वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच साइबर मोर्चे पर भी टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। ईरान से जुड़े हैकरों पर अमेरिका की पेयजल और अपशिष्ट जल प्रणालियों को निशाना बनाने का आरोप लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई और अगस्त के दौरान कम से कम 12 राज्यों में जल प्रणालियों में कथित साइबर घुसपैठ की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें जॉर्जिया, न्यू जर्सी, मिशिगन, साउथ डकोटा और मिनेसोटा समेत कई राज्य शामिल हैं।
अमेरिकी खुफिया और जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ हमलों में जल संयंत्रों के डिजिटल रिमोट-कंट्रोल और निगरानी सिस्टम प्रभावित हुए। इससे औद्योगिक उपकरणों के स्वचालित संचालन और पानी की आपूर्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, सभी घटनाओं में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने की पुष्टि नहीं हुई है।
एक राज्य में 30 से अधिक वाटर सिस्टम निशाने पर
रिपोर्ट के अनुसार, 26 और 27 जुलाई को मिनेसोटा में 30 से अधिक सामुदायिक वाटर सिस्टम को निशाना बनाया गया। कई स्थानों पर स्वचालित नियंत्रण प्रणालियां प्रभावित हुईं, जिसके बाद संबंधित संस्थानों को अपने संचालन की निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था पर अतिरिक्त ध्यान देना पड़ा।
27 जुलाई के बाद अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो (FBI) और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) को कम से कम सात राज्यों से जल और अपशिष्ट जल प्रणालियों में इसी तरह की कथित हैकिंग की सूचनाएं मिलीं। जुलाई के अंतिम दिनों से अगस्त की शुरुआत तक जॉर्जिया, न्यू जर्सी, साउथ डकोटा और मिशिगन में भी ऐसी घटनाओं की जानकारी सामने आई।
अमेरिकी एजेंसियां इन घटनाओं को गंभीरता से ले रही हैं, क्योंकि जल संयंत्रों की डिजिटल प्रणालियों में सेंध से केवल डेटा चोरी का खतरा नहीं होता, बल्कि वास्तविक औद्योगिक प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
इंटरनेट से जुड़े कंट्रोलर्स पर नजर
FBI और साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी (CISA) ने जल सुविधाओं को अपनी निगरानी और साइबर सुरक्षा मजबूत करने की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, हमलावर इंटरनेट से जुड़े प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर्स (PLC) को निशाना बना रहे हैं।
PLC ऐसे औद्योगिक उपकरण हैं जो जल संयंत्रों में विभिन्न मशीनों और प्रक्रियाओं के संचालन को नियंत्रित करते हैं। इनका इस्तेमाल पानी के दबाव, पंपों के संचालन और रासायनिक पदार्थों की निर्धारित मात्रा में मिलावट जैसी प्रक्रियाओं की निगरानी के लिए किया जाता है।
आरोप है कि हमलावर इंटरनेट पर खुले इन उपकरणों की पहचान करते हैं और डिफॉल्ट या चोरी किए गए पासवर्ड तथा अन्य सुरक्षा कमजोरियों का फायदा उठाकर उनमें प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। यदि ऐसे सिस्टम पर नियंत्रण हासिल हो जाए तो संयंत्र के संचालन में बदलाव करना संभव हो सकता है।
साइबर हमले से बढ़ी अमेरिकी चिंता
जल आपूर्ति जैसी बुनियादी सेवाओं को निशाना बनाए जाने से अमेरिकी अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। छोटे और मध्यम आकार के जल संयंत्रों में अक्सर सीमित साइबर सुरक्षा संसाधन होते हैं। ऐसे में इंटरनेट से जुड़े पुराने उपकरण, कमजोर पासवर्ड और पर्याप्त निगरानी का अभाव हमलावरों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जल प्रणालियों को सार्वजनिक इंटरनेट से अलग रखना, डिफॉल्ट पासवर्ड बदलना, बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण लागू करना और औद्योगिक नेटवर्क की लगातार निगरानी करना जरूरी है।
पश्चिम एशिया के तनाव के बीच बढ़ा साइबर दबाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तत्काल बड़ी सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव बनाए रखने के संकेत दिए हैं। उन्होंने ईरान की आर्थिक स्थिति और महंगाई को लेकर दबाव जारी रखने की बात कही है।
हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया है कि ईरान क्षेत्र में परेशानी पैदा कर सकता है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने का खतरा मौजूद है।
वहीं, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा गाजा को लेकर ट्रंप की शांति योजना को अस्वीकार किए जाने से पश्चिम एशिया में अमेरिकी रणनीति को लेकर भी दबाव बढ़ा है।
युद्ध और तनाव का आर्थिक असर अमेरिका पर भी दिखाई दे रहा है। इस सप्ताह वहां पेट्रोल की औसत कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की ईरान पर बमबारी शुरू होने के समय की तुलना में एक डॉलर से अधिक ज्यादा है। ऐसे में जल प्रणालियों पर कथित साइबर हमले अमेरिका के लिए सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी एक नई चुनौती बनकर उभरे हैं।
