थी तथा जमीन को निजी नामों पर कराने की प्रक्रिया में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। जमीन के नामांतरण और बिक्री से जुड़े दस्तावेजों में शामिल व्यक्तियों से पूछताछ की जा सकती है।

मामले में सरकारी जमीन के कथित गैरकानूनी हस्तांतरण, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, डिजिटल हस्ताक्षर की कथित नकल और बिक्री प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि 12 एकड़ सरकारी जमीन को वर्ग-1 में बदलने की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और उसके बाद ₹29 लाख में बिक्री तक कौन-कौन से कदम उठाए गए। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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